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दंगे में हत्या, रेप के मुकदमों में समझौते न करें: कारी जाकिर
ब्यूरो, अमर उजाला/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 11 Jan 2018 01:35 AM IST
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कार्यक्रम को संबोधित करते कारी जाकिर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जमीयत उलमा-ए-हिंद ने 2013 के दंगों में आपसी समन्वय बनाने और सौहार्द के लिए बनाई गई कमेटी का स्वागत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दंगों के दौरान हत्या और रेप के मामलों में कोई समझौता नहीं किया जाए। किसी भी अपराधी से समझौता करना गलत होगा और इससे आपराधिक मानसिकता हावी होगी। जमीयत ने मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर के लिए अनुमति लेने की अपील भी की।
बुधवार को मेरठ रोड पर विकास भवन के समक्ष स्थित मस्जिद आशिक इलाही में जमीयत उलमा-ए-हिंद की बैठक में कारी जाकिर ने कहा कि वर्ष 2013 में जनपद में हुए सांप्रदायिक दंगों में मुलायम सिंह यादव की पहल पर सौहार्द कमेटी का गठन किया गया है, इसका जमीयत स्वागत करती है। जमीयत हमेशा से ही सांप्रदायिक सौहार्द की पक्षधर रही है। दंगों के बाद से आज तक भाईचारा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि दंगों के दौरान हत्या और रेप के आरोपियों के साथ सौहार्द कमेटी कोई भी समझौता न करें। जमीयत चाहती है कि दोनों समाज के लोगों के बीच दूरियां खत्म हों, लेकिन इसके लिए अपराधियों को बचाने का समझौता नहीं होना चाहिए। जिसने अपराध किया है, उसको कड़ी सजा दिलानी चाहिए। यदि इन अपराधियों को समझौते के आधार पर बचाया जाएगा तो यह आपराधिक मानसिकता को बढ़ावा देने के साथ ही अपराधियों को संरक्षण देने जैसी बात होगी।
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जाकिर ने कहा कि कोर्ट से लाउडस्पीकर के लिए फैसला आने के बाद प्रदेश सरकार ने दिशा निर्देश जारी किए हैं, ये किसी एक समुदाय या धर्म के लिए नहीं है, बल्कि सभी के लिए समान नीति पर लागू हो रहे हैं। ऐसे में इस निर्णय का पालन किया जाए। धर्मस्थलों पर लगे लाउडस्पीकर की अनुमति समय सीमा के अंदर ले ली जाए, ताकि कोई विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। बैठक में मुख्य रूप से कारी अब्दुल माजिद, मौलाना मआज हसन, अब्दुल खालिक, हम्माद, इकबाल, अब्दुस्समद, कारी शाहनवाज, इंतजार राना, आकिल, सुलेमान शिबली, सादिक आदि मौजूद रहे।
बुधवार को मेरठ रोड पर विकास भवन के समक्ष स्थित मस्जिद आशिक इलाही में जमीयत उलमा-ए-हिंद की बैठक में कारी जाकिर ने कहा कि वर्ष 2013 में जनपद में हुए सांप्रदायिक दंगों में मुलायम सिंह यादव की पहल पर सौहार्द कमेटी का गठन किया गया है, इसका जमीयत स्वागत करती है। जमीयत हमेशा से ही सांप्रदायिक सौहार्द की पक्षधर रही है। दंगों के बाद से आज तक भाईचारा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि दंगों के दौरान हत्या और रेप के आरोपियों के साथ सौहार्द कमेटी कोई भी समझौता न करें। जमीयत चाहती है कि दोनों समाज के लोगों के बीच दूरियां खत्म हों, लेकिन इसके लिए अपराधियों को बचाने का समझौता नहीं होना चाहिए। जिसने अपराध किया है, उसको कड़ी सजा दिलानी चाहिए। यदि इन अपराधियों को समझौते के आधार पर बचाया जाएगा तो यह आपराधिक मानसिकता को बढ़ावा देने के साथ ही अपराधियों को संरक्षण देने जैसी बात होगी।
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जाकिर ने कहा कि कोर्ट से लाउडस्पीकर के लिए फैसला आने के बाद प्रदेश सरकार ने दिशा निर्देश जारी किए हैं, ये किसी एक समुदाय या धर्म के लिए नहीं है, बल्कि सभी के लिए समान नीति पर लागू हो रहे हैं। ऐसे में इस निर्णय का पालन किया जाए। धर्मस्थलों पर लगे लाउडस्पीकर की अनुमति समय सीमा के अंदर ले ली जाए, ताकि कोई विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। बैठक में मुख्य रूप से कारी अब्दुल माजिद, मौलाना मआज हसन, अब्दुल खालिक, हम्माद, इकबाल, अब्दुस्समद, कारी शाहनवाज, इंतजार राना, आकिल, सुलेमान शिबली, सादिक आदि मौजूद रहे।