{"_id":"60a7fc698ebc3e34fa148bb0","slug":"kari-osman-raised-voice-against-terrorism-devband-news-mrt5392282116","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारी उस्मान की सदारत में उठी थी आतंकवाद के खिलाफ आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कारी उस्मान की सदारत में उठी थी आतंकवाद के खिलाफ आवाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद(सहारनपुर)। वर्ष 2008 में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष बनने के बाद मौलाना कारी सैयद उस्मान मंसूरपुरी की सदारत में देवबंद की सरजमीन से पहली बार आतंकवाद के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज बुलंद हुई थी।
जमीयत उलमा-ए-हिंद का बागडोर हाथों में आने के बाद वर्ष 2008 में जमीयत के बैनर तले और कारी उस्मान की सदारत में देवबंद में आतंकवाद विरोधी कांफ्रेंस का आयोजन हुआ था।
मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी सहित राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी व अन्य उलमा ने आतंकवाद के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज को बुलंद किया था। इसमें आतंकवाद के खिलाफ फतवा भी जारी किया गया था। जमीयत की आतंक विरोधी कांफ्रेंस से बौखलाएएक आतंकी संगठन ने मौलाना महमूद मदनी को धमकी तक दे डाली थी। इसमें मौलाना सैयद कारी उस्मान मंसूरपुरी ने कहा था की आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता। इसलिए जमीयत उलमा आतंकवाद की मुखालफत करता है। जमीयत की यह कांफ्रेंस पूरी दुनिया में चर्चा की विषय बनी थी।
विज्ञापन
एक माह के भीतर दारुल उलूम को चौथा बड़ा झटका लगा
देवबंद। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम को कारी उस्मान के इंतकाल के साथ ही एक माह के भीतर चौथा बड़ा झटका लगा है। इससे पूर्व संस्था से जुड़े तीन और उस्तादों की मौत हो चुकी है। जो संस्था और इस्लामी जगत के लिए बड़ा नुकसान है।
4 मई को दारुल उलूम के उस्ताद व संस्था से प्रकाशित होने वाली अरबी मैगजीन के संपादक मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का इंतकाल हुआ। ठीक उसके अगले दिन 5 मई को फारसी विषय के उस्ताद मौलाना कासिम मेरठी की मौत हो गई। 13 मई को संस्था के उस्ताद-ए-हदीस मौलाना हबीबुर्रहमान का इंतकाल हुआ और 21 मई को कारी उस्मान के इंतकाल से दारुल उलूम प्रबंधतंत्र को बड़ा झटका लगा है।
विज्ञापन
देवबंद(सहारनपुर)। वर्ष 2008 में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष बनने के बाद मौलाना कारी सैयद उस्मान मंसूरपुरी की सदारत में देवबंद की सरजमीन से पहली बार आतंकवाद के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज बुलंद हुई थी।
जमीयत उलमा-ए-हिंद का बागडोर हाथों में आने के बाद वर्ष 2008 में जमीयत के बैनर तले और कारी उस्मान की सदारत में देवबंद में आतंकवाद विरोधी कांफ्रेंस का आयोजन हुआ था।
विज्ञापन
मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी सहित राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी व अन्य उलमा ने आतंकवाद के खिलाफ पुरजोर तरीके से आवाज को बुलंद किया था। इसमें आतंकवाद के खिलाफ फतवा भी जारी किया गया था। जमीयत की आतंक विरोधी कांफ्रेंस से बौखलाएएक आतंकी संगठन ने मौलाना महमूद मदनी को धमकी तक दे डाली थी। इसमें मौलाना सैयद कारी उस्मान मंसूरपुरी ने कहा था की आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता। इसलिए जमीयत उलमा आतंकवाद की मुखालफत करता है। जमीयत की यह कांफ्रेंस पूरी दुनिया में चर्चा की विषय बनी थी।
विज्ञापन
एक माह के भीतर दारुल उलूम को चौथा बड़ा झटका लगा
देवबंद। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम को कारी उस्मान के इंतकाल के साथ ही एक माह के भीतर चौथा बड़ा झटका लगा है। इससे पूर्व संस्था से जुड़े तीन और उस्तादों की मौत हो चुकी है। जो संस्था और इस्लामी जगत के लिए बड़ा नुकसान है।
4 मई को दारुल उलूम के उस्ताद व संस्था से प्रकाशित होने वाली अरबी मैगजीन के संपादक मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का इंतकाल हुआ। ठीक उसके अगले दिन 5 मई को फारसी विषय के उस्ताद मौलाना कासिम मेरठी की मौत हो गई। 13 मई को संस्था के उस्ताद-ए-हदीस मौलाना हबीबुर्रहमान का इंतकाल हुआ और 21 मई को कारी उस्मान के इंतकाल से दारुल उलूम प्रबंधतंत्र को बड़ा झटका लगा है।