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सेवाभाव में कांता ने ढूंढी अध्यात्म की राह, महिला दिवस पर हुआ सम्मान
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 08 Mar 2018 11:08 PM IST
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कांता आर्य को सम्मानित करते आर्य समाज के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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सामाजिक अड़चनों और विपरीत हालातों में एक महिला ने सेवाभाव से आध्यात्म की राह ही नहीं पाई, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों को भी निष्ठा से पूरा किया। बीते 41 साल से वह गांधी कॉलोनी के आर्य समाज में सेविका हैं। कक्षा पांच तक पढ़ी कांता आर्य अब वेदपाठ करती हैं और भजन भी सुनाती हैं। महिला दिवस पर उनकी सादगी, सरलता, सेवा और आत्मविश्वास के लिए उनका अभिनंदन किया गया।
जीवन की दुश्वारियों के आगे भी वह नहीं डिगी। दिल्ली के सीताराम बाजार में वर्ष 1948 में जन्मी कांता के पिता रामचंद्र और मां कलावती का छोटी उम्र में ही निधन हो गया। ताऊ मामराज ने उन्हें पाला और पांचवीं तक की शिक्षा दिलाई। जानसठ के गांव सिकरेड़ा के हुकुमचंद धीमान से उनकी शादी हुई। पति राजमिस्त्री का काम करते थे, मगर भवन निर्माण के वक्त हुए हादसे में उनकी मौत हो गई। दो बेटियों और एक बेटे को पालने की जिम्मेदारी उन पर आ गई।
तंगहाली में आर्य समाज ने सहारा दिया। अधिवक्ता हरबंस लाल नंदा की प्रेरणा से वह यज्ञ, सत्संग की सेवा में लग गईं। वर्ष 1977 से आज तक कांता की सेवा यात्रा निरंतर चल रही है। संतों और विद्वानों के सानिध्य में उन्होंने वेदपाठ का अभ्यास किया। वक्त के साथ वह मधुर भजन सुनाने लगीं। चार दशक की लंबी सेवा में उनके स्वभाव, सरलता में कोई बदलाव नहीं आया। बृहस्पतिवार को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने विदुषी कांता आर्य को शॉल और सम्मान राशि भेंटकर उनकी सेवाओं का अभिनंदन किया।
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वेद प्रचारिका संगीता आर्य ने कहा कि कांता का अतिथि सत्कार प्रेरित करता है। नंदिनी आर्य, प्रधानाचार्य इंदू आर्य ने कहा कि मां के दायित्व को पूरा करने के साथ वह आर्य समाज में संचालित विद्यालय की देखरेख भी करती हैं। नीलम आर्य, ऊषा पटपटिया, गजेंद्र राणा, इंद्रपाल सिंह, तिलकराम, आचार्य दयाचंद, देवेंद्र सिंह राणा, जय सिह आर्य, राजेश आर्य, दीपिका आदि ने कांता देवी की सेवा को संस्कार और संस्कृति का दर्पण बताया।
सौम्या मलिक चुनी गई बिजनेस वूमेन
मुजफ्फरनगर। शहर की एक बेटी को बिजनेस वुमेन ऑफ ईयर चुना गया। मोहल्ला गोशाला निवासी राजेश मलिक की बेटी सौम्या को छह मार्च को दिल्ली के होटल ताज में यह सम्मान दिया गया। मां सुरेश मलिक ने बताया कि एमबीए शिक्षा पा चुकी सौम्या बिजनेस में ऊंचाईयां छूना चाहती है। सम्मान के बाद घर लौटी बेटी का परिजनों ने स्वागत किया।
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जीवन की दुश्वारियों के आगे भी वह नहीं डिगी। दिल्ली के सीताराम बाजार में वर्ष 1948 में जन्मी कांता के पिता रामचंद्र और मां कलावती का छोटी उम्र में ही निधन हो गया। ताऊ मामराज ने उन्हें पाला और पांचवीं तक की शिक्षा दिलाई। जानसठ के गांव सिकरेड़ा के हुकुमचंद धीमान से उनकी शादी हुई। पति राजमिस्त्री का काम करते थे, मगर भवन निर्माण के वक्त हुए हादसे में उनकी मौत हो गई। दो बेटियों और एक बेटे को पालने की जिम्मेदारी उन पर आ गई।
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तंगहाली में आर्य समाज ने सहारा दिया। अधिवक्ता हरबंस लाल नंदा की प्रेरणा से वह यज्ञ, सत्संग की सेवा में लग गईं। वर्ष 1977 से आज तक कांता की सेवा यात्रा निरंतर चल रही है। संतों और विद्वानों के सानिध्य में उन्होंने वेदपाठ का अभ्यास किया। वक्त के साथ वह मधुर भजन सुनाने लगीं। चार दशक की लंबी सेवा में उनके स्वभाव, सरलता में कोई बदलाव नहीं आया। बृहस्पतिवार को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने विदुषी कांता आर्य को शॉल और सम्मान राशि भेंटकर उनकी सेवाओं का अभिनंदन किया।
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वेद प्रचारिका संगीता आर्य ने कहा कि कांता का अतिथि सत्कार प्रेरित करता है। नंदिनी आर्य, प्रधानाचार्य इंदू आर्य ने कहा कि मां के दायित्व को पूरा करने के साथ वह आर्य समाज में संचालित विद्यालय की देखरेख भी करती हैं। नीलम आर्य, ऊषा पटपटिया, गजेंद्र राणा, इंद्रपाल सिंह, तिलकराम, आचार्य दयाचंद, देवेंद्र सिंह राणा, जय सिह आर्य, राजेश आर्य, दीपिका आदि ने कांता देवी की सेवा को संस्कार और संस्कृति का दर्पण बताया।
सौम्या मलिक चुनी गई बिजनेस वूमेन
मुजफ्फरनगर। शहर की एक बेटी को बिजनेस वुमेन ऑफ ईयर चुना गया। मोहल्ला गोशाला निवासी राजेश मलिक की बेटी सौम्या को छह मार्च को दिल्ली के होटल ताज में यह सम्मान दिया गया। मां सुरेश मलिक ने बताया कि एमबीए शिक्षा पा चुकी सौम्या बिजनेस में ऊंचाईयां छूना चाहती है। सम्मान के बाद घर लौटी बेटी का परिजनों ने स्वागत किया।