{"_id":"2943718630d9366b4a3586f0c1a026be","slug":"kamal-s-absence-elephant-fed-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथी की गैरमौजूदगी ने खिलाया कमल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथी की गैरमौजूदगी ने खिलाया कमल
ब्यूरो / अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 17 Feb 2016 12:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। उपचुनाव में बसपा के चुनाव नहीं लड़ने का सीधा फायदा बीजेपी को हुआ। शहर का दलित वोट भी सांप्रदायिक आधार पर बीजेपी के पक्ष में बह गया। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 31529 मत हासिल किए थे।
शहर सीट पर सपा को उसकी आशा के अनुरूप ही वोट मिले। इस बार बसपा के चुनाव मैदान में नहीं होने का सीधा लाभ बीजेपी को मिला। शहर सीट पर लगभग 25 हजार दलित मतदाता है। 2012 में बसपा से अरविंद राज शर्मा प्रत्याशी थे।
दलित मतों के साथ कुछ ब्राह्मण भी उन्हें मिल गए थे। इससे बीजेपी खिसक कर 44167 मतों पर आ गई थी। बसपा के चुनाव में नहीं होने से बीजेपी इस चुनाव में 65378 मतों पर चली गई।
विज्ञापन
शहर का दलित भी सांप्रदायिक आधार पर बीजेपी के पक्ष में चला गया। यदि बसपा चुनाव लड़ती को बीजेपी के लिए सीट निकालना मुश्किल हो सकता था। बीजेपी नेता भी मानते हैं कि दलितों ने उसके पक्ष में मतदान किया है।
विज्ञापन
शहर सीट पर सपा को उसकी आशा के अनुरूप ही वोट मिले। इस बार बसपा के चुनाव मैदान में नहीं होने का सीधा लाभ बीजेपी को मिला। शहर सीट पर लगभग 25 हजार दलित मतदाता है। 2012 में बसपा से अरविंद राज शर्मा प्रत्याशी थे।
विज्ञापन
दलित मतों के साथ कुछ ब्राह्मण भी उन्हें मिल गए थे। इससे बीजेपी खिसक कर 44167 मतों पर आ गई थी। बसपा के चुनाव में नहीं होने से बीजेपी इस चुनाव में 65378 मतों पर चली गई।
विज्ञापन
शहर का दलित भी सांप्रदायिक आधार पर बीजेपी के पक्ष में चला गया। यदि बसपा चुनाव लड़ती को बीजेपी के लिए सीट निकालना मुश्किल हो सकता था। बीजेपी नेता भी मानते हैं कि दलितों ने उसके पक्ष में मतदान किया है।