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Muzaffarnagar News: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर विवेचक तलब

Thu, 13 Jul 2023 12:47 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jul 2023 12:47 AM IST
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Judge summoned for disobeying Supreme Court's orders
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने पर जिला जज नाराज
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- अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई के बाद पुलिस विवेचक तलब
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। सात साल तक सजा वाले मुकदमों में गिरफ्तारी के संबंध में पुलिस द्वारा सुप्रीम कोर्ट का पालन नहीं करने पर जिला जज चवन प्रकाश ने नाराजगी जताई है। ऐसे दो मामलों में जवाब तलब करते हुए विवेचकों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का आदेश पारित किया गया है।
जिला जज ने अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य की वर्ष 2014 और सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीआई के मामलों में दिए निर्णय का हवाला दिया। इसमें केस पंजीकृत होने के बाद अभियुक्तों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए के तहत विवेचक नोटिस देना अनिवार्य है। महिला थाने के अपराध की धारा 498ए, 323, 504, 506 आईपीसी के अंतर्गत आरोपी फुरकान आदि ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। सभी धाराओं में सात साल तक सजा है।
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वहीं, दूसरा मामला भोपा थाने का है। आरोपी गौरव द्वारा धारा 147, 148, 354, 323 और 504 के अपराध में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई। दोनों मामलों में अदालत के समक्ष आरोपियों के अधिवक्ताओं ने तर्क रखा कि पुलिस विवेचक द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में आरोपियों को कोई नोटिस नहीं दिया। बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दे रहा है।
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सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पुलिस केस डायरी का अवलोकन किया। जिसमें धारा 41ए की कार्रवाई के नोटिस का जिक्र नहीं मिला। जनपद न्यायाधीश ने दोनों थानों के विवेचकों से लिखित में स्पष्टीकरण तलब करते हुए अगली तिथि पर व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में हाजिर होने के आदेश पारित किए। दोनों प्रकरणों में आदेश की कॉपी एसएसपी को अवलोकन के लिए भेजी है। भोपा वाले प्रकरण में 19 जुलाई और महिला थाने वाले मामले में 18 जुलाई सुनवाई के लिए नियत की गई।


सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत कार्रवाई करें पुलिस
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल जिंदल एवं महासचिव जितेंद्र कुमार ने बताया इस संबंध में जिला जज से मुूलाकात की थी। इसमें थानों द्वारा सात साल तक सजा वाले मुकदमों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने का मुद्दा रखा था। जिला जज से इस समस्या को गंभीरता से लिया है। इससे वादकारी को फायदा होगा। पुलिस को ऐसे मामलों में आरोपियों के साथ निष्पक्षता बरतनी चाहिए। ताकि सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश का पालन हों सके।
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