देवबंद। जमीयत उलमा-हिंद के राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम चरण में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भी खुलकर चर्चा की गई। मुस्लिम देशों और उनके हालातों पर चिंता जताई गई। इसके साथ ही उलमा ने सीरिया, यमन और फलस्तीन सहित अन्य मुस्लिम देशों के प्रति उनके शासकों से अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाने की अपील की गई। उलमा ने कहा कि मुस्लिम देशों की सभी गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। इसलिए इन देशों के शासकों को चाहिए कि वह अपने नागरिकों का ख्याल रखे और उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाएं।
जमीयत का बजट हुआ 13 करोड़ रुपये
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद का वार्षिक बजट 13 करोड़ 35 लाख 70 हजार रुपये हो गया है। यह बजट वर्ष 2022-23 के लिए होगा, जबकि पूर्व में यह बजट 8 करोड़ था। महंगाई को देखते हुए इसमें पांच करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है। महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन ने बताया कि स्कॉलरशिप व दीन की तालीम पर 1-1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि जमीयत रिलीफ फंड के लिए डेढ़ करोड़ रुपये आरक्षित किए गए हैं।