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अफसरों की उपेक्षा से लटकी कैदी की रिहाई
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 25 Jan 2016 06:45 PM IST
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मुजफ्फरनगर। प्रशासन की ढुलमुल नीति की वजह से राज्यपाल के आदेश के बावजूद सितारगंज जेल में बंद कैदी नसीम की रिहाई लटकी हुई है। 25 साल से सलाखों के पीछे कैद नसीम को कारागार से मुक्त करने की डीएम आफिस की पत्रावली को जेल प्रशासन ने आधी अधूरी बताकर वापस कर दिया है।
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कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 के उप सचिव पलबिन्दर सिंह के 10 दिसंबर 2015 के आदेश में जिला प्रशासन को शाहपुर के बसधाड़ा गांव निवासी नसीम पुत्र दीन मौहम्मद की रिहाई के लिए पत्रावली भेजी थी। राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-432 के आधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए उक्त बंदी को कारागार से मुक्त करने का निर्णय लिया गया।
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प्रशासन के अफसरों की टेबल पर नसीम कैदी की रिहाई की फाइल बीते एक माह से इधर से उधर घूम रही है। पहले तो एडीएम प्रशासन मनोज सिंह ने कारागार सुधार अनुभाग के उप सचिव के आदेश पत्र को ही फर्जी करार दे दिया। उत्तराखंड के उधमसिंह नगर की सितारगंज जेल में जिला प्रोबेशन अधिकारी की ओर से आदेश की जांच के लिए पत्र लिखा गया। जेल अधीक्षक टी. ज्योति ने कैदी को मुक्त करने के आदेश की लिखित में पुष्टि की, तब जाकर प्रशासन ने फाइल आगे बढ़ाई।
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18 जनवरी को डीएम निखिलचंद्र शुक्ला ने कैदी नसीम की फाइल पर रिहाई की संस्तुति कर दी। जेल अधीक्षक ने डीएम के पत्र को अधूरा बताते हुए उसको रिहा करने से इंकार कर दिया। डीएम के आदेश में शासनादेश के मुताबिक दो जमानतियों और मुचलका स्वीकृत करने की प्रक्रिया नहीं दर्शाई गई है। जेल अधीक्षक टी. ज्योति ने डीएम कैंप कार्यालय पर फैक्स और पत्र मेल कर संस्तुति को नए सिरे से भेजने का आग्रह किया। डीएम ने नसीम की फाइल को वापस एडीएम प्रशासन के कार्यालय भेज दिया है, जिस कारण ढाई दशक से जेल में बंद बेकसूर कैदी नसीम की रिहाई लटकी हुई है।
यह था नसीम का मामला
मुजफ्फरनगर। बसधाड़ा गांव के निकट स्थित अलियारपुर गांव में तीन अप्रैल 1975 को इकबाल की हत्या हो गई थी। मंसूरपुर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया। जांच में धारा 302/34 के अधीन फैय्याज और नसीम को आरोपी बनाया गया था। एडीजे-1 बीके राठी की अदालत ने 24 मार्च 1979 को दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट से जमानत के बाद यह मामला 11 साल तक लंबित रहा। 1990 में हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी तो फैयाज और नसीम को फिर जेल जाना पड़ा। तब से नसीम जेल में बंद है, जबकि 2010 में रिहा हुए फैयाज की मौत हो चुकी है। मृतक इकबाल की पत्नी जहीदा ने 2012 में शपथ पत्र देकर नसीम को बेकसूर बताया था और डीएम, एसएसपी से उसको रिहा करने की मांग की थी।