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Muzaffarnagar News: आधी आबादी को मिले पूरी बागडोर

Thu, 30 Oct 2025 01:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 01:51 AM IST
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Half the population should get complete control
रुड़की रोड स्थित अमर उजाला कार्यालय पर संवाद कार्यक्रम में विचार रखती हुईं महिलाएं स्रोत संवाद
मुजफ्फरनगर। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रुड़की रोड स्थित अमर उजाला कार्यालय पर संवाद में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी विषय पर विचार रखे गए। महिलाओं ने कहा कि कुछ राज्यों में महिलाओं को पंचायती राज में 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है। उत्तर प्रदेश में भले ही अभी 33 प्रतिशत ही आरक्षण की ही व्यवस्था लागू है लेकिन उसमें प्रधान के पति का हस्तक्षेप बंद होना चाहिए और महिलाओं को सक्रिय भागीदारी मिलनी चाहिए।
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जड़ौदा के होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल में सामाजिक विज्ञान विषय की शिक्षिका सुरेखा ने कहा कि महिला अगर ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य, या सरपंच के पद पर होती है तो उनका पति ही सारी व्यवस्थाओं को देखता है। महिलाओं को नाममात्र नेता के रूप में देखा जाता है।
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एसडी कालेज ऑफ मैनेजमेंट की प्रोफेसर डॉ. योगिता पुंडीर ने कहा कि इसके लिए समाज को भी अपनी सोच बदलनी होगी। महिला को उनके अधिकारों का लाभ लेने के लिए परिवार से आजादी भी जरूरी है। महिला आरक्षित सीट पर चुनाव जीतने के बाद महिला की भूमिका को खत्म कर दिया जाता है। यह सही नहीं है।
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मानव अधिकार संरक्षण संघ की राष्ट्रीय महासचिव मिथलेश गोयल ने कहा कि मतदाताओं को भी ऐसी महिला को चुनना चाहिए जोकि जनप्रतिनिधि के रूप में अपने कार्यों और दायित्वों का निर्वाह कर सके। सक्रिय महिला का चुनाव प्रधानपति जैसी प्रथाओं को रोक सकता है।
राजकीय इंटर कॉलेज की राजनीति विज्ञान की शिक्षिका गीता रानी ने कहा कि महिलाओं को खुद ही सचेत होना पड़ेगा। अगर वह अपने पद की जिम्मेदारी के प्रति खुद ही उदासीन रहेंगी तो कोई भी उनके अधिकारों का हनन कर सकता है।

शिक्षिका रजनी ने कहा कि परिवारवाद की राजनीति में शामिल महिलाएं केवल चुनाव लड़ने और जीतने तक मैदान में दिखाई देती हैं। उसके बाद वह घर की चारदीवारी से ही कागजी कार्यवाही में हस्ताक्षर करने तक सीमित रहती हैं।

समाज सेवी पूजा द्विवेदी ने कहा कि ग्रामीण परिवेश की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। शिक्षा और अधिकारों का ज्ञान पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ा सकता है।

कवियत्री पुष्पा अग्रवाल ने कहा महिलाओं अगर सरकारी स्तर से उनको 33 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है तो सक्रिय भागीदारी के लिए भी उस स्तर के प्रयास होने चाहिए। इसके लिए मापदंड निर्धारित हो ताकि महिला वास्तव में आगे बढ़ सके।


राजकीय इंटर कॉलेज की शिक्षिका पूनम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता का अभाव भी महिलाओं को प्रशासनिक कार्यों पूरी तरह से संलग्न होने नहीं देता। इस दिशा में ज्यादा प्रयास की जरूरत है।
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