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रक्तरंजित रहे हैं जिले में ग्राम पंचायत चुनाव
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मुजफ्फरनगर पंचायत चुनाव
रक्तरंजित होते रहे हैं जिले में ग्राम पंचायत चुनाव
मुजफ्फरनगर। जिले में पहले भी पंचायत चुनाव रक्तरंजित होने कारण माहौल खराब होता रहा है। चुनाव रंजिश की इतिहास पर भौराखुर्द व भाज्जू से शुरू होकर कत्लोगारत का यह सिलसिला सिसौली, कुरथल व सीकरी तक जा पहुंचा। यही कारण है कि आगामी ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर पुलिस-प्रशासन पहले से ही सतर्क हो गया है।
जनपद में ग्राम पंचायत चुनाव की रंजिश की शुरूआत भौराकलां क्षेत्र के गांव भौराखुर्द से हुई थी। वर्ष 1989 में गांव में पहली हत्या हुई। वर्ष 2004 में गांव निवासी शोभाराम के बेटे सतेंद्र की हत्या हुई, जिसमें ब्रह्मपाल पक्ष नामजद हुआ। ब्रह्मपाल का बेटा सतीश इसी योजना में प्रधान बना, जिसके बाद शोभाराम पक्ष ने खूनी संघर्ष की शुरूआत करते हुए ब्रह्मपाल समेत उसके पक्ष के चार लोगों की हत्याएं कीं। वर्ष 2005 में ब्रह्मपाल पक्ष के तीन लोगों की हत्याएं की गईं। वर्ष 2006 में ब्रह्मपाल पक्ष के ही दो लोग इस रंजिश की भेंट चढ़े तो वर्ष 2007 में भी ब्रह्मपाल के बेटे ग्राम प्रधान सतीश समेत इसी पक्ष के पांच लोगों की हत्याएं हुईं। वर्ष 2008 में ब्रह्मपाल पक्ष ने पलटवार करते हुए शोभाराम पक्ष के चार लोगों की हत्याएं कीं। वर्ष 2009 में शोभाराम पक्ष के ही तीन और वर्ष 2010 में इसी पक्ष के स्कूल प्रधानाचार्य को स्कूल में बच्चों के सामने गोलियों से भून दिया गया। वर्तमान में दोनों पक्षों में केवल एक-एक व्यक्ति जीवित हैं। इनमें शोभाराम का बेटा जितेंद्र कुछ समय पूर्व जेल से छूटा है, जबकि ब्रह्मपाल का बेटा व दो लाख का इनामी हरीश भूमिगत है।
चुनाव रंजिश में दूसरा नाम आता है गांव भाज्जू का, जो वर्तमान में जनपद शामली का गांव है। यहां वर्ष 2007 में तत्कालीन ग्राम प्रधान सुखबीरी देवी, उनके बेटे धर्मेंद्र व नौकर रमेश की सामूहिक हत्या कर दी गई। इसके बाद दोनों पक्षों में लंबी गैंगवार चली, जिसमें अब तक दस से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं।
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भौराकलां क्षेत्र का ही कस्बा सिसौली चुनाव रंजिश का तीसरा केंद्र बना, जहां पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र छत्री व वर्तमान चेयरमैन पति यशपाल बंजी के बीच चुनाव रंजिश चली। वर्ष 2009 में इस रंजिश में पहली हत्या हुई, जिसके बाद अब तक यहां कुल पांच लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं। वर्तमान में दोनों पक्ष सिसौली में ही रह रहे हैं। चुनाव रंजिश का अगला केंद्र बना बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र का गांव कुरथल। यहां वर्ष 19 नवंबर 2015 को ग्राम प्रधान पद के प्रबल दावेदार बिल्लू की उसकी पत्नी के सामने ही गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इस हत्या में एक लाख के इनामी रहे ब्रह्मसिंह कुरथल का नाम आया, जो वर्तमान जेल में बंद है। वहीं, बिल्लू की पत्नी निवर्तमान ग्राम प्रधान है। भोपा क्षेत्र का गांव सीकरी चुनावी गैंगवार का हालिया केंद्र है, जहां जमशेद व तस्लीम पक्ष के बीच वर्ष 2016 से चुनाव रंजिश शुरू हुई। अब तक तस्लीम के साथ ही उसके पक्ष के अंबार की भी हत्या की जा चुकी है। इनमें जमशेद के साथ ही उसके तीन भाई भी जेल में बंद हैं।
चुनाव से पहले सक्रिय हुआ पुलिस-प्रशासन
मुजफ्फरनगर। पंचायत चुनाव के खूनी इतिहास को देखते हुए पुलिस-प्रशासन आगामी चुनाव को लेकर सतर्क हो गया है। एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि गांव-गांव पुरानी रंजिश व विवादों को चिह्नित किया जा रहा है। जहां भी विवाद या संघर्ष की आशंका है, वहां पहले से ही संबंधित पक्षों को मुचलका पाबंद किया जा रहा है। इसके साथ ही लाइसेंसी शस्त्रों का भी वेरीफिकेशन कराते हुए उन्हें थानों में जमा कराया जा रहा है।
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मुजफ्फरनगर। जिले में पहले भी पंचायत चुनाव रक्तरंजित होने कारण माहौल खराब होता रहा है। चुनाव रंजिश की इतिहास पर भौराखुर्द व भाज्जू से शुरू होकर कत्लोगारत का यह सिलसिला सिसौली, कुरथल व सीकरी तक जा पहुंचा। यही कारण है कि आगामी ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर पुलिस-प्रशासन पहले से ही सतर्क हो गया है।
जनपद में ग्राम पंचायत चुनाव की रंजिश की शुरूआत भौराकलां क्षेत्र के गांव भौराखुर्द से हुई थी। वर्ष 1989 में गांव में पहली हत्या हुई। वर्ष 2004 में गांव निवासी शोभाराम के बेटे सतेंद्र की हत्या हुई, जिसमें ब्रह्मपाल पक्ष नामजद हुआ। ब्रह्मपाल का बेटा सतीश इसी योजना में प्रधान बना, जिसके बाद शोभाराम पक्ष ने खूनी संघर्ष की शुरूआत करते हुए ब्रह्मपाल समेत उसके पक्ष के चार लोगों की हत्याएं कीं। वर्ष 2005 में ब्रह्मपाल पक्ष के तीन लोगों की हत्याएं की गईं। वर्ष 2006 में ब्रह्मपाल पक्ष के ही दो लोग इस रंजिश की भेंट चढ़े तो वर्ष 2007 में भी ब्रह्मपाल के बेटे ग्राम प्रधान सतीश समेत इसी पक्ष के पांच लोगों की हत्याएं हुईं। वर्ष 2008 में ब्रह्मपाल पक्ष ने पलटवार करते हुए शोभाराम पक्ष के चार लोगों की हत्याएं कीं। वर्ष 2009 में शोभाराम पक्ष के ही तीन और वर्ष 2010 में इसी पक्ष के स्कूल प्रधानाचार्य को स्कूल में बच्चों के सामने गोलियों से भून दिया गया। वर्तमान में दोनों पक्षों में केवल एक-एक व्यक्ति जीवित हैं। इनमें शोभाराम का बेटा जितेंद्र कुछ समय पूर्व जेल से छूटा है, जबकि ब्रह्मपाल का बेटा व दो लाख का इनामी हरीश भूमिगत है।
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चुनाव रंजिश में दूसरा नाम आता है गांव भाज्जू का, जो वर्तमान में जनपद शामली का गांव है। यहां वर्ष 2007 में तत्कालीन ग्राम प्रधान सुखबीरी देवी, उनके बेटे धर्मेंद्र व नौकर रमेश की सामूहिक हत्या कर दी गई। इसके बाद दोनों पक्षों में लंबी गैंगवार चली, जिसमें अब तक दस से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं।
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भौराकलां क्षेत्र का ही कस्बा सिसौली चुनाव रंजिश का तीसरा केंद्र बना, जहां पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र छत्री व वर्तमान चेयरमैन पति यशपाल बंजी के बीच चुनाव रंजिश चली। वर्ष 2009 में इस रंजिश में पहली हत्या हुई, जिसके बाद अब तक यहां कुल पांच लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं। वर्तमान में दोनों पक्ष सिसौली में ही रह रहे हैं। चुनाव रंजिश का अगला केंद्र बना बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र का गांव कुरथल। यहां वर्ष 19 नवंबर 2015 को ग्राम प्रधान पद के प्रबल दावेदार बिल्लू की उसकी पत्नी के सामने ही गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इस हत्या में एक लाख के इनामी रहे ब्रह्मसिंह कुरथल का नाम आया, जो वर्तमान जेल में बंद है। वहीं, बिल्लू की पत्नी निवर्तमान ग्राम प्रधान है। भोपा क्षेत्र का गांव सीकरी चुनावी गैंगवार का हालिया केंद्र है, जहां जमशेद व तस्लीम पक्ष के बीच वर्ष 2016 से चुनाव रंजिश शुरू हुई। अब तक तस्लीम के साथ ही उसके पक्ष के अंबार की भी हत्या की जा चुकी है। इनमें जमशेद के साथ ही उसके तीन भाई भी जेल में बंद हैं।
चुनाव से पहले सक्रिय हुआ पुलिस-प्रशासन
मुजफ्फरनगर। पंचायत चुनाव के खूनी इतिहास को देखते हुए पुलिस-प्रशासन आगामी चुनाव को लेकर सतर्क हो गया है। एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि गांव-गांव पुरानी रंजिश व विवादों को चिह्नित किया जा रहा है। जहां भी विवाद या संघर्ष की आशंका है, वहां पहले से ही संबंधित पक्षों को मुचलका पाबंद किया जा रहा है। इसके साथ ही लाइसेंसी शस्त्रों का भी वेरीफिकेशन कराते हुए उन्हें थानों में जमा कराया जा रहा है।