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सुख भोगने भर से दुखों का अंत नहीं होता 

Tue, 07 Feb 2017 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 07 Feb 2017 12:03 AM IST
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कार्यक्रम में सत्संग करते कथा वाचक। - फोटो : अमर उजाला
मोरना में कथा व्यास स्वामी कृष्णकांत महाराज ने कहा कि सुख भोगने से दुखों का अंत नहीं होता है। राजा हो रंक अथवा स्वर्ग का देव ही क्यों न हो, बहुत सुख भोगने पर भी उसको शांति की प्राप्ति नहीं होती है। भगवान के दर्शन की इच्छा रखने वाले से पाप छूटने लगते हैं। जबकि संसार को कोई भी भोग भोगने की इच्छा होते ही पाप का आरंभ होता है।
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शुक्रताल शुकदेव आश्रम के डोंगरे कथा भवन में चल रही साप्ताहिक भागवत कथा में स्वामी कृष्णकांत महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण दर्शन की इच्छा रखकर जो साधन करते हैं, उसको सभी साधु और संत आशीर्वाद देते हैं। मगर जो भगवान को भूलकर मोह माया में फंस जाता है, उसको साधू और संत कदापि आशीर्वाद नहीं देते हैं। पृथ्वी परमात्मा की शक्ति है। प्रात: काल में वैष्णव पृथ्वी का वंदन कर फिर अपने पांव पृथ्वी के ऊपर रखता है।
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उसको कष्ट का अनुभव कम होता है। बहुत लोग कथाओं में आते हैं तब भी पान सुपाड़ी को खाकर आते हैं। कलयुग में ऐसे कामों को नहीं छोड़ने वाले काम, क्रोध और लोभ आदि को कैसे छोड़ सकता है। इन सभी से छुटकारा चाहते हो तो भागवत के शरणगत हो जाओ, कल्याण हो जाएगा। मौके पर कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। दीनानाथ लोहिया, गोपाल, महेश, विष्णुकांत, खेमराम, इंद्र, रामप्रकाश, पवन, अरुण, वीना अग्रवाल, अरुण मोदी, मनोज, नगेंद्र आदि बिहार राज्य से आए श्रद्धालुओं को कथा व्यास ने सफेद मोतियों की माला पहना कर आशीर्वाद दिया।
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