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दंगों के चार साल बाद पटरी पर प्रॉपर्टी का कारोबार
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 20 Apr 2018 12:22 AM IST
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- फोटो : File Photo
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जिले में 2013 में हुए दंगों के बाद प्रॉपर्टी का कारोबार धड़ाम हो गई थी। दंगे के दंश से लोग उबर भी नहीं पाए थे कि रियल एस्टेट में आई मंदी और उसके बाद नोटबंदी ने प्रॉपर्टी का कारोबार करने वालों को तोड़ डाला। चार साल बाद जिला जमीनों की खरीद-फरोख्त में आगे बढ़ा है। हालांकि यह क्रय-विक्रय केवल जरूरतमंद लोगों ने ही किया है। बाजार से ब्लैकमनी प्रॉपर्टी कारोबार से गायब हो रही है। क्योंकि जमीन के पैसे का लेन-देन सीधा बैंक एकाउंट से हो रहा है।
दंगों से पहले जिले में प्रॉपर्टी का बूम था। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों और उद्यमियों ने अपनी काली कमाई प्रापर्टी में ही खपा रखी थी। शहर के हाइवे पर कई कालोनियों की नींव रखी गई। इसी बीच जिले में दंगे हो जाने से यहां सबसे ज्यादा नुकसान प्रॉपर्टी के कारोबार में लगे लोगों को हुआ।
बाहर के जिन लोगों ने इन्वेस्टमेंट किया था, वह अपना पैसा निकालने में लग गए और औने-पौने दामों में जमीनों की बिक्री की। इसी के साथ रियल एस्टेट में छाई मंदी का भी यह असर हुआ कि प्रॉपर्टी के दाम 30 से 50 प्रतिशत तक लुढ़क गए। इसके बाद नोटबंदी ने ब्लैकमनी को गायब कर दिया तो असर प्रॉपर्टी पर ही पड़ा। लगातार चार साल तक यहां जमीनों की खरीद फरोख्त घटती रही।
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लंबे समय बाद जिले में हालात बदलने प्रारंभ हुए है। वर्ष 2017-18 में जिले में 168 करोड़ 61 लाख रुपया राजस्व बैनामों से ही सरकार को मिला है। 2014-15 में बैनामों से जिले में 142 करोड़ का राजस्व आया। 2015-16 में यह घटकर 136 करोड़ रह गया। वर्ष 2016-17 में 123 करोड़ 50 लाख पर आ गया। प्रोपर्टी की बिक्री लगातार कम होने से राजस्व भी लगातार घटता गया।
36 प्रतिशत आय बढ़ी
मुजफ्फरनगर। सहायक महानिरीक्षक निबंधन एसडी सिंह ने बताया कि बीते वर्ष के मुकाबले वर्ष 2017-18 में राजस्व में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 19 प्रतिशत बैनामे बढे़ हैं। 123 करोड़ 50 लाख के मुकाबले इस बार 168 करोड़ 61 लाख की आय हुई। सबसे बड़ी बात यह है कि लेन-देन सब बैंक एकाउंट से हो रहा है, इसलिए ब्लैकमनी प्रॉपर्टी में नहीं आई। प्रदेश में हमें 25वां स्थान मिला है और 86.3 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया।
गन्ना बढ़ाएगा डिमांड
मुजफ्फरनगर। जिले में इस बार गन्ने की बंपर पैदावार हुई है। किसान 2600 करोड़ से ऊपर का गन्ना चीनी मिलों में डाल चुके हैं। यह उम्मीद है कि चीनी मिलों में 2900 करोड़ से ऊपर का गन्ना इस सीजन में चला जाएगा। किसानों के पास गन्ने का पैसा आने से यहां प्रॉपर्टी में उछाल आ सकता है। इस वर्ष तहसील में होने वाले बैनामों की संख्या बढ़ सकती है।
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दंगों से पहले जिले में प्रॉपर्टी का बूम था। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों और उद्यमियों ने अपनी काली कमाई प्रापर्टी में ही खपा रखी थी। शहर के हाइवे पर कई कालोनियों की नींव रखी गई। इसी बीच जिले में दंगे हो जाने से यहां सबसे ज्यादा नुकसान प्रॉपर्टी के कारोबार में लगे लोगों को हुआ।
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बाहर के जिन लोगों ने इन्वेस्टमेंट किया था, वह अपना पैसा निकालने में लग गए और औने-पौने दामों में जमीनों की बिक्री की। इसी के साथ रियल एस्टेट में छाई मंदी का भी यह असर हुआ कि प्रॉपर्टी के दाम 30 से 50 प्रतिशत तक लुढ़क गए। इसके बाद नोटबंदी ने ब्लैकमनी को गायब कर दिया तो असर प्रॉपर्टी पर ही पड़ा। लगातार चार साल तक यहां जमीनों की खरीद फरोख्त घटती रही।
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लंबे समय बाद जिले में हालात बदलने प्रारंभ हुए है। वर्ष 2017-18 में जिले में 168 करोड़ 61 लाख रुपया राजस्व बैनामों से ही सरकार को मिला है। 2014-15 में बैनामों से जिले में 142 करोड़ का राजस्व आया। 2015-16 में यह घटकर 136 करोड़ रह गया। वर्ष 2016-17 में 123 करोड़ 50 लाख पर आ गया। प्रोपर्टी की बिक्री लगातार कम होने से राजस्व भी लगातार घटता गया।
36 प्रतिशत आय बढ़ी
मुजफ्फरनगर। सहायक महानिरीक्षक निबंधन एसडी सिंह ने बताया कि बीते वर्ष के मुकाबले वर्ष 2017-18 में राजस्व में 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 19 प्रतिशत बैनामे बढे़ हैं। 123 करोड़ 50 लाख के मुकाबले इस बार 168 करोड़ 61 लाख की आय हुई। सबसे बड़ी बात यह है कि लेन-देन सब बैंक एकाउंट से हो रहा है, इसलिए ब्लैकमनी प्रॉपर्टी में नहीं आई। प्रदेश में हमें 25वां स्थान मिला है और 86.3 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया।
गन्ना बढ़ाएगा डिमांड
मुजफ्फरनगर। जिले में इस बार गन्ने की बंपर पैदावार हुई है। किसान 2600 करोड़ से ऊपर का गन्ना चीनी मिलों में डाल चुके हैं। यह उम्मीद है कि चीनी मिलों में 2900 करोड़ से ऊपर का गन्ना इस सीजन में चला जाएगा। किसानों के पास गन्ने का पैसा आने से यहां प्रॉपर्टी में उछाल आ सकता है। इस वर्ष तहसील में होने वाले बैनामों की संख्या बढ़ सकती है।