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Muzaffarnagar News: निपुण भारत मिशन का विस्तार, अब कक्षा पांच तक के छात्र होंगे शामिल
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों के शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए निपुण भारत मिशन का विस्तार किया गया है। अब कक्षा पांच तक के छात्र निपुण भारत मिशन परीक्षा का हिस्सा बनेंगे। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने नए मानक तय किए हैं।
जिले में 884 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इनमें अभी तक प्राथमिक स्तर पर कक्षा एक से तीन तक विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने पर जोर दिया जा रहा था।
विभाग ने कक्षा चार और पांच के विद्यार्थियों के लिए भी सीखने के स्पष्ट मानक निर्धारित किए हैं। इनमें सीखने के स्तर, विषयगत समझ और शैक्षणिक प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी। इसके लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन विषयों पर विशेष फोकस किया जाएगा।
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बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत केवल पाठ्यक्रम को पूरा कराने का ही उद्देश्य नहीं रहेगा बल्कि छात्र को विषयों को समझने की प्रवृत्ति विकसित की जाएगी। नियमित मूल्यांकन के माध्यम से बच्चों की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। निर्धारित मानकों से कम सीख रहे छात्रों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों के शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए निपुण भारत मिशन का विस्तार किया गया है। अब कक्षा पांच तक के छात्र निपुण भारत मिशन परीक्षा का हिस्सा बनेंगे। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने नए मानक तय किए हैं।
जिले में 884 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इनमें अभी तक प्राथमिक स्तर पर कक्षा एक से तीन तक विद्यार्थियों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने पर जोर दिया जा रहा था।
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विभाग ने कक्षा चार और पांच के विद्यार्थियों के लिए भी सीखने के स्पष्ट मानक निर्धारित किए हैं। इनमें सीखने के स्तर, विषयगत समझ और शैक्षणिक प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी। इसके लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन विषयों पर विशेष फोकस किया जाएगा।
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बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत केवल पाठ्यक्रम को पूरा कराने का ही उद्देश्य नहीं रहेगा बल्कि छात्र को विषयों को समझने की प्रवृत्ति विकसित की जाएगी। नियमित मूल्यांकन के माध्यम से बच्चों की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। निर्धारित मानकों से कम सीख रहे छात्रों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।