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समाज में शैक्षिक जागरूकता और सामाजिक सुधार जरूरी
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फोटो कैप्सन बुढ़ाना 10द्वठ्ठद्दड्ढस्रठ्ठ3 में आल इंडिया ईसलाहुल मुस्लिमीन कमेटी की बैठक को संबो?
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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बुढ़ाना। आल इंडिया ईसलाहुल मुस्लिमीन कमेटी द्वारा आयोजित सामाजिक सुधार बैठक में सभी वक्ताओं ने समाज में शैक्षिक जागरूकता और सामाजिक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। मौलाना कलीम सिद्दीकी ने कहा कि हक अदा करना दीन दारी और अदा न करना बे दीनी है।
कस्बे की मस्जिद पीर शाह विलायत में आल इंडिया इस्लाहुल मुस्लिमीन कमेटी के बैनर तले शैक्षिक जागरूकता और सामाजिक सुधार बैठक हुई। मौलाना कलीम सिद्दीकी ने कहा कि लोगों को कुरान का पाठ करने का अभ्यास करना चाहिए। इसे अपने जीवन में शामिल करें। अल्लाह उन पर रहम करता है। उन्होंने अपने धर्म के बारे में कहा कि हक अदा करना, ओर न करना दो बातें है। हक अदा करना दीन दारी है, ओर अदा न करना बे दीनी है। कारी मौहम्मद आकिल ने ईसलाहे मुआशरा, तालीमी बेदारी, मुफ्तीयाने किराम, ऊलमा, हुफफाज और कुररा की अहमियत व जरूरत पर रोशनी डाली।
मुफ्ती वसीम ने कहा कि कयामत के दिन न केवल अल्लाह के हकूक, बल्कि बंदों के हकूक का भी हिसाब लिया जाएगा। यह अफसोस की बात है कि हम अल्लाह के हक के साथ-साथ बंदों के हक की भी अनदेखी कर रहे हैं। मौके पर मौलाना वसी, मुफ्ती गुलफाम, सालिम कासमी, कारी खान, कारी शेरद्दीन व आसिफ कुरैशी आदि ने विचार व्यक्त किए।
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कस्बे की मस्जिद पीर शाह विलायत में आल इंडिया इस्लाहुल मुस्लिमीन कमेटी के बैनर तले शैक्षिक जागरूकता और सामाजिक सुधार बैठक हुई। मौलाना कलीम सिद्दीकी ने कहा कि लोगों को कुरान का पाठ करने का अभ्यास करना चाहिए। इसे अपने जीवन में शामिल करें। अल्लाह उन पर रहम करता है। उन्होंने अपने धर्म के बारे में कहा कि हक अदा करना, ओर न करना दो बातें है। हक अदा करना दीन दारी है, ओर अदा न करना बे दीनी है। कारी मौहम्मद आकिल ने ईसलाहे मुआशरा, तालीमी बेदारी, मुफ्तीयाने किराम, ऊलमा, हुफफाज और कुररा की अहमियत व जरूरत पर रोशनी डाली।
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मुफ्ती वसीम ने कहा कि कयामत के दिन न केवल अल्लाह के हकूक, बल्कि बंदों के हकूक का भी हिसाब लिया जाएगा। यह अफसोस की बात है कि हम अल्लाह के हक के साथ-साथ बंदों के हक की भी अनदेखी कर रहे हैं। मौके पर मौलाना वसी, मुफ्ती गुलफाम, सालिम कासमी, कारी खान, कारी शेरद्दीन व आसिफ कुरैशी आदि ने विचार व्यक्त किए।
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