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300 किलोमीटर लंबी पूर्वी काली नदी को किया जाएगा पुनर्जीवित

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jul 2019 12:21 AM IST
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प्रतीकत्मक तस्वीर
प्रतीकत्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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300 किलोमीटर लंबी पूर्वी काली नदी को किया जाएगा पुनर्जीवित
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मुजफ्फरनगर। हरियाणा में मृत हो चुकी सरस्वती की तरह मुजफ्फरनगर से शुरू होने वाली पूर्वी काली नदी को भी पुनर्जीवन देने की कवायद तेज हो गई है। टेढ़े-मेढ़े रास्तों से बल खाते हुए बहने के कारण जिले में इसे नागिन नदी के नाम से भी जाना जाता है। अंतवाड़ा में नदी के उद्गम स्थल पर झील का निर्माण होते ही इसमें जलधारा बह निकलेगी। परियोजना पर काम कर रहे नीर फाउंडेशन के निदेशक का कहना है कि जलस्तर नीचे जाने के कारण नदी मृत हो गई है। इसकी थोड़ी सी खोदाई होते ही पानी निकल आएगा।
जानसठ-खतौली मार्ग पर बसे गांव अंतवाड़ा से नागिन नदी का उदय होता है। जलस्तर गिरने से उद्गम स्थल के आसपास लोगों ने आवास बना लिए और नदी की करीब 160 बीघा जमीन पर खेती करने लगे। मौके पर नाले जैसी संरचना आज भी है। बारिश होने से इसमें पानी भर गया है। ग्रामीण अरविंद कुमार बताते हैं कि 15 साल पहले तक स्त्रोत से पानी निकलता था और आसपास के पूरे क्षेत्र में भरा रहता है। अब जलस्तर नीचे चला गया है। मृत हो चुकी इस नदी को जीवन देने का बीड़ा नीर फाउंडेशन ने उठाया है। फाउंडेशन के निदेशक रमनकांत त्यागी बताते हैं कि अंतवाड़ा से शुरू होकर यह नदी मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, एटा, फर्रुखाबाद, कासगंज होते हुए कन्नौज में गंगा में मिलती है। कन्नौज में इसे कालिंदी के नाम से भी जाना जाता है। 300 किलोमीटर से ज्यादा लंबी नदी के किनारे करीब 1200 गांव और कस्बे बसे हैं। उद्गम स्थल से निकलने वाले जल के साथ ही कई स्थानों पर छोटी नदियां और नाले इसमें मिलते हैं। इससे नदी का जलस्तर बढ़ता रहता था, लेकिन जब उद्गम से पानी निकलना बंद होने के कारण नदी सूख गई है। मेरठ के आसपास इसमें गंदे नालों और औद्योगिक इकाइयों का पानी डाला जा रहा है, जिससे नदी नाले में तब्दील हो गई है। रमनकांत बताते हैं कि अंतवाड़ा में नदी के उद्गम स्थल पर थोड़ी सी खोदाई होते ही जलस्त्रोत फूट पड़ेगा और नदी में फिर से पानी बहने लगेगा। अक्तूबर माह तक इस नदी को फिर से जीवित करने की योजना है।

मौके पर होगा झील का निर्माण
नागिन नदी के उद्गम स्थल पर झील बनाने के लिए 16 जुलाई को खोदाई कार्य शुरू होना था। बारिश होने तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के कांवड़ यात्रा में व्यस्त होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका। मौके पर झील बनेगी और इसका सुंदरीकरण होगा। जमीन से फूटने वाली जलधारा नदी को जीवित कर देगी। उद्गम स्थल से मेरठ जिले की सीमा तक नदी की लंबाई करीब 14 किलोमीटर है और दस गांव किनारे पर बसे हैं। वर्तमान में नदी पूरी तरह सूखी पड़ी है। नागिन नदी को नमामि गंगे परियोजना में शामिल किया गया है। इसके तहत मेरठ व अन्य जनपदों में बह रही इस नदी के किनारे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे तथा नालों से भी मुक्ति दिलाई जाएगी। नदी को पुराने स्वरूप में लाने के लिए उद्गम स्थल की 60 बीघा से ज्यादा भूमि कब्जामुक्त कराया जा चुका है।

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