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Muzaffarnagar News: पंचतत्व में विलीन में हुए पहले महावीर चक्र विजेता धर्मवीर सिंह
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कर्नल धर्मवीर सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित करते तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी: फाइल फोटो
- फोटो : 1
चरथावल(मुजफ्फरनगर)। दुनिया में भारतीय सेना के साहस, शौर्य और बलिदान की मिसाल बने भमेला गांव के महावीर चक्र विजेता धर्मवीर सिंह ने अहमदाबाद में अंतिम सांस लीं। बेटे कर्नल सुधीर कुमार सिंह ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। बृहस्पतिवार को वाडीलाल शव गृह में सैन्य बलों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में पंचतत्व में विलीन हो गए।
वर्ष 1971 में पाक के खिलाफ युद्ध में लड़े कर्नल धर्मवीर सिंह ने वीरता, अदम्य साहस और पराक्रम से मुल्क को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। इस अदम्य साहस पर उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने उन्हें महावीर चक्र के राष्ट्रीय सैन्य सम्मान से अलंकृत किया था।
87 वर्षीय धर्मवीर सिंह ने भारतीय सेना में लंबी सेवाएं देने के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा जॉइन की। गुजरात राज्य में डीआईजी के पद से रिटायर होने के बाद अहमदाबाद में रह रहे थे। एक बेटा युद्धवीर सिंह विदेश में सेवारत है।
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कर्नल सुधीर कुमार सिंह अधिवक्ता ने बताया कि पिताजी पूरी तरह स्वस्थ थे। लेकिन वृद्धावस्था के कारण बुधवार को उनका निधन हो गया। दुखद समाचार मिलने पर विमान से अहमदाबाद पहुंचे। वहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया। बताया कि महावीर चक्र का सम्मान पाने वालों में आज तक जिले में उन्हीं के नाम शामिल हैं।
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इस तरह सेना के हो गए थे धर्मवीर सिंह
चरथावल के जयहिंद इंटर कॉलेज से 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद धर्मवीर सिंह ने सेना में सेवा करना लक्ष्य बनाया। पिता कैप्टन तुहीराम ब्रिटिश फौज में रहकर द्वितीय विश्व युद्ध लड़े थे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने भारतीय सेना का फर्ज पूरा किया और वर्ष 1957 में रिटायर हो गए। पिता के साथ तैनात रहे मेरठ के सरधना क्षेत्र के गांव खेड़ा निवासी कर्नल प्रहलाद सिंह ने युवा धर्मवीर सिंह को प्रोत्साहित किया। फतेहगढ़ में सेना कमांडर के अधीन प्रशिक्षण के बाद उन्हें राजपूत रेजिमेंट में पहली तैनाती मिली। बाद में शहीद अब्दुल हमीद की फोर ग्रेनेडियर में कर्नल बनाया गया। यह भी संयोग है कि उनकी शादी कर्नल प्रहलाद सिंह की बेटी रमेश सिंह से हुई थी।
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हार हम नहीं जानते...
पाक को शिकस्त देने के लिए बनाई योजना में उन्होंने भारतीय सैनिकों में जोश भरा। संदेश में कहा था.. हार हम नहीं जानते हैं, भारतीय सेना विश्व की श्रेष्ठ सैन्य ताकत है। हमारी ताकत देश का गौरव बढ़ाती है।
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कर्नल सुधीर ने पिता के शौर्य से ली सीख
चरथावल। महावीर चक्र विजेता कर्नल धर्मवीर सिंह के शौर्य को उनके बेटे कर्नल सुधीर कुमार सिंह ने बरकरार रखा। सिक्किम नाथुला सीमा पर पहली तैनाती मिली। कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए। कहते हैं उनकी चौथी पीढ़ी भारतीय सेना का हिस्सा है। बेटी अलौकिका के पति मेजर टीएस शेखावत सेना में रहकर देश सेवा में जुटे हैं।
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वर्ष 1971 में पाक के खिलाफ युद्ध में लड़े कर्नल धर्मवीर सिंह ने वीरता, अदम्य साहस और पराक्रम से मुल्क को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। इस अदम्य साहस पर उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने उन्हें महावीर चक्र के राष्ट्रीय सैन्य सम्मान से अलंकृत किया था।
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87 वर्षीय धर्मवीर सिंह ने भारतीय सेना में लंबी सेवाएं देने के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा जॉइन की। गुजरात राज्य में डीआईजी के पद से रिटायर होने के बाद अहमदाबाद में रह रहे थे। एक बेटा युद्धवीर सिंह विदेश में सेवारत है।
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कर्नल सुधीर कुमार सिंह अधिवक्ता ने बताया कि पिताजी पूरी तरह स्वस्थ थे। लेकिन वृद्धावस्था के कारण बुधवार को उनका निधन हो गया। दुखद समाचार मिलने पर विमान से अहमदाबाद पहुंचे। वहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया। बताया कि महावीर चक्र का सम्मान पाने वालों में आज तक जिले में उन्हीं के नाम शामिल हैं।
इस तरह सेना के हो गए थे धर्मवीर सिंह
चरथावल के जयहिंद इंटर कॉलेज से 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद धर्मवीर सिंह ने सेना में सेवा करना लक्ष्य बनाया। पिता कैप्टन तुहीराम ब्रिटिश फौज में रहकर द्वितीय विश्व युद्ध लड़े थे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने भारतीय सेना का फर्ज पूरा किया और वर्ष 1957 में रिटायर हो गए। पिता के साथ तैनात रहे मेरठ के सरधना क्षेत्र के गांव खेड़ा निवासी कर्नल प्रहलाद सिंह ने युवा धर्मवीर सिंह को प्रोत्साहित किया। फतेहगढ़ में सेना कमांडर के अधीन प्रशिक्षण के बाद उन्हें राजपूत रेजिमेंट में पहली तैनाती मिली। बाद में शहीद अब्दुल हमीद की फोर ग्रेनेडियर में कर्नल बनाया गया। यह भी संयोग है कि उनकी शादी कर्नल प्रहलाद सिंह की बेटी रमेश सिंह से हुई थी।
हार हम नहीं जानते...
पाक को शिकस्त देने के लिए बनाई योजना में उन्होंने भारतीय सैनिकों में जोश भरा। संदेश में कहा था.. हार हम नहीं जानते हैं, भारतीय सेना विश्व की श्रेष्ठ सैन्य ताकत है। हमारी ताकत देश का गौरव बढ़ाती है।
कर्नल सुधीर ने पिता के शौर्य से ली सीख
चरथावल। महावीर चक्र विजेता कर्नल धर्मवीर सिंह के शौर्य को उनके बेटे कर्नल सुधीर कुमार सिंह ने बरकरार रखा। सिक्किम नाथुला सीमा पर पहली तैनाती मिली। कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए। कहते हैं उनकी चौथी पीढ़ी भारतीय सेना का हिस्सा है। बेटी अलौकिका के पति मेजर टीएस शेखावत सेना में रहकर देश सेवा में जुटे हैं।