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Muzaffarnagar News: सहकारी बैंक की कुर्सी के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे रामनाथ सिंह

Fri, 09 Oct 2026 01:25 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:25 AM IST
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Ramnath Singh moves Supreme Court over cooperative bank chairmanship.
मुजफ्फरनगर। सहकार से समृद्धि अभियान में समितियों के विभाजन के बाद पेंचीदा नियमों के चलते कुर्सी गंवाने वाले निवर्तमान सहकारी बैंक के चेयरमैन ठाकुर रामनाथ सिंह ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखित करते हुए चुनौती दी है। याची का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार ही समितियों का विभाजन कराया है, उनकी सदस्यता पर असर नहीं पड़ता।
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सहकारी बैंक के अध्यक्ष रामनाथ सिंह किसान सेवा समिति खेड़ा मस्तान, सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह मलिक पीनना समिति और पूर्व अध्यक्ष सत्यपाल पाल के बेटे पंकज पाल मुजफ्फरनगर पश्चिमी समिति से बैंक प्रतिनिधि के तौर पर चुने गए थे। संचालक चुने जाने के बाद जून 2023 में ठाकुर रामनाथ सिंह को जिला सहकारी बैंक का अध्यक्ष बनाया गया था।
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याचिकाकर्ता बुढ़ाना के सचिन जैन की ओर से दाखिल की गई रिट में कहा गया था कि रामनाथ सिंह की समिति कुरालसी, पंकज पाल की समिति वहलना और बिजेंद्र मलिक की लकड़संधा हो गई है। ऐसे में समितियों के विभाजन के कारण इनकी पुरानी समिति का बोर्ड भंग हो गया है।
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अब वह प्रतिनिधि नहीं रहे। 19 अगस्त को हाईकोर्ट में इस मामले में फैसला सुरक्षित करते हुए 15 सितंबर को आदेश जारी कर दिए थे। रामनाथ सिंह को हटाए जाने के बाद उनकी जगह उपसभापति को प्रभार दिया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी।
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इस नियम के हिसाब से गई थी सभापति की कुर्सी
मुजफ्फरनगर। हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा था कि नियम 453 (1) (h) के अनुसार प्रबंधन समिति का कोई सदस्य अपने पद पर तब तक नहीं रह सकता जब तक वह समिति की आमसभा का सदस्य नहीं रह जाता। नियम 87 (ix) के अनुसार प्रतिवादी के पूर्व स्थापित समिति की आम सभा के प्रतिनिधि न रह जाने पर, वह बैंक की आम सभा के सदस्य के रूप में प्रतिनिधि के पद पर बने रहने का दावा नहीं कर सकते। फलस्वरूप, नियम 453 (1)(h) के अंतर्गत निर्धारित शर्त लागू होती है और प्रतिवादी को बैंक की प्रबंधन समिति के सदस्य के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रतिनिधि पद से हटने के बाद वह अध्यक्ष का पद धारण या प्रयोग नहीं कर सकते, जो उनके प्रतिनिधि के रूप में पद पर आधारित और निर्भर है। परिणामस्वरूप, प्रतिनिधि के रूप में अपना पद समाप्त होने पर प्रतिवादी को अध्यक्ष के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ब्यूरो

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दोनों जिलों में यह बनाई गई समितियां
नवगठित समितियों में लकड़संधा, शकरपुर, सिलाजुड्डी, वहलना, पचैंडा कलां, बलवा खेड़ी, बरला, दहचंद, कुरालसी, पावटी कलां, रामड़ा, झिंझाना, दभेड़ी खुर्द, गुज्जरपुर, हींड, मंदौरा, भनेड़ा, चौसाना, शामली उत्तरी, सिलावर, दुल्लाखेड़ी समितियां बनाई गई हैं।
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