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हर साल डकार लिए जाते थे 3.33 करोड़
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 05 Sep 2015 12:43 AM IST
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मुजफ्फरनगर। विधवा पेंशन में हर साल तीन करोड़ 33 लाख रुपये डकारे जा रहे थे। जिला प्रोबेशन विभाग के रिकार्ड की छानबीन में यह तथ्य सामने आए हैं। 11 वर्षों से निरंतर चल रहे फर्जीवाड़े के इस खेल में विभाग के अधिकारी, बैंककर्मी और डाककर्मी भी बराबर शामिल रहे हैं। मामला सामने आने से जिले के उच्चाधिकारियों के भी होश उड़े हुए हैं।
विधवा पेंशन में घोटाला विभाग में लंबे समय से चल रहा था। अभी तक की छानबीन में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पिछले 11 वर्षों से घोटाला निरंतर चल रहा था। दो दिन पूर्व परियोजना निदेशक की शिकायत पर सीडीओ अवनीश कुमार शर्मा ने तात्कालिक रूप से एक जांच कमेटी बनाई थी।
इस जांच कमेटी में परियोजना अधिकारी वीपी श्रीवास्तव, लीड बैंक मैनेजर एके गोयल और लेखाकार आनंद तिवारी को शामिल किया गया। कमेटी ने दूसरे ही दिन अपनी रिपोर्ट दे दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
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रिपोर्ट में बैंक कर्मियों और डाक कर्मियों की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। यह भी सामने आया कि जिला प्रोबेशन कार्यालय में विधवाओं की फर्जी सूची तैयार कर पैसा हजम किया गया। वर्ष 2014 तक पैसा सीधे विभाग को मिलता था और 2015 से सीधे खातों में जाने लगा।
इस एक ही साल में विधवा पेंशन धारकों की संख्या मुजफ्फरनगर जिले में 7422 और शामली में 1852 घट गई। चूंकि बैंकों में फर्जी खाते खुलवाना कोई आसान कार्य नहीं था। दोनों जिलों में जहां 2014 तक 24 हजार 343 पेंशन जा रही थी, वहीं 2015 में घटकर यह मात्र 15069 रह गई।
घोटाले का जो पैसा अभी तक ठिकाने लगाया जा रहा है, वह सब 2014 तक का ही है। इससे पहले यह सारा पैसा डाकखानों में फर्जी खाते खोलकर और बैंकों में अधिकारियों के पदनाम के खातों से डकारा जाता रहा। विभाग में जो घोटाला हुआ,
उसमें मास्टरमाइंड तो लिपिक महबूब ही रहा, लेकिन बिना विभागीय अधिकारियों के घोटाला संभव नहीं था। इस फर्जीवाड़े में जिला प्रोबेशन अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सीडीओ अवनीश कुमार शर्मा ने बताया कि सीधे बैंक खातों में पैसा जारी होने के आदेश के बाद 9274 पेंशन घट जाना अपने आप में घोटाले का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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विधवा पेंशन में घोटाला विभाग में लंबे समय से चल रहा था। अभी तक की छानबीन में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पिछले 11 वर्षों से घोटाला निरंतर चल रहा था। दो दिन पूर्व परियोजना निदेशक की शिकायत पर सीडीओ अवनीश कुमार शर्मा ने तात्कालिक रूप से एक जांच कमेटी बनाई थी।
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इस जांच कमेटी में परियोजना अधिकारी वीपी श्रीवास्तव, लीड बैंक मैनेजर एके गोयल और लेखाकार आनंद तिवारी को शामिल किया गया। कमेटी ने दूसरे ही दिन अपनी रिपोर्ट दे दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
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रिपोर्ट में बैंक कर्मियों और डाक कर्मियों की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। यह भी सामने आया कि जिला प्रोबेशन कार्यालय में विधवाओं की फर्जी सूची तैयार कर पैसा हजम किया गया। वर्ष 2014 तक पैसा सीधे विभाग को मिलता था और 2015 से सीधे खातों में जाने लगा।
इस एक ही साल में विधवा पेंशन धारकों की संख्या मुजफ्फरनगर जिले में 7422 और शामली में 1852 घट गई। चूंकि बैंकों में फर्जी खाते खुलवाना कोई आसान कार्य नहीं था। दोनों जिलों में जहां 2014 तक 24 हजार 343 पेंशन जा रही थी, वहीं 2015 में घटकर यह मात्र 15069 रह गई।
घोटाले का जो पैसा अभी तक ठिकाने लगाया जा रहा है, वह सब 2014 तक का ही है। इससे पहले यह सारा पैसा डाकखानों में फर्जी खाते खोलकर और बैंकों में अधिकारियों के पदनाम के खातों से डकारा जाता रहा। विभाग में जो घोटाला हुआ,
उसमें मास्टरमाइंड तो लिपिक महबूब ही रहा, लेकिन बिना विभागीय अधिकारियों के घोटाला संभव नहीं था। इस फर्जीवाड़े में जिला प्रोबेशन अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सीडीओ अवनीश कुमार शर्मा ने बताया कि सीधे बैंक खातों में पैसा जारी होने के आदेश के बाद 9274 पेंशन घट जाना अपने आप में घोटाले का सबसे बड़ा प्रमाण है।