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मनमानी कर किराया वसूल रहे ई-रिक्शा चालक
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मुजफ्फरनगर। शहर में दौड़ाए जा रहे कुछ ई-रिक्शा के चालकों ने किराया बढ़ा दिया है। जिस कारण ई-रिक्शा का सफर महंगा हो गया है। चालक मनमाना किराया वसूल रहे है। कई बार तो चालकों और लोगों में कहासुनी भी हो चुकी है। पचैंडा रोड, अलमासपुर, सुरेंद्र नगर , कूकडा मंडी व सूजडू मार्ग से गुजरने वाले लोग परेशान हैं।
परिवहन विभाग में 42 सौ ई-रिक्शा पंजीकृत है। जबकि लगभग सात हजार से ज्यादा ई-रिक्शा शहरी क्षेत्र में फर्राटा रही है। प्रति यात्री दस रुपये किराया लेना शुरू किया था, लेकिन शहर में नए रूट प्लान के बाद से कुछ ई-रिक्शा चालक मनमानी करते हुए मर्जी से किराया वसूलना शुरू कर दिया है।
कार्रवाई के बाद शुरू हुई मनमानी
जब से शहर में जाम न लगने के लिए बनाई जा रही यातायात व्यवस्था के लिए कार्रवाई शुरू की गई। बेरिकेडिंग लगाई गई। शिव चौक पर ई-रिक्शाओं के पहुंचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। चालकों को इससे परेशानी होने लगी। तभी से किराया अधिक वसूलने की मनमानी के मामले सामने आने लगे।
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इन्होंने कहा
मै रैदासपुरी की रहने वाली हूं और कूकडा सब्जी मंडी में आलू बेचती हूूं। पहले ई-रिक्शा में दस रुपये में चली जाती थी, अब कभी उसने कोई बीस रुपये मांगता है तो कोई पच्चीस रुपये। दस रुपये के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती हैं। - शांति देवी
- मुझे सोमवार को काम से झांसी रानी पर जाना था। वहां तक जाने के लिए उससे बीस रुपये लिए गए। जबकि अब से पहले सभी चालक दस रुपये लेते थे। - पारुल त्यागी, निवासी पचैंडा रोड।
इन्होंने कहा
ई-रिक्शा का किराया परिवहन विभाग तय नहीं करता। चालकों ने खुद यह व्यवस्था बनाई है। यदि पहले से ज्यादा किराया वसूला जा रहा है और कोई शिकायत करता है तो इस बारे में चालक यूनियन से बात की जाएगी। - सुरेंद्र सिंह, एआरटीओ।
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परिवहन विभाग में 42 सौ ई-रिक्शा पंजीकृत है। जबकि लगभग सात हजार से ज्यादा ई-रिक्शा शहरी क्षेत्र में फर्राटा रही है। प्रति यात्री दस रुपये किराया लेना शुरू किया था, लेकिन शहर में नए रूट प्लान के बाद से कुछ ई-रिक्शा चालक मनमानी करते हुए मर्जी से किराया वसूलना शुरू कर दिया है।
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कार्रवाई के बाद शुरू हुई मनमानी
जब से शहर में जाम न लगने के लिए बनाई जा रही यातायात व्यवस्था के लिए कार्रवाई शुरू की गई। बेरिकेडिंग लगाई गई। शिव चौक पर ई-रिक्शाओं के पहुंचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। चालकों को इससे परेशानी होने लगी। तभी से किराया अधिक वसूलने की मनमानी के मामले सामने आने लगे।
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इन्होंने कहा
मै रैदासपुरी की रहने वाली हूं और कूकडा सब्जी मंडी में आलू बेचती हूूं। पहले ई-रिक्शा में दस रुपये में चली जाती थी, अब कभी उसने कोई बीस रुपये मांगता है तो कोई पच्चीस रुपये। दस रुपये के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती हैं। - शांति देवी
- मुझे सोमवार को काम से झांसी रानी पर जाना था। वहां तक जाने के लिए उससे बीस रुपये लिए गए। जबकि अब से पहले सभी चालक दस रुपये लेते थे। - पारुल त्यागी, निवासी पचैंडा रोड।
इन्होंने कहा
ई-रिक्शा का किराया परिवहन विभाग तय नहीं करता। चालकों ने खुद यह व्यवस्था बनाई है। यदि पहले से ज्यादा किराया वसूला जा रहा है और कोई शिकायत करता है तो इस बारे में चालक यूनियन से बात की जाएगी। - सुरेंद्र सिंह, एआरटीओ।