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गोबर से निर्मित दीपक और खिलौने बने आकर्षण का केंद्र
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ज्ञानामाजरा में दीपावली पर गोबर से दीपक आदि स्वदेशी उत्पाद बनाती बनाती महिलाएं
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
गोबर से निर्मित दीपक और खिलौने बने आकर्षण का केंद्र
मुजफ्फरनगर, चरथावल। बदलते जमाने के साथ ग्रामीण महिलाएं आकर्षक आइटम तैयार कर आत्मनिर्भर बन गई हैं। दीपावली पर गाय के गोबर से दीपक और देवी-देवताओं के खिलौने एवं सजावट का सामान तैयार किया गया है। गांव से तैयार सामान की बिक्री अमेजन और फ्लिपकार्ड के जरिये बुक कर रहे हैं। स्वदेशी को बढ़ावा देने के साथ ही महिलाएं स्वावलंबी बन मुनाफा कमाने लगी हैं। चरथावल क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से अमर उजाला ने स्वदेशी कारोबार की बारे में बातचीत की।
दुर्गा स्वयं सहायता समूह ज्ञानामाजरा में नए-नए उत्पाद के लिए जिलेभर में ख्यातिलब्ध है। अध्यक्ष सुमन देवी के सानिध्य में रश्मि, मंजू, राजेश, सुमन, पूनम, मोना, बबीता, सुरेश रेखा और मोनी त्योहार आने से पहले तैयारी में जुट जाती हैं। दीपावली पर गाय के गोबर से दीपक और लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा तैयार की हैं। आयुर्वेदिक और कीटाणयुक्त धूपबत्ती बनाकर बाजार में उतारा गया। ग्राम प्रधान कंवरपाल ने स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित किया। नेट से कच्चा माल मंगाया जाता है। गांव के अलावा ब्लॉक और जिले में स्टाल लगाकर तैयार आइटमों को गणेश दरबार 150, लक्ष्मी गणेश 50, धूपबत्ती 25 और दीपक दो रुपये में बिक्री की जाती है। गाय के गोबर को सूखाकर पिसवाते हैं और उसमें तीन तरह के पदार्थों को मिलाकर उत्पाद में काम लिया जाता है। सुमन बताती हैं कि समूह को उत्पादों से अच्छा मुनाफा होने लगा है।
कान्हा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष और ग्राम सखी शशि पुंडीर ने महिलाओं को दिवाली के उत्पाद बनाने के लिए जागरूक किया। करीब तीन वर्ष से वह त्योहारों से संबंधित उत्पाद बना रही हैं। 11 महिलाओं सीमा, ममता, सुनीता, उर्मिला आदि का समूह सजावट के सामान ड्रीम कैचर, वॉल हैगिंग, पुप्स, कुशन और झूमर बना रहा है। बड़ी कंपनियों में नेट द्वारा माल की बिक्री होती है। कच्चा माल समूह के नाम से ऑनलाइन मंगाया जाता है। दिवाली पर स्थानीय स्तर पर बिकने वाली कागज की झालर और कंडील बनाकर बाजार में उतारा है। गणेश जी, टेडिबियर औप झूला आदि बनाए हैं। आइटमों के वैरायटी के हिसाब से रेट 20 से लेकर 150 रुपये प्रति पीस है ।
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मुजफ्फरनगर, चरथावल। बदलते जमाने के साथ ग्रामीण महिलाएं आकर्षक आइटम तैयार कर आत्मनिर्भर बन गई हैं। दीपावली पर गाय के गोबर से दीपक और देवी-देवताओं के खिलौने एवं सजावट का सामान तैयार किया गया है। गांव से तैयार सामान की बिक्री अमेजन और फ्लिपकार्ड के जरिये बुक कर रहे हैं। स्वदेशी को बढ़ावा देने के साथ ही महिलाएं स्वावलंबी बन मुनाफा कमाने लगी हैं। चरथावल क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से अमर उजाला ने स्वदेशी कारोबार की बारे में बातचीत की।
दुर्गा स्वयं सहायता समूह ज्ञानामाजरा में नए-नए उत्पाद के लिए जिलेभर में ख्यातिलब्ध है। अध्यक्ष सुमन देवी के सानिध्य में रश्मि, मंजू, राजेश, सुमन, पूनम, मोना, बबीता, सुरेश रेखा और मोनी त्योहार आने से पहले तैयारी में जुट जाती हैं। दीपावली पर गाय के गोबर से दीपक और लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा तैयार की हैं। आयुर्वेदिक और कीटाणयुक्त धूपबत्ती बनाकर बाजार में उतारा गया। ग्राम प्रधान कंवरपाल ने स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित किया। नेट से कच्चा माल मंगाया जाता है। गांव के अलावा ब्लॉक और जिले में स्टाल लगाकर तैयार आइटमों को गणेश दरबार 150, लक्ष्मी गणेश 50, धूपबत्ती 25 और दीपक दो रुपये में बिक्री की जाती है। गाय के गोबर को सूखाकर पिसवाते हैं और उसमें तीन तरह के पदार्थों को मिलाकर उत्पाद में काम लिया जाता है। सुमन बताती हैं कि समूह को उत्पादों से अच्छा मुनाफा होने लगा है।
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कान्हा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष और ग्राम सखी शशि पुंडीर ने महिलाओं को दिवाली के उत्पाद बनाने के लिए जागरूक किया। करीब तीन वर्ष से वह त्योहारों से संबंधित उत्पाद बना रही हैं। 11 महिलाओं सीमा, ममता, सुनीता, उर्मिला आदि का समूह सजावट के सामान ड्रीम कैचर, वॉल हैगिंग, पुप्स, कुशन और झूमर बना रहा है। बड़ी कंपनियों में नेट द्वारा माल की बिक्री होती है। कच्चा माल समूह के नाम से ऑनलाइन मंगाया जाता है। दिवाली पर स्थानीय स्तर पर बिकने वाली कागज की झालर और कंडील बनाकर बाजार में उतारा है। गणेश जी, टेडिबियर औप झूला आदि बनाए हैं। आइटमों के वैरायटी के हिसाब से रेट 20 से लेकर 150 रुपये प्रति पीस है ।
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