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दो पन्नों से ज्यादा न लिखें इतिहास के बड़े सवालों के जवाब
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मुजफ्फरनगर। माध्यमिक शिक्षा की परिषदीय परीक्षाओं की तैयारी शुरू हो गई है। जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार ने परीक्षार्थियों की मदद के लिए विषय विशेषज्ञों का पैनल बनाया है। इतिहास विषय की विशेष जैन कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. कंचन प्रभा शुक्ला का कहना है कि इतिहास विषय के दीर्घ सवालों के जवाब दो पन्नों से ज्यादा न लिखें। विषय का अध्ययन और परीक्षा के लिए तैयारी दोनों स्थितियों में अंतर का ध्यान रखना होगा।
इतिहास एक व्यापक विषय है। परीक्षा में छात्र-छात्राओं के सामने सवालों को निर्धारित अवधि में हल करने की चुनौती होती है, जिसके कारण वे विषय का पर्याप्त ज्ञान होते हुए भी परीक्षा अवधि में संतुलित प्रदर्शन नही कर पाते हैं। इसलिए इतिहास विषय की परीक्षा के लिए उचित मार्गदर्शन जरूरी है।
डॉ. कंचन प्रभा शुक्ला ने बताया कि उनसे कक्षा 12 और कक्षा 10 के छात्र-छात्राएं संपर्क कर रहे हैं। जिन्हें सुझाव दिया गया है कि इतिहास विषय के दीर्घ प्रश्नोत्तरों को संतुलित लिखने व उस पर सीमित प्रकाश डालने के बाद बिंदुवार संक्षेप में उत्तर लिखने चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण बिंदू को न छोड़ने का अभ्यास से बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।
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महत्वपूर्ण बिंदुओं को विषय की पुस्तक के अतिरिक्त अन्य पुस्तकों से संदर्भ लेकर तैयार करना व अधिकतम उत्तर पुस्तिका के दो पन्नों तक सीमित रखना सबसे सटीक प्रश्नोत्तर की स्थिति होती है।
लघु प्रश्नों का सटीक हल एक अथवा दो वाक्यों में होना चाहिए। ऐसे प्रश्नों की विस्तृत विवेचना का इस स्थान पर कोई उपयोग नहीं होता। एक शब्द में अपेक्षित प्रश्नोत्तर बिल्कुल सीमित व सटीक, सही प्रदर्शन को प्रकट करते हैं। स्पष्ट लेख व सटीक भाषा उत्कृष्ट प्रदर्शन का आधार है। नक्शे संबंधी प्रश्नोत्तर पर भी परीक्षा तैयारी में समुचित स्थान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो विषय में शत प्रतिशत अंक लाने के लिए बड़ी भूमिका निभाते हैं।
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इतिहास एक व्यापक विषय है। परीक्षा में छात्र-छात्राओं के सामने सवालों को निर्धारित अवधि में हल करने की चुनौती होती है, जिसके कारण वे विषय का पर्याप्त ज्ञान होते हुए भी परीक्षा अवधि में संतुलित प्रदर्शन नही कर पाते हैं। इसलिए इतिहास विषय की परीक्षा के लिए उचित मार्गदर्शन जरूरी है।
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डॉ. कंचन प्रभा शुक्ला ने बताया कि उनसे कक्षा 12 और कक्षा 10 के छात्र-छात्राएं संपर्क कर रहे हैं। जिन्हें सुझाव दिया गया है कि इतिहास विषय के दीर्घ प्रश्नोत्तरों को संतुलित लिखने व उस पर सीमित प्रकाश डालने के बाद बिंदुवार संक्षेप में उत्तर लिखने चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण बिंदू को न छोड़ने का अभ्यास से बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।
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महत्वपूर्ण बिंदुओं को विषय की पुस्तक के अतिरिक्त अन्य पुस्तकों से संदर्भ लेकर तैयार करना व अधिकतम उत्तर पुस्तिका के दो पन्नों तक सीमित रखना सबसे सटीक प्रश्नोत्तर की स्थिति होती है।
लघु प्रश्नों का सटीक हल एक अथवा दो वाक्यों में होना चाहिए। ऐसे प्रश्नों की विस्तृत विवेचना का इस स्थान पर कोई उपयोग नहीं होता। एक शब्द में अपेक्षित प्रश्नोत्तर बिल्कुल सीमित व सटीक, सही प्रदर्शन को प्रकट करते हैं। स्पष्ट लेख व सटीक भाषा उत्कृष्ट प्रदर्शन का आधार है। नक्शे संबंधी प्रश्नोत्तर पर भी परीक्षा तैयारी में समुचित स्थान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो विषय में शत प्रतिशत अंक लाने के लिए बड़ी भूमिका निभाते हैं।