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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि आज: इस खास रिपोर्ट में तस्वीरों के साथ पढ़िए बाबा टिकैत की सादगी की अनूठी यादें

Sat, 15 May 2021 05:59 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sat, 15 May 2021 05:59 PM IST
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Muzaffarnagar News: Do not forget Baba Tikait's unique memories of simplicity
बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर विशेष - फोटो : अमर उजाला

किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की सादगी और सरलता की स्मृतियां हर जन के दिलों में रची बसी हैं। किसानों के हक के लिए संघर्ष करने में उनके जज्बे को देश दुनिया में आज भी याद किया जाता है। उनके दौर में यूनियन पर कभी सियासत की आंच नहीं आ पाई। उत्पीड़न के विरोध में आंदोलन के महानायक के रूप में उन्होंने किसान और मजदूरों की राजनीति की दिशा बदलने की कुव्वत थी। उनके जज्बे को लोग आज भी सम्मान के रूप में याद करते हैं।



कस्बा सिसौली में जन्में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के कंधों पर मात्र आठ साल की उम्र में बालियान खाप के मुखिया का दायित्व डाल दिया। अल्पायु से संघर्ष की गाथा उनके अनूठी जीवन शैली के तर्जुबे की किताब बनती चली गई। वर्ष 1987 के मार्च माह में उन्होंने किसानों को एकजुट करने के लिए भारतीय किसान यूनियन का गठन किया। उसके बाद किसानों और मजदूरों की आवाज बनते चले गए। विद्युत निगम द्वारा बिलों में की गई बेतहाशा वृद्धि ने उन्हें आंदोलन की राह दिखाई।

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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

शामली के करमू खेड़ी बिजलीघर पर मार्च 1987 में पहला आंदोलन किया। किसानों के हक के लिए मेरठ कमिश्नरी पर डेढ़ महीने तक धरना दिया। वर्ष 1990 में दिल्ली के वोट क्लब पर धरने से सरकार हिल गई थी। उनके अनगिनत आंदोलनों में किसान मजहब और जाति से ऊपर उठकर हिस्सा लेते थे। किसान हितों की चिंता के कारण हमेशा सत्ता से अदावत रही। किसानों के मार्ग दर्शक चौधरी टिकैत 15 मई वर्ष 2011 को दुनिया से सदा के लिए अलविदा हो गए।

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नरेश टिकैत - फोटो : amar ujala

वर्तमान में उनके बड़े पुत्र चौधरी नरेश टिकैत बालियान खाप के मुखिया और भाकियू अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली गाजीपुर बार्डर पर चल रहा आंदोलन इतिहास बनने की ओर अग्रसर हैं। पिता के बाद भाकियू का सबसे लंबी अवधि का यह धरना आंदोलन देश-दुनिया में अमिट छाप छोड़ रहा है।

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चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत से बातचीत करते हुए चंद्रपाल सिंह फौजी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

क्या कहते हैं साथी
सिसौली निवासी शिक्षक पुरुषोत्तम आर्य बताते हैं कि चौधरी साहब बड़े ही धार्मिक व्यक्ति थे। सामाजिक कुरीतियों के बारे में अपनी बेबाक राय रखते हुए उनका विरोध करते थे। वह बहुत ही नेक इंसान थे।

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महेंद्र सिंह टिकैत फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
किसान आंदोलन में उनके साथ रहे सिसौली निवासी मास्टर ओमपाल सिंह व बलजोर सिंह ने कहा उनके जैसा किसान मजदूर हितैषी युगों युगों बाद जन्म लेता है। उन्होंने किसानों को राह दिखाई। उनके जैसा सादगी पसंद व्यक्ति कोई नहीं था। हमेशा नि:स्वार्थ भाव से किसान मजदूरों की लड़ाई लड़ी। बुलंदियों को छू कर भी हमेशा आम आदमी रहे।
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