{"_id":"5f4a9f6d8ebc3e86d8207e9e","slug":"divya-kakran-received-the-arjuna-award-muzaffarnagar-news-mrt498687256","type":"story","status":"publish","title_hn":"हार न मानने की जिद से मिला मुकाम: दिव्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हार न मानने की जिद से मिला मुकाम: दिव्या
विज्ञापन
दिल्ली के विज्ञान भवन में खेल दिवस पर पहलवान दिव्या काकरान को अर्जुन अवार्ड प्रमाण पत्र देते खेल
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। अर्जुन अवार्ड समारोह में ऑनलाइन स्क्रीन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को जब कुश्ती में मेरी उपलब्धियां बताई गई तो मैं भावुक हो गई। विज्ञान भवन से बाहर आते ही पापा-मम्मी को फोन मिलाया और कहा कि आपने कठिन परिस्थितियों में कैसे गांव की बेटी को ऊंचे मुकाम पर ला खड़ा किया है। ये कहते ही आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर नई दिल्ली में अर्जुन पुरस्कार से नवाजी गई दिव्या काकरान ने ‘अमर उजाला’ से यादगार क्षणों की बातें साझा कीं। कहती हैं कि राष्ट्रपति के समक्ष वर्चुअली अवार्ड पाने की बारी आई, तो जिंदगी में किए कड़े संघर्ष और मेहनत का सुखद अहसास हुआ। खेल मंत्री किरन रिजिजू ने वर्ष 2020 के लिए अर्जुन अवार्ड का प्रमाणपत्र सौंपा, उस वक्त मैं भावुक थी, जब राष्ट्रपति के सम्मुख मेरी कुश्ती में उपलब्धियां बताई र्गइं। खुद को रोक नहीं पाई, अर्जुन अवार्ड पाते ही पापा और मम्मी को फोन कर खुशियों के ये पल बांटे।
दिव्या कहती हैं कि मैं गांव की साधारण लड़की थी, मगर पापा को मुझे पहलवान बनाने का जुनून था। जब हार न मानने का जज्बा हो तो भगवान भी मदद करते है। अभी तक के खेल कॅरियर में सबसे ज्यादा खुशी तब मिली, जब ओलंपिक क्वालीफाई दौर में वर्ष 2019 में 68 किलो भार वर्ग में एशियन चैंपियनशिप में चीन में ब्रॉंज मेडल जीता। फिर दिल्ली में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल किया था। वर्ष 2015 में बेहद आर्थिक तंगी थी। मम्मी ने गहने गिरवी रखने पर जूनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक की जीत कभी नहीं भूलूंगी। उत्तर रेलवे में वरिष्ठ टिकट निरीक्षक दिव्या कहती हैं कि वह भविष्य में यूपी में स्पोर्ट्स अफसर बनना चाहेंगी, ताकि गांव की लड़कियों को कुश्ती में आगे बढ़ा पाऊं।
विज्ञापन
‘मां ने उतारी आरती, पिता ने लगाया गले’
मुजफ्फरनगर। अर्जुन अवार्ड का राष्ट्रीय सम्मान पाकर बेटी दिव्या गोकुलपुर दिल्ली के आवास पर लौटी तो मां ने लाड़ली को फूलों की माला पहनाई तथा आरती उतारी। पिता सूरजवीर ने बेजोड़ पुत्री को गले लगाया। उन्होंने अर्जुन अवार्ड प्रमाण पत्र पापा को दिया। सूरजवीर बोले, हमने नेशनल स्तर तक ही बेटी को ले जाने का सोचा था, लेकिन सफलताएं शिखर पर ले आई। दिव्या ने बताया कि पांच साल से उनकी मित्र नीना उनकी डाइट का जिम्मा संभालती है।
बेटियां परिवार की दौलत : संयोगिता
मुजफ्फरनगर। जिस मां संयोगिता ने अकेली बेटी दिव्या को महिला रेसलिंग में शोहरत दिलाई, वो भी बेटी को अर्जुन पुरस्कार मिलने पर गदगद है। कहती है बेटी जब भी दंगल, अखाड़े में कुश्ती जीतकर लौटती थी, मैं आरती करती थी। मुझे उसकी मां होने का गर्व है। बेटियां परिवार की दौलत हैं।
पुरबालियान में भी खुशी की लहर
मंसूरपुर। दिव्या को अर्जुन अवार्ड मिलने से उसके गांव पुरबालियान में परिजनों तथा ग्रामीणों में खुशी की लहर है। दादा राजेंद्र सिंह का कहना है कि मैं आज दिव्या की उपलब्धि से बहुत खुश हूं। एक ही इच्छा है कि उनके जीते जी दिव्या ओलंपिक पदक जीते। दादी प्रेमवती, चाचा मोहनवीर, चाची शर्मिष्ठा, सनी आदि परिजन बेहद खुश नजर आए।
विज्ञापन
राष्ट्रीय खेल दिवस पर नई दिल्ली में अर्जुन पुरस्कार से नवाजी गई दिव्या काकरान ने ‘अमर उजाला’ से यादगार क्षणों की बातें साझा कीं। कहती हैं कि राष्ट्रपति के समक्ष वर्चुअली अवार्ड पाने की बारी आई, तो जिंदगी में किए कड़े संघर्ष और मेहनत का सुखद अहसास हुआ। खेल मंत्री किरन रिजिजू ने वर्ष 2020 के लिए अर्जुन अवार्ड का प्रमाणपत्र सौंपा, उस वक्त मैं भावुक थी, जब राष्ट्रपति के सम्मुख मेरी कुश्ती में उपलब्धियां बताई र्गइं। खुद को रोक नहीं पाई, अर्जुन अवार्ड पाते ही पापा और मम्मी को फोन कर खुशियों के ये पल बांटे।
विज्ञापन
दिव्या कहती हैं कि मैं गांव की साधारण लड़की थी, मगर पापा को मुझे पहलवान बनाने का जुनून था। जब हार न मानने का जज्बा हो तो भगवान भी मदद करते है। अभी तक के खेल कॅरियर में सबसे ज्यादा खुशी तब मिली, जब ओलंपिक क्वालीफाई दौर में वर्ष 2019 में 68 किलो भार वर्ग में एशियन चैंपियनशिप में चीन में ब्रॉंज मेडल जीता। फिर दिल्ली में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल किया था। वर्ष 2015 में बेहद आर्थिक तंगी थी। मम्मी ने गहने गिरवी रखने पर जूनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक की जीत कभी नहीं भूलूंगी। उत्तर रेलवे में वरिष्ठ टिकट निरीक्षक दिव्या कहती हैं कि वह भविष्य में यूपी में स्पोर्ट्स अफसर बनना चाहेंगी, ताकि गांव की लड़कियों को कुश्ती में आगे बढ़ा पाऊं।
विज्ञापन
‘मां ने उतारी आरती, पिता ने लगाया गले’
मुजफ्फरनगर। अर्जुन अवार्ड का राष्ट्रीय सम्मान पाकर बेटी दिव्या गोकुलपुर दिल्ली के आवास पर लौटी तो मां ने लाड़ली को फूलों की माला पहनाई तथा आरती उतारी। पिता सूरजवीर ने बेजोड़ पुत्री को गले लगाया। उन्होंने अर्जुन अवार्ड प्रमाण पत्र पापा को दिया। सूरजवीर बोले, हमने नेशनल स्तर तक ही बेटी को ले जाने का सोचा था, लेकिन सफलताएं शिखर पर ले आई। दिव्या ने बताया कि पांच साल से उनकी मित्र नीना उनकी डाइट का जिम्मा संभालती है।
बेटियां परिवार की दौलत : संयोगिता
मुजफ्फरनगर। जिस मां संयोगिता ने अकेली बेटी दिव्या को महिला रेसलिंग में शोहरत दिलाई, वो भी बेटी को अर्जुन पुरस्कार मिलने पर गदगद है। कहती है बेटी जब भी दंगल, अखाड़े में कुश्ती जीतकर लौटती थी, मैं आरती करती थी। मुझे उसकी मां होने का गर्व है। बेटियां परिवार की दौलत हैं।
पुरबालियान में भी खुशी की लहर
मंसूरपुर। दिव्या को अर्जुन अवार्ड मिलने से उसके गांव पुरबालियान में परिजनों तथा ग्रामीणों में खुशी की लहर है। दादा राजेंद्र सिंह का कहना है कि मैं आज दिव्या की उपलब्धि से बहुत खुश हूं। एक ही इच्छा है कि उनके जीते जी दिव्या ओलंपिक पदक जीते। दादी प्रेमवती, चाचा मोहनवीर, चाची शर्मिष्ठा, सनी आदि परिजन बेहद खुश नजर आए।