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हौसले के बल पर दिव्यांगता को पछाड़ा
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भोपा में ई - रिक्शा में सवारी ले जाता दिव्यांग विकास कुमार।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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हौसले के बल पर दिव्यांगता को पछाड़ा
भोपा। थोड़ी सी परेशानी होने पर हिम्मत हार जाने वालों के लिए भोपा के चार भाई-बहन जीवटता की मिसाल हैं। दिव्यांगता के बावजूद ये चारों अपने रोजमर्रा के कार्यों के साथ ही खेती एवं मजदूरी से जुड़े काम भी पूरी कुशलता से करते हैं। भाई बुग्गी एवं ई-रिक्शा से रोजी-रोटी जुटाते हैं, जबकि दोनों बहनें घरेलू के साथ ही खेती का भी काम संभालती हैं।
भोपा की मेन रोड के किनारे रहने वाले वृद्ध मंगता पाल के सात बच्चों में पांच बेटियां व दो बेटे हैं। दो बड़ी बेटियों की शादी हो चुकी है। अन्य पांच में बेटा विकास और मोनू तथा बेटी रजनी व मोनी दिव्यांग हैं। चारों भाई-बहन पैरों से लाचार हैं, जबकि हाथों की लंबाई भी कम है। रजनी ग्रेजुुएशन करने के साथ ही कस्बे के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती भी है। दूसरी बहन मोनी भी ग्रेजुएशन के साथ सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही हैं। दोनों बहनें खाली समय में घर पर रहकर सिलाई कार्य करती हैं। मां की मौत काफी पहले हो चुकी है। इसलिए घर की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर रहती है। खाना बनाने के साथ ही खेती कार्य में भी सहयोग करती हैं। भाई विकास 10वीं फेल है तथा मोनू ने 12वीं तक पढ़ाई की है। दिव्यांग होने के बाद भी दोनों कड़ी मेहनत से पीछे नहीं हटते। दोनों भाई पिता के साथ मिलकर खेती का काम संभालते हैं। कड़ी मेहनत से स्वस्थ लोगों को भी पीछे छोड़ देते हैं। हाथ और पांव से मजबूर होने के बावजूद दोनों भाई बुग्गी से किरायेदारी करते हैं। दोनों ने मिलकर एक ई-रिक्शा किस्तों पर खरीदी है, जिससे वह भोपा से आसपास क्षेत्र में चलाते हैं। बुग्गी एवं ई- रिक्शा से होने वाली आमदनी से घर का खर्च चलाते हैं। दोनों भाइयों का कहना है कि वे अपनी मेहनत से घर का खर्च आसानी से चला लेते हैं। उनके हौसले को देखकर हर कोई हैरान रहता है तथा उनकी तारीफ करता नहीं थकता। पिता मंगता पाल का कहना है कि चार बच्चों के दिव्यांग होने से उसकी तो आस ही टूट गई थी। उन्होंने बच्चों ने पूरी जिम्मेदारी संभालकर उसे बड़ा सहारा दिया है। बच्चों की मेहनत के कारण वह अपना जीवन परिवार के साथ बेहतर तरीके से जी रहा है।
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भोपा। थोड़ी सी परेशानी होने पर हिम्मत हार जाने वालों के लिए भोपा के चार भाई-बहन जीवटता की मिसाल हैं। दिव्यांगता के बावजूद ये चारों अपने रोजमर्रा के कार्यों के साथ ही खेती एवं मजदूरी से जुड़े काम भी पूरी कुशलता से करते हैं। भाई बुग्गी एवं ई-रिक्शा से रोजी-रोटी जुटाते हैं, जबकि दोनों बहनें घरेलू के साथ ही खेती का भी काम संभालती हैं।
भोपा की मेन रोड के किनारे रहने वाले वृद्ध मंगता पाल के सात बच्चों में पांच बेटियां व दो बेटे हैं। दो बड़ी बेटियों की शादी हो चुकी है। अन्य पांच में बेटा विकास और मोनू तथा बेटी रजनी व मोनी दिव्यांग हैं। चारों भाई-बहन पैरों से लाचार हैं, जबकि हाथों की लंबाई भी कम है। रजनी ग्रेजुुएशन करने के साथ ही कस्बे के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती भी है। दूसरी बहन मोनी भी ग्रेजुएशन के साथ सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही हैं। दोनों बहनें खाली समय में घर पर रहकर सिलाई कार्य करती हैं। मां की मौत काफी पहले हो चुकी है। इसलिए घर की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर रहती है। खाना बनाने के साथ ही खेती कार्य में भी सहयोग करती हैं। भाई विकास 10वीं फेल है तथा मोनू ने 12वीं तक पढ़ाई की है। दिव्यांग होने के बाद भी दोनों कड़ी मेहनत से पीछे नहीं हटते। दोनों भाई पिता के साथ मिलकर खेती का काम संभालते हैं। कड़ी मेहनत से स्वस्थ लोगों को भी पीछे छोड़ देते हैं। हाथ और पांव से मजबूर होने के बावजूद दोनों भाई बुग्गी से किरायेदारी करते हैं। दोनों ने मिलकर एक ई-रिक्शा किस्तों पर खरीदी है, जिससे वह भोपा से आसपास क्षेत्र में चलाते हैं। बुग्गी एवं ई- रिक्शा से होने वाली आमदनी से घर का खर्च चलाते हैं। दोनों भाइयों का कहना है कि वे अपनी मेहनत से घर का खर्च आसानी से चला लेते हैं। उनके हौसले को देखकर हर कोई हैरान रहता है तथा उनकी तारीफ करता नहीं थकता। पिता मंगता पाल का कहना है कि चार बच्चों के दिव्यांग होने से उसकी तो आस ही टूट गई थी। उन्होंने बच्चों ने पूरी जिम्मेदारी संभालकर उसे बड़ा सहारा दिया है। बच्चों की मेहनत के कारण वह अपना जीवन परिवार के साथ बेहतर तरीके से जी रहा है।
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