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वरिष्ठ नागरिकों को बताए अधिकार
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मुजफ्फरनगर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मदनानंद वृद्धाश्रम नदी रोड में वरिष्ठ नागरिकों केे अधिकार से संबंधित विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी ने कहा कि संविधान ने देश के वरिष्ठ नागरिकों को अधिकार दिए हैं। यदि परिजन उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं दे रहे हैं तो वह न्यायिक सहायता ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ ही कई तरह की समस्याएं बढ़ जाती हैं जैसे शारीरिक, मानसिक, आय, रोजगार की समस्या तथा निवास की समस्या आदि। वरिष्ठ नागरिकों को संविधान के अंर्तगत सभी मूल अधिकार प्राप्त है, इसके अतिरिक्त संविधान में अनुच्छेद 37, 41, 46, 47 के अर्न्तगत राज्य पर कर्तव्य अधिरोपित किया गया है कि वह वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, रोेजगार, आय आदि के संबंध में उपबन्ध करे। इसके तहत माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण के लिए कल्याण अधिनियम 2007 पारित किया गया है, जिसके तहत माता- पिता व वरिष्ठ नागरिक अपने बेटा, बेटी, पोता, पोती से अथवा सम्पत्ति विरासत में प्राप्त करने वाले रिश्तेदार के विरुद्ध भरण पोषण की मांग कर सकते है। इन सभी कानूनी प्रावधानों के बावजूद भी परिवार व बच्चों का प्राथमिक व पुनीत कर्तव्य है कि अपने माता- पिता, वृद्धजनों की देखभाल व सेवा करें। माता- पिता निस्वार्थ प्रेम से अपने बच्चों की देखभाल करते हैं, हमे उनके त्याग को नहीं भूलना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ ही कई तरह की समस्याएं बढ़ जाती हैं जैसे शारीरिक, मानसिक, आय, रोजगार की समस्या तथा निवास की समस्या आदि। वरिष्ठ नागरिकों को संविधान के अंर्तगत सभी मूल अधिकार प्राप्त है, इसके अतिरिक्त संविधान में अनुच्छेद 37, 41, 46, 47 के अर्न्तगत राज्य पर कर्तव्य अधिरोपित किया गया है कि वह वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, रोेजगार, आय आदि के संबंध में उपबन्ध करे। इसके तहत माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण के लिए कल्याण अधिनियम 2007 पारित किया गया है, जिसके तहत माता- पिता व वरिष्ठ नागरिक अपने बेटा, बेटी, पोता, पोती से अथवा सम्पत्ति विरासत में प्राप्त करने वाले रिश्तेदार के विरुद्ध भरण पोषण की मांग कर सकते है। इन सभी कानूनी प्रावधानों के बावजूद भी परिवार व बच्चों का प्राथमिक व पुनीत कर्तव्य है कि अपने माता- पिता, वृद्धजनों की देखभाल व सेवा करें। माता- पिता निस्वार्थ प्रेम से अपने बच्चों की देखभाल करते हैं, हमे उनके त्याग को नहीं भूलना चाहिए।
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