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इच्छाओं का नियंत्रण ही आत्म कल्याण का मार्ग
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खतौली जैन मंदिरों में पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खतौली। जैन मंदिरों में दशलक्षण पर्व के सातवें दिन धूप दशमी पर्व को सुगंध दिवस के रूप में मनाया गया। पर्यूषण पर्व के दौरान जैन धर्मावलंबियों ने धूप दशमी का पर्व बड़े उत्साह के साथ संपन्न किया। मंदिरों में प्रात: काल में शांति धारा की गई। इस पर्व पर अष्ट कर्मों का नाश करने के लिए धूप को चढ़ाया गया। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते है और आत्मा की शुद्धि की कामना करते है।
सराफान जैन मंदिर में दिगंबर जैन महिला महासमिति तृतीय इकाई ने मेरी भावना का पाठ का आयोजन किया। धर्म सभा में अरुण जैन ने कहा कि हम उत्तम तप धर्म की आराधना कर रहे है। तप का मतलब है तपना व इच्छाओं को रोकना। तप के द्वारा ही हम आत्मा को उज्ज्वल बना सकते है। सोने में तपकर ही चमक आती है। जीवन की इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती। इच्छाओं का नियंत्रण ही आत्म कल्याण का मार्ग है।
उन्होंने कहा कि संयम तप की प्रारंभिक सीढ़ी है। जो तप करते है वे महान पूज्य बन जाते है। आज तप की महत्ता समझने का दिन है। सभी मंदिरों में दोपहर तथा रात्रि में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम व विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है। मौके पर बल्लू, विवेक, संजीव, पारूल, पारस, मीनाक्षी, रोमा, निशा, अंजू, नैना, मंजू, अनीता, अंजली, शोभा, करूणा, अंजना, सुनीता, स्वाति, कुमकुम, राखी मौजूद रहे।
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सराफान जैन मंदिर में दिगंबर जैन महिला महासमिति तृतीय इकाई ने मेरी भावना का पाठ का आयोजन किया। धर्म सभा में अरुण जैन ने कहा कि हम उत्तम तप धर्म की आराधना कर रहे है। तप का मतलब है तपना व इच्छाओं को रोकना। तप के द्वारा ही हम आत्मा को उज्ज्वल बना सकते है। सोने में तपकर ही चमक आती है। जीवन की इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती। इच्छाओं का नियंत्रण ही आत्म कल्याण का मार्ग है।
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उन्होंने कहा कि संयम तप की प्रारंभिक सीढ़ी है। जो तप करते है वे महान पूज्य बन जाते है। आज तप की महत्ता समझने का दिन है। सभी मंदिरों में दोपहर तथा रात्रि में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम व विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है। मौके पर बल्लू, विवेक, संजीव, पारूल, पारस, मीनाक्षी, रोमा, निशा, अंजू, नैना, मंजू, अनीता, अंजली, शोभा, करूणा, अंजना, सुनीता, स्वाति, कुमकुम, राखी मौजूद रहे।
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