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खरीफ की फसलों का घोषित समर्थन मूल्य किसानों से धोखा: टिकैत
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भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खरीफ की फसलों का घोषित समर्थन मूल्य किसानों से धोखा: टिकैत
मुजफ्फरनगर। भाकियू ने केंद्र सरकार द्वारा खरीफ की फसलों के घोषित समर्थन मूल्य को किसानों के साथ धोखा करार दिया है। भाकियू ने कहा कि बीते पांच सालों में अब तक की यह सबसे कम वृद्धि है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत 2020-21 के लिए निर्धारित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि महामारी के समय आजीविका के संकट से जूझ रहे किसानों के साथ यह भद्दा मजाक है। यह देश के भंडार भरने वाले और खाद्य सुरक्षा की मजबूत दीवार खड़ी करने वाले किसानों के साथ धोखा है। यह वृद्धि पिछले पांच वर्षों में सबसे कम वृद्धि है। किसानों को ये मंजूर नहीं है। सरकार महंगाई दर नियंत्रित करने के लिए देश के किसानों की बलि चढ़ा रही है। इसी किसान के दम पर सरकार कोरोना जैसी महामारी से लड़ पाई है। इस महामारी में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति का नहीं मांग का संकट बना हुआ है। भाकियू सरकार से जवाब चाहती है कि आखिर इस वृद्धि के लिए कौन सा फार्मूला अपनाया गया। किसानों से आह्वान करती है कि इस अन्याय के खिलाफ सामूहिक संघर्ष शुरू करें। न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी कानून बनाया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर खरीद करने वाले व्यक्ति पर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
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मुजफ्फरनगर। भाकियू ने केंद्र सरकार द्वारा खरीफ की फसलों के घोषित समर्थन मूल्य को किसानों के साथ धोखा करार दिया है। भाकियू ने कहा कि बीते पांच सालों में अब तक की यह सबसे कम वृद्धि है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत 2020-21 के लिए निर्धारित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर तीखी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि महामारी के समय आजीविका के संकट से जूझ रहे किसानों के साथ यह भद्दा मजाक है। यह देश के भंडार भरने वाले और खाद्य सुरक्षा की मजबूत दीवार खड़ी करने वाले किसानों के साथ धोखा है। यह वृद्धि पिछले पांच वर्षों में सबसे कम वृद्धि है। किसानों को ये मंजूर नहीं है। सरकार महंगाई दर नियंत्रित करने के लिए देश के किसानों की बलि चढ़ा रही है। इसी किसान के दम पर सरकार कोरोना जैसी महामारी से लड़ पाई है। इस महामारी में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति का नहीं मांग का संकट बना हुआ है। भाकियू सरकार से जवाब चाहती है कि आखिर इस वृद्धि के लिए कौन सा फार्मूला अपनाया गया। किसानों से आह्वान करती है कि इस अन्याय के खिलाफ सामूहिक संघर्ष शुरू करें। न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी कानून बनाया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर खरीद करने वाले व्यक्ति पर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
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