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खड़े ट्रक से टकराई डीसीएम, तीन लोगों की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:31 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मंसूरपुर। दिल्ली-दून एनएच-58 पर डीसीएम की खड़े ट्रक में भीषण भिड़ंत होने से डीसीएम चालक समेत तीन युवकों की मौके पर मौत हो गई। हादसे में डीसीएम के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। पुलिस ने अनुसार तीनों युवक दोस्त थे, जो जिला फर्रुखाबाद के रहने वाले थे। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
हादसा शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे मंसूरपुर में सागर रत्ना रेस्टोरेंट के पास हुआ। डीसीएम गाड़ी मध्य प्रदेश के सतना से स्क्रैप और तार भरकर रुड़की, उत्तराखंड जा रही थी। डीसीएम को चालक जनपद फर्रुखाबाद के थाना मीरानगर क्षेत्र के गांव मनोहर नगर निवासी मनोज कुमार (28) पुत्र अभिलाख सिंह चला रहा था।
डीसीएम में चालक के गांव के ही दो साथी अवधपाल सिंह (22) पुत्र गिरीश चंद्र तथा राय सिंह (18) पुत्र नेत्रपाल साथ में बैठे हुए थे। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे जैसे ही डीसीएम दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे पर सागर रत्ना रेस्टोरेंट के पास पहुंची, तो वहां हाइवे किनारे खड़े ट्रक में पीछे से डीसीएम घुस गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि डीसीएम के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए।
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चालक मनोज कुमार और उसके दोनों साथी अवधपाल तथा राय सिंह क्षतिग्रस्त डीसीएम में फंस गए। राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने क्रेन मंगाकर ट्रक के पीछे से डीसीएम को निकाला। इसके बाद क्षतिग्रस्त डीसीएम से चालक और उसके दोनों साथियों को बामुश्किल बाहर निकाला। तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शवों की शिनाख्त होने पर उनके परिजनों को सूचना दे दी। हादसे की जानकारी मिलने पर परिजन थाने में पहुंचे। पुलिस ने मृतक चालक मनोज के भाई अनुज कुमार की ओर से ट्रक चालक के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली है। उधर, इंस्पेक्टर मंसूरपुर केपीएस चाहल ने बताया कि ट्रक चालक एमपी के जिला भिंड के गांव खरीका निवासी जुुनैद पुत्र यूसुफ को गिरफ्तार कर लिया है।
मोबाइल फोन के जरिए हुई तीनों की पहचान
मंसूरपुर। पुलिस ने क्रेन की मदद से ट्रक में घुसी डीसीएम को खींच कर बाहर निकाला। इसके बाद फंसे हुए तीनों युवकों को बाहर निकाला, मगर तब उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने उसके पास से मिले मोबाइल फोन पर की गई कॉल को रीडायल किया, तो तब तीनों की पहचान उनके परिजनों ने की।
चालक मनोज का छोटा भाई अनुज गुरुग्राम में एक फैक्ट्री में नौकरी करता था। पुलिस की ओर से हादसे की जानकारी पाकर वह सुबह दस बजे मंसूरपुर पहुंचा। उसने तीनों को शवों को देख कर भी तीनों की पहचान अपने भाई मनोज, उसके दोस्तों अवधपाल और राय सिंह के रुप में की। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने और शवों का पंचनामा भरने की कार्रवाई की।
नींद की झपकी ने ली तीन की जान
मंसूरपुर। डीसीएम चालक मनोज कुमार का आई नींद की झपकी ने उसकी और दोनों दोस्तों की जान ले ली। मनोज के भाई अनुज ने बताया कि मनोज बृृहस्पतिवार को मध्यम प्रदेश के शहर सतना से स्क्रैप और तार आदि सामान लेकर रुड़की के लिए चला था। डीसीएम को चलाना केवल वह ही जानता था, बाकी दोनों दोस्त गाड़ी नहीं चला सकते थे।
इसलिए एक हजार से ज्यादा किलोमीटर का सफर मनोज ने अकेले गाड़ी को चला कर पूरा किया। अब बस रुड़की केवल 70 किलोमीटर दूर था, मगर मंसूरपुर में आते ही सड़क हादसा हो गया। मंसूरपुर इंस्पेक्टर केपीएस चाहल ने बताया कि नींद की झपकी के कारण यह हादसा हुआ, क्योंकि ट्रक हाइवे से नीचे खड़ा था। चालक अकेले लगातार गाड़ी चला रहा था। हादसे से लग रहा था कि उसके दोनों दोस्त भी इस दौरान सो रहे होगा। सुबह के समय उन्हें सोता देख कर चालक मनोज को भी नींद की झपकी आई और डीसीएम हाइवे से नीचे उतर कर खड़े ट्रक से पूरी गति से टकरा गई। डीसीएम का आगे का हिस्सा पूरी तरह से ट्रक में घुस कर क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे तीनों की मौत हो गई।
मौत खींच लाई राय सिंह और अवधपाल को
मंसूरपुर। तीनों युवक फर्रुखाबाद जिले के गांव मनोहर नगर के निवासी थे। तीनों आपस में दोस्त थे। मनोज काफी दिनों से डीसीएम चलता था। तीन दिन पहले ही मनोज गांव पहुंचा तो उसने अवधपाल और राय सिंह से कहा कि इस बार रुड़की में सामान लेकर जाएगा। यहीं से हरिद्वार घूम कर आऐगे। हादसे की जानकारी पाकर यहां पहुंचे राय सिंह के बड़े भाई राजीव ने बताया कि राय सिंह आना नहीं चाहता था, मगर अवधपाल और मनोज की जिद के कारण वह भी हरिद्वार घूमने को रजामंद हो गया। उन्हें पता नहीं था कि राह में मौत उसका इंतजार कर रही है। चार भाईयों में मनोज सबसे बड़ा था। मंझले भाई ब्रजेश ने बताया कि घर में वह ही शादीशुदा था। उसके एक बेटा और एक छोटी बेटी है। अवधपाल के परिजन यहां नहीं पहुंचे थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने तीनों शवों को अनुज, ब्रजेश और राजीव के सुुपुर्द कर दिया। ब्यूरो
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हादसा शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे मंसूरपुर में सागर रत्ना रेस्टोरेंट के पास हुआ। डीसीएम गाड़ी मध्य प्रदेश के सतना से स्क्रैप और तार भरकर रुड़की, उत्तराखंड जा रही थी। डीसीएम को चालक जनपद फर्रुखाबाद के थाना मीरानगर क्षेत्र के गांव मनोहर नगर निवासी मनोज कुमार (28) पुत्र अभिलाख सिंह चला रहा था।
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डीसीएम में चालक के गांव के ही दो साथी अवधपाल सिंह (22) पुत्र गिरीश चंद्र तथा राय सिंह (18) पुत्र नेत्रपाल साथ में बैठे हुए थे। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे जैसे ही डीसीएम दिल्ली-देहरादून नेशनल हाइवे पर सागर रत्ना रेस्टोरेंट के पास पहुंची, तो वहां हाइवे किनारे खड़े ट्रक में पीछे से डीसीएम घुस गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि डीसीएम के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए।
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चालक मनोज कुमार और उसके दोनों साथी अवधपाल तथा राय सिंह क्षतिग्रस्त डीसीएम में फंस गए। राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने क्रेन मंगाकर ट्रक के पीछे से डीसीएम को निकाला। इसके बाद क्षतिग्रस्त डीसीएम से चालक और उसके दोनों साथियों को बामुश्किल बाहर निकाला। तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शवों की शिनाख्त होने पर उनके परिजनों को सूचना दे दी। हादसे की जानकारी मिलने पर परिजन थाने में पहुंचे। पुलिस ने मृतक चालक मनोज के भाई अनुज कुमार की ओर से ट्रक चालक के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली है। उधर, इंस्पेक्टर मंसूरपुर केपीएस चाहल ने बताया कि ट्रक चालक एमपी के जिला भिंड के गांव खरीका निवासी जुुनैद पुत्र यूसुफ को गिरफ्तार कर लिया है।
मोबाइल फोन के जरिए हुई तीनों की पहचान
मंसूरपुर। पुलिस ने क्रेन की मदद से ट्रक में घुसी डीसीएम को खींच कर बाहर निकाला। इसके बाद फंसे हुए तीनों युवकों को बाहर निकाला, मगर तब उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने उसके पास से मिले मोबाइल फोन पर की गई कॉल को रीडायल किया, तो तब तीनों की पहचान उनके परिजनों ने की।
चालक मनोज का छोटा भाई अनुज गुरुग्राम में एक फैक्ट्री में नौकरी करता था। पुलिस की ओर से हादसे की जानकारी पाकर वह सुबह दस बजे मंसूरपुर पहुंचा। उसने तीनों को शवों को देख कर भी तीनों की पहचान अपने भाई मनोज, उसके दोस्तों अवधपाल और राय सिंह के रुप में की। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने और शवों का पंचनामा भरने की कार्रवाई की।
नींद की झपकी ने ली तीन की जान
मंसूरपुर। डीसीएम चालक मनोज कुमार का आई नींद की झपकी ने उसकी और दोनों दोस्तों की जान ले ली। मनोज के भाई अनुज ने बताया कि मनोज बृृहस्पतिवार को मध्यम प्रदेश के शहर सतना से स्क्रैप और तार आदि सामान लेकर रुड़की के लिए चला था। डीसीएम को चलाना केवल वह ही जानता था, बाकी दोनों दोस्त गाड़ी नहीं चला सकते थे।
इसलिए एक हजार से ज्यादा किलोमीटर का सफर मनोज ने अकेले गाड़ी को चला कर पूरा किया। अब बस रुड़की केवल 70 किलोमीटर दूर था, मगर मंसूरपुर में आते ही सड़क हादसा हो गया। मंसूरपुर इंस्पेक्टर केपीएस चाहल ने बताया कि नींद की झपकी के कारण यह हादसा हुआ, क्योंकि ट्रक हाइवे से नीचे खड़ा था। चालक अकेले लगातार गाड़ी चला रहा था। हादसे से लग रहा था कि उसके दोनों दोस्त भी इस दौरान सो रहे होगा। सुबह के समय उन्हें सोता देख कर चालक मनोज को भी नींद की झपकी आई और डीसीएम हाइवे से नीचे उतर कर खड़े ट्रक से पूरी गति से टकरा गई। डीसीएम का आगे का हिस्सा पूरी तरह से ट्रक में घुस कर क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे तीनों की मौत हो गई।
मौत खींच लाई राय सिंह और अवधपाल को
मंसूरपुर। तीनों युवक फर्रुखाबाद जिले के गांव मनोहर नगर के निवासी थे। तीनों आपस में दोस्त थे। मनोज काफी दिनों से डीसीएम चलता था। तीन दिन पहले ही मनोज गांव पहुंचा तो उसने अवधपाल और राय सिंह से कहा कि इस बार रुड़की में सामान लेकर जाएगा। यहीं से हरिद्वार घूम कर आऐगे। हादसे की जानकारी पाकर यहां पहुंचे राय सिंह के बड़े भाई राजीव ने बताया कि राय सिंह आना नहीं चाहता था, मगर अवधपाल और मनोज की जिद के कारण वह भी हरिद्वार घूमने को रजामंद हो गया। उन्हें पता नहीं था कि राह में मौत उसका इंतजार कर रही है। चार भाईयों में मनोज सबसे बड़ा था। मंझले भाई ब्रजेश ने बताया कि घर में वह ही शादीशुदा था। उसके एक बेटा और एक छोटी बेटी है। अवधपाल के परिजन यहां नहीं पहुंचे थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने तीनों शवों को अनुज, ब्रजेश और राजीव के सुुपुर्द कर दिया। ब्यूरो