{"_id":"5e52bf218ebc3ef3802d329a","slug":"daughters-have-come-on-the-road-to-save-the-constitution-devband-news-mrt470495185","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटियों की संविधान बचाने की लड़ाई में सरकार को झुकना होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटियों की संविधान बचाने की लड़ाई में सरकार को झुकना होगा
विज्ञापन
सीएए के विरोध में ईदगाह मैदान में धरना प्रदर्शन करती महिलाएं
- फोटो : DEVBAND
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संविधान बचाने को सड़क पर उतरीं हैं बेटियां
देवबंद (सहारनपुर)। नागरिकता संशोधन कानून, एनपीआर और प्रस्तावित एनआरसी को लेकर ईदगाह मैदान में महिलाओं का धरना प्रदर्शन 28वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान महिला वक्ताओं ने कहा कि देश की बेटियां संविधान बचाने की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरी हुई हैं। इसलिए सरकार को झुकना पड़ेगा।
मुत्तहिदा ख्वातीन कमेटी के बैनर तले चल रहे धरना प्रदर्शन में रविवार को आंदोलनकारी गुलअफशा और जैनब ने कहा कि देश के अलग अलग हिस्सों में संविधान को बचाने के लिए जनता द्वारा की जा रही कोशिशों की गूंज विश्व पटल पर सुनाई दे रही है। इसलिए अब ज्यादा दिनों तक सरकार सरकार कान बंद करके नहीं बैठ सकती। देश की बेटियां संविधान बचाने के लिए सडक़ों पर उतरी हुई हैं। इसलिए सरकार को झुकना पड़ेगा। हुमा और अफरोज ने कहा कि वर्ष 2010 में जिस तरह जनगणना की गई थी उसी आधार पर सरकार जब चाहे जनगणना करा सकती है। मगर वर्ष 2020 में जिस तरह सरकार जनगणना करना चाह रही है उसे किसी कीमत पर होने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार देश के नागरिकों के साथ जबरदस्ती करती है तो इसका जवाब दिया जाएगा। रविवार को अवकाश होने के चलते ईदगाह मैदान में महिलाओं और पुरुषों की काफी भीड़ जमा रही।
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। नागरिकता संशोधन कानून, एनपीआर और प्रस्तावित एनआरसी को लेकर ईदगाह मैदान में महिलाओं का धरना प्रदर्शन 28वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान महिला वक्ताओं ने कहा कि देश की बेटियां संविधान बचाने की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरी हुई हैं। इसलिए सरकार को झुकना पड़ेगा।
मुत्तहिदा ख्वातीन कमेटी के बैनर तले चल रहे धरना प्रदर्शन में रविवार को आंदोलनकारी गुलअफशा और जैनब ने कहा कि देश के अलग अलग हिस्सों में संविधान को बचाने के लिए जनता द्वारा की जा रही कोशिशों की गूंज विश्व पटल पर सुनाई दे रही है। इसलिए अब ज्यादा दिनों तक सरकार सरकार कान बंद करके नहीं बैठ सकती। देश की बेटियां संविधान बचाने के लिए सडक़ों पर उतरी हुई हैं। इसलिए सरकार को झुकना पड़ेगा। हुमा और अफरोज ने कहा कि वर्ष 2010 में जिस तरह जनगणना की गई थी उसी आधार पर सरकार जब चाहे जनगणना करा सकती है। मगर वर्ष 2020 में जिस तरह सरकार जनगणना करना चाह रही है उसे किसी कीमत पर होने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार देश के नागरिकों के साथ जबरदस्ती करती है तो इसका जवाब दिया जाएगा। रविवार को अवकाश होने के चलते ईदगाह मैदान में महिलाओं और पुरुषों की काफी भीड़ जमा रही।
विज्ञापन