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हाईकोर्ट से युधिष्ठिर की जमानत खारिज       

Sat, 27 May 2017 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Sat, 27 May 2017 12:07 AM IST
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Yudhisthira's bail rejected from High Court
युधिष्ठिर पहलवान। (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
मुजफ्फरनगर शहर के चर्चित छात्रा महिमा विश्वकर्मा आत्महत्या प्रकरण में हाईकोर्ट इलाहाबाद ने मुख्य आरोपी युधिष्ठिर पहलवान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा की कोर्ट ने महिमा के पिता और भाई को बंधक बनाने एवं मां-बेटी को आतंकित करने को गंभीर जुर्म मानते हुए लंबी सुनवाई के बाद आरोपी की बेल से इंकार कर दिया। मामले में तीन आरोपी अभी भी फरार हैं।      
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नईमंडी कोतवाली के अंकित विहार निवासी देव प्रकाश की पुत्री महिमा ने 16 फरवरी को अपने घर में फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। मृतका के पिता देवप्रकाश ललितपुर के माता टिल्ला डैम पर  सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत थे। मछली आपूर्ति के लिए ट्रक के साथ लखनऊ दुबग्गा मंडी में आए। गत सात फरवरी को भुगतान के 4.50 लाख रुपये लेकर वापस ललितपुर के लिए निकले थे। रास्ते में जहरखुरानी गिरोह ने देवप्रकाश को बेहोश कर रकम लूट ली थी। रकम लूटने पर गुस्साए दबंगों ने लखनऊ में ही महिमा के पिता और भाई अक्षय को 10 फरवरी को बंधक बना लिया था। महिमा और उसकी मां संजू देवी ने एसएसपी से गुहार लगाई, लेकिन पीड़ितों की आवाज नहीं सुनी गई। आरोपियों ने मां-बेटी की इज्जत खराब करने की कई बार धमकी दी। जिससे व्यथित महिमा ने आत्महत्या कर ली थी। जन आक्रोश के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महिमा की मां संजो देवी की ओर से मुकदमा दर्ज कर लिया था। 
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गत एक मार्च को पुलिस ने मुख्य आरोपी पचेंडा निवासी युधिष्ठिर पहलवान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जिला जज न्यायालय से बेल खारिज होने के बाद आरोपी ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शरण ली थी। तीन बार की लंबी सुनवाई के बाद शुक्रवार को न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने आरोपियों के कृत्य को गंभीर अपराध माना और युधिष्ठिर को जमानत देने से इंकार कर दिया। शुक्रवार को आए फैसले में हाईकोर्ट न्यायमूर्ति के समक्ष बचाव पक्ष ने महिमा की मां संजू देवी का 164 का बयान प्रस्तुत किया। युधिष्ठिर के विरुद्ध नईमंडी कोतवाली में दर्ज आपराधिक मुकदमे की हिस्ट्री ने भी उसकी मुश्किलें खड़ी कर दी। वादी संजू देवी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि महिमा केस में आरोपी युधिष्ठिर पहलवान की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।    
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हाईकोर्ट ने माना गंभीर जुर्म      
अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि हाईकोर्ट ने इसे गंभीर जुर्म माना है। उन्होंने बताया कि  मीडिया में मामला आने पर पुलिस प्रशासन की आंख खुली, तब आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। सियासी संरक्षण के दबाव में कार्रवाई में देरी, समझौते का दबाव और अंजाम भुगतने की धमकी आदि के कारणों से बेल नहीं मिल पाई।      

अभी तीन आरोपी हैं फरार      
महिमा आत्महत्या प्रकरण में चार आरोपियों युधिष्ठिर, अर्जुन पहलवान, विनोद और डॉ डबास के खिलाफ 17 फरवरी को नईमंडी कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामला सुर्खियों में आने के उपरांत तत्कालीन एसएसपी बबलू कुमार ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी। पुलिस ने एक मार्च को मुख्य आरोपी युधिष्ठिर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जिला जज डॉ गोकुलेश की कोर्ट ने पहले ही आरोपी युधिष्ठिर की जमानत याचिका ठुकरा दी थी। तीन आरोपी अर्जुन पहलवान, लच्छेड़ा निवासी विनोद पहलवान और डॉ डबास अभी भी फरार चल रहे हैं। तत्कालीन विवेचक विपिन कुमार ने मामले की जांच में महिमा के घर धमकी देने गए पचेंडा के नितिन बाटला को भी आरोपी बनाया है। अन्य आरोपियों की कुर्की की कार्रवाई में देरी से पुलिस सवालों के घेरे में है।


लखनऊ में हुआ था दहशत का खेल      
महिमा के पिता देवप्रकाश और भाई अक्षय को आरोपी दबंगों ने लखनऊ में बंधक बनाया था। युधिष्ठिर और अन्य आरोपियों के इशारे पर तथाकथित क्राइम ब्रांच ने हजरतगंज थाने की ऊपरी मंजिल पर कमरे में पिता-पुत्र की पिटाई की थी। पन्नालाल धर्मशाला में बंधक रखा था। जहां से 12 फरवरी की रात में अक्षय और उसका दोस्त अरुण गुर्जर भाग निकले थे। घबराए पिता देवप्रकाश ने गले में चाकू मारकर जान देने की कोशिश की। बकौल देवप्रकाश, तथाकथित पुलिसकर्मियों के कहने पर आरोपी उसे लेकर मुजफ्फरनगर पहुंचे थे। 15 फरवरी की रात महिमा और उसकी मां संजू देवी कोतवाली नईमंडी आईं, मगर पुलिस दबंगों की सियासी ताकत के आगे बौनी बनी रही। रास्ते में आरोपियों ने उन्हें धमकी दी। अगले दिन 16 फरवरी को महिमा ने आत्महत्या कर ली थी।
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