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22 दिन में खत्म हो गए दो परिवार 

Sun, 21 May 2017 01:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Sun, 21 May 2017 01:07 AM IST
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Two families ended in 22 days
highway - फोटो : demo pic
मुजफ्फरनगर। वर्षों से निर्माणाधीन हाईवे मौत का सबब बन गया है। जनपद की सीमा में ही दर्जनभर जगहों से टूटे पड़े डिवाइडर, ऊंची-नीची सड़क और गड्ढों ने पिछले 22 दिन में दो परिवार उजाड़ दिए हैं। हाईवे पर हुए दो हादसों में छह लोगों की जानें चली गई हैं। दोनों के ही मासूम बिना मम्मी-पापा के रह गए हैं। एनएचएआई की लापरवाही के चलते लोगों को मौत का शिकार होना पड़ रहा है।       
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सात वर्षों से दिल्ली-देहरादून हाईवे का निर्माण जनपद की सीमा में चल रहा है। मुजफ्फरनगर से पुरकाजी के भूराहेड़ी में उत्तराखंड के बॉर्डर तक 25 किलोमीटर की दूरी का काम पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं डिवाइडर टूटा है तो कहीं सड़क और गड्ढों की तो गिनती नहीं होती। ऐसे में हाईवे पर लगातार दुर्घटनाओं की गिनती में इजाफा हो रहा है। हाईवे की टूट-फूट ने पिछले 22 दिन में दो परिवारों को उजाड़ कर रख दिया है। दो दंपतियों के दो मासूम बच्चों को पता ही नहीं चल पा रहा है कि उनके साथ हुआ क्या है। 29 अप्रैल की सुबह मुजफ्फरनगर के क्रिकेट कोच विकास शर्मा अपनी पत्नी स्वाति, बहन मंजू, ममेरे भाई संजू व नौ वर्ष के बेटे के साथ देहरादून में परिजनों के यहां शादी में शामिल होने के बाद परिवार के साथ लौट रहे थे। नेशनल हाईवे पर छपार थाना क्षेत्र में बढेड़ी के पास कार डिवाइडर से ऐसी टकराई के केशव को छोड़कर सभी मौत का शिकार हो गए। केशव आज भी मम्मी पापा की बांट जोह रहा है। शनिवार तड़के शहर कोतवाली में तैनात महिला आरक्षी और उसका पति रोहित की कार पिछली दुर्घटना से करीब एक किलोमीटर के फासले पर डिवाइडर से ऐसी टकराई कि दंपति को मौत का शिकार होना पड़ा। इनकी भी नौ वर्ष कीे बेटी ईशिका को नहीं पता कि इनके साथ क्या हो गया है। एनएचएआई और निर्माणधीन कंपनी की लापरवाही के चलते दो परिवार ऐसे उजड़े हैं कि उनके मासूम बच्चे बिलखते रहे गए हैं।       
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हाईवे पर रात में नहीं मिलती सहायता      
मुजफ्फरनगर। 25 किलोमीटर के हाईवे पर न तो कहीं यातायात नियमों की जानकारी देते संकेतक लगे हैं और ना ही रात में दुर्घटना होने पर  घायलों के लिए कोई सहायता उपलब्ध है। ऐसे में रात में दुर्घटना होने पर घायल की मौत ही संभव है। क्रिकेट कोच विकास शर्मा के दुर्घटना के मामले में हादसे के बाद कार में सवार सभी लोग बेहोश हो गए थे। मासूम केशव ने भीतर से चिल्लाना शुरू किया था तो बाहर आवाज नहीं गई। बाद में शीशों पर हाथ मारने पर एक कार सवार ने देखा और सहायता के लिए पुलिस बुलवाई। महिला आरक्षी की मौत के मामले में भी कोई सहायता हाईवे पर नहीं थी। पूरे हाईवे पर न तो नियमों की जानकारी देते बोर्ड लगे हैं और ना ही सड़क पर फाग पट्टी लगाई गई है। इस मामले में यातायात विभाग और परिवहन विभाग ने बात की गई तो दोनों विभाग के अफसरों ने मामले में एनएचआई को दोषी बताया।       
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हाईवे पर बोर्ड आदि लगाने का काम एनएचएआई का है, इससे हमारा कोई मतलब नहीं है।      
-राजीव कुमार, एआरटीओ प्रशासन। 

बोर्ड लगाने का काम हमारा नहीं है, एनएचआई वालों को हाईवे की सभी सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए      
-राजेश कुमार, टीएसआई।        
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