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जेल में सेल्फी लेने वाले को मिली जमानत
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 07 Jul 2016 12:46 AM IST
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जिला कारागार के भीतर फोटो खींचकर उसे वायरल करने का एक आरोपी कारागार से रिहा हो गया है, जबकि जेल प्रशासन ने उसे दूसरी जेल में भेजने की शासन को संस्तुति कर रखी थी। उसके बाहर जाने से जेल अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
शामली जिले के कैराना निवासी एक व्यक्ति प्रमुख के चुनाव के बाद शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हर्ष फायरिंग में हुई एक बच्चे की मौत के मामले में पांच माह पूर्व जेल में आया था। उसे जेल की बैरक नंबर चार में रखा गया था। मई में जेल में दो पक्षों में जमकर बवाल हुआ तो अधिकारियों ने इसकी बैरक चेंज कर दी थी। कई दिनों तक चले बवाल में आरोपी को कारागार की बैरक नंबर-17ए में रखा गया था।
उधर जेल में बवाल कट रहा था और आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर बैरक के भीतर ही फोटो खिंचवा कर उन्हें फेसबुक पर वायरल कर रहा था। तलाशी और जांच में आरोपी का नाम सामने आया तो जेलर की ओर से गयूर, इनाम, दानियल, समीर और सरताज के खिलाफ बंदी अधिनियम की धारा में नईमंडी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
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जांच में यह बात सामने आई थी कि एक बंदी ने अपने भांजे को उसके जन्मदिन पर खुश करने के लिए फोटो खींचकर वायरल किया था। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने पांचों बंदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट करने के लिए शासन को खत लिखा था। इसी बीच बंदी की जमानत हो गई।
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शामली जिले के कैराना निवासी एक व्यक्ति प्रमुख के चुनाव के बाद शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हर्ष फायरिंग में हुई एक बच्चे की मौत के मामले में पांच माह पूर्व जेल में आया था। उसे जेल की बैरक नंबर चार में रखा गया था। मई में जेल में दो पक्षों में जमकर बवाल हुआ तो अधिकारियों ने इसकी बैरक चेंज कर दी थी। कई दिनों तक चले बवाल में आरोपी को कारागार की बैरक नंबर-17ए में रखा गया था।
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उधर जेल में बवाल कट रहा था और आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर बैरक के भीतर ही फोटो खिंचवा कर उन्हें फेसबुक पर वायरल कर रहा था। तलाशी और जांच में आरोपी का नाम सामने आया तो जेलर की ओर से गयूर, इनाम, दानियल, समीर और सरताज के खिलाफ बंदी अधिनियम की धारा में नईमंडी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
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जांच में यह बात सामने आई थी कि एक बंदी ने अपने भांजे को उसके जन्मदिन पर खुश करने के लिए फोटो खींचकर वायरल किया था। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने पांचों बंदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट करने के लिए शासन को खत लिखा था। इसी बीच बंदी की जमानत हो गई।