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छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में चार्जशीट
Sat, 29 Dec 2018 12:17 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Sat, 29 Dec 2018 12:17 AM IST
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फाइल फोटो
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रतनपुरी क्षेत्र में 11 साल पूर्व हुए अमजद एनकाउंटर मामले में मृत युवक के छह परिजनों को धोखाधड़ी का आरोपी मानते हुए पुलिस ने उनके खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी है। इस मामले में आरोपी बनाए गए दो आरोपियों की मौत हो चुकी है। शहर कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच में माना है कि युवक के परिजनों ने डीएम हरिद्वार के फर्जी हस्ताक्षर व मोहर लगाते हुए मानवाधिकार आयोग में एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए शिकायत की थी।
रतनपुरी, भौराकलां पुलिस और एंटी एक्सटॉर्शन सेल के साथ तीन फरवरी 2007 को रतनपुरी थाना क्षेत्र में रामपुर चौराहे पर हुई मुठभेड़ में हरिद्वार जिले के मंगलौर थाना क्षेत्र के गांव बिजौली निवासी अमजद पुत्र खालिद मारा गया था। आरोप था कि वह भौराकलां क्षेत्र में युवक से बाइक लूटकर भाग रहा था। इस एनकाउंटर मामले में अमजद की मां अख्तरी ने एक दिन पूर्व यानी दो फरवरी 2007 को ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को फैक्स कर दिया था, जिसमें उसने रतनपुरी पुलिस द्वारा अमजद को एक फरवरी 2007 की रात बिजौली स्थित घर से उठाकर ले जाने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही अख्तरी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई थी।
इस मामले में नया मोड़ तब आया था, जब एनकाउंटर में शामिल तत्कालीन एंटी एक्सटॉर्शन सेल इंस्पेक्टर इकबालुज्जमां खान ने शहर कोतवाली में विगत अप्रैल माह में तहरीर देकर बदमाश अमजद की मां अख्तरी के साथ ही मनव्वर खां, जिंदा हसन, अब्दुल मन्नान, वसी अहमद, खालिद खान, राशिद व हुसैन अहमद पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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इनमें से जिंदा हसन और खालिद खान की मौत हो चुकी है। इकबालुज्जमां खान का आरोप था कि अमजद के परिजनों ने मानवाधिकार आयोग से शिकायत करते हुए डीएम हरिद्वार के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर लगे पत्र का इस्तेमाल किया था। शहर कोतवाली पुलिस ने उक्त मामले की जांच करते हुए कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है।
इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने बताया कि जांच में तत्कालीन इंस्पेक्टर इकबालुज्जमां खान द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि हो गई है। इस संबंध में डीएम हरिद्वार के ऑफिस में अमजद के परिजनों को दिए गए किसी भी पत्र का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। वहीं, मानवाधिकार आयोग को भेजे गए पत्र पर लगाई गई डीएम हरिद्वार की मुहर व उनके हस्ताक्षर भी जांच में फर्जी साबित हुए हैं।
ये पुलिसकर्मी शामिल थे मुठभेड़ में
मुजफ्फरनगर। तीन फरवरी 2007 में रतनपुरी के रामपुरी चौराहे पर हुई अमजद मुठभेड़ में तत्कालीन निरीक्षक एंटीएक्सटोर्शन सेल इकबालुज्जमां खान, कांस्टेबल नसीम अहमद, कांस्टेबल अशोक कुमार, कांस्टेबल मीर हसन, तत्कालीन एसओ रतनपुरी डॉ प्रवीण कुमार, कांस्टेबल मैयादीन सिंह, कांस्टेबल ब्रजपाल, कांस्टेबल सोहनवीर, चालक कांस्टेबल जसबीर सिंह, तत्कालीन एसओ भौराकलां सुधीर पाल धामा, एचसीपी अमीर सिंह शामिल रहे थे।
मुठभेड़ का मुकदमा डॉ प्रवीण कुमार द्वारा रतनपुरी थाने पर दर्ज कराया गया था। डॉ प्रवीण कुमार की गत वर्ष मृत्यु हो चुकी है। निरीक्षक इकबालुज्जमां खान सीओ के पद से सेवानिवृत्त हो चुके है। मीर हसन एसआई है, जो सहारनपुर जिले में तैनात है। अशोक कुमार को छोड़ कर बाकी पुलिस कर्मी अन्य जिलों में तैनात है।
कोर्ट ने तलब कर रखा है पुलिसकर्मियों को
मुजफ्फरनगर। अमजद की मां की गुहार पर सीजेएम कोर्ट ने एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को धारा 302 के आरोप में तलब भी कर लिया है, जिस पर आगामी 25 जनवरी 2019 को सुनवाई होनी है।
मां अख्तरी को अप्रैल में मिला था पांच लाख का चेक
मुजफ्फरनगर। डीएम हरिद्वार की फर्जी मुहर व हस्ताक्षर के आधार पर की गई शिकायत का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने जांच में अमजद एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। आयोग की रिपोर्ट पर शासन ने पीड़ित परिजनों को अप्रैल माह में पांच लाख रुपये की अंतरिम सहायता भी उपलब्ध करा दी थी।
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रतनपुरी, भौराकलां पुलिस और एंटी एक्सटॉर्शन सेल के साथ तीन फरवरी 2007 को रतनपुरी थाना क्षेत्र में रामपुर चौराहे पर हुई मुठभेड़ में हरिद्वार जिले के मंगलौर थाना क्षेत्र के गांव बिजौली निवासी अमजद पुत्र खालिद मारा गया था। आरोप था कि वह भौराकलां क्षेत्र में युवक से बाइक लूटकर भाग रहा था। इस एनकाउंटर मामले में अमजद की मां अख्तरी ने एक दिन पूर्व यानी दो फरवरी 2007 को ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को फैक्स कर दिया था, जिसमें उसने रतनपुरी पुलिस द्वारा अमजद को एक फरवरी 2007 की रात बिजौली स्थित घर से उठाकर ले जाने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही अख्तरी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई थी।
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इस मामले में नया मोड़ तब आया था, जब एनकाउंटर में शामिल तत्कालीन एंटी एक्सटॉर्शन सेल इंस्पेक्टर इकबालुज्जमां खान ने शहर कोतवाली में विगत अप्रैल माह में तहरीर देकर बदमाश अमजद की मां अख्तरी के साथ ही मनव्वर खां, जिंदा हसन, अब्दुल मन्नान, वसी अहमद, खालिद खान, राशिद व हुसैन अहमद पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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इनमें से जिंदा हसन और खालिद खान की मौत हो चुकी है। इकबालुज्जमां खान का आरोप था कि अमजद के परिजनों ने मानवाधिकार आयोग से शिकायत करते हुए डीएम हरिद्वार के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर लगे पत्र का इस्तेमाल किया था। शहर कोतवाली पुलिस ने उक्त मामले की जांच करते हुए कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है।
इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने बताया कि जांच में तत्कालीन इंस्पेक्टर इकबालुज्जमां खान द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि हो गई है। इस संबंध में डीएम हरिद्वार के ऑफिस में अमजद के परिजनों को दिए गए किसी भी पत्र का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। वहीं, मानवाधिकार आयोग को भेजे गए पत्र पर लगाई गई डीएम हरिद्वार की मुहर व उनके हस्ताक्षर भी जांच में फर्जी साबित हुए हैं।
ये पुलिसकर्मी शामिल थे मुठभेड़ में
मुजफ्फरनगर। तीन फरवरी 2007 में रतनपुरी के रामपुरी चौराहे पर हुई अमजद मुठभेड़ में तत्कालीन निरीक्षक एंटीएक्सटोर्शन सेल इकबालुज्जमां खान, कांस्टेबल नसीम अहमद, कांस्टेबल अशोक कुमार, कांस्टेबल मीर हसन, तत्कालीन एसओ रतनपुरी डॉ प्रवीण कुमार, कांस्टेबल मैयादीन सिंह, कांस्टेबल ब्रजपाल, कांस्टेबल सोहनवीर, चालक कांस्टेबल जसबीर सिंह, तत्कालीन एसओ भौराकलां सुधीर पाल धामा, एचसीपी अमीर सिंह शामिल रहे थे।
मुठभेड़ का मुकदमा डॉ प्रवीण कुमार द्वारा रतनपुरी थाने पर दर्ज कराया गया था। डॉ प्रवीण कुमार की गत वर्ष मृत्यु हो चुकी है। निरीक्षक इकबालुज्जमां खान सीओ के पद से सेवानिवृत्त हो चुके है। मीर हसन एसआई है, जो सहारनपुर जिले में तैनात है। अशोक कुमार को छोड़ कर बाकी पुलिस कर्मी अन्य जिलों में तैनात है।
कोर्ट ने तलब कर रखा है पुलिसकर्मियों को
मुजफ्फरनगर। अमजद की मां की गुहार पर सीजेएम कोर्ट ने एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को धारा 302 के आरोप में तलब भी कर लिया है, जिस पर आगामी 25 जनवरी 2019 को सुनवाई होनी है।
मां अख्तरी को अप्रैल में मिला था पांच लाख का चेक
मुजफ्फरनगर। डीएम हरिद्वार की फर्जी मुहर व हस्ताक्षर के आधार पर की गई शिकायत का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने जांच में अमजद एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। आयोग की रिपोर्ट पर शासन ने पीड़ित परिजनों को अप्रैल माह में पांच लाख रुपये की अंतरिम सहायता भी उपलब्ध करा दी थी।