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दो हत्यारों को आजीवन कारावास, ईंटों से कुचलकर की थी बालक की हत्या
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 20 Jun 2018 12:57 AM IST
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खतौली के चर्चित आशु हत्याकांड में पॉक्सो अदालत ने मंगलवार को निर्णय सुनाया। कोर्ट ने दस साल के बालक की अपहरण कर उसके साथ कुकर्म के बाद हत्या के जुर्म में दो हत्यारों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही एक हत्यारे के पिता को भी सहयोग करने के जुर्म में सात वर्ष के कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जुर्माना की आधी धनराशि मृतक के पिता को देने का आदेश दिया है।
खतौली के मोहल्ला शिवपुुरी निवासी ओमप्रकाश ने पांच फरवरी 2016 को खतौली कोतवाली में मुकदमा कराया था। बताया था कि उसका दस साल का बेटा आशु शाम को अचानक लापता हो गया। अगले दिन छह फरवरी को बालक की लाश रेलवे स्टेशन के पास चीनी मिल के गोदाम के पास से अभियुक्त इब्राहिम पुत्र इरफान निवासी सद्दीकनगर खतौली और आमिर उर्फ अमिर पुत्र सगीर निवासी इस्लामनगर खतौली की निशानदेही पर बरामद की गई थी।
इस मुकदमे में इब्राहिम, आमिर उर्फ अमिर के अलावा इब्राहिम के पिता इरफान को आरोपी बनाया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई जनपद की पॉक्सो अदालत में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार पांडे ने की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता पॉक्सो पुष्पेंद्र मलिक और वादी के अधिवक्ता अग्रीस राणा ने कोर्ट में आठ गवाह और सबूत पेश किए।
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न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त इब्राहिम और आमिर उर्फ अमिर को मासूम आशु का अपहरण कर उसके साथ कुकर्म कर हत्या करने का दोषी करार देते हुए धारा 363 के तहत पांच वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना , धारा 377 के तहत आजीवन कारावास के साथ दस हजार रुपया का जुर्माना , धारा 302 के तहत आजीवन कारावास के साथ 20 हजार रुपया का जुर्माना , 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है।
साथ ही अभियुक्त इब्राहिम के पिता इरफान को भी सहयोग करने का दोषी करार देते हुए धारा 201 के तहत सात वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपया का जुर्माना की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि जुर्माना की आधी धनराशि मृतक आशू के पिता का दी जाएगी।
तीनों दो साल से हैं जेल में बंद
मुजफ्फरनगर। बालक आशु के हत्यारे बीते दो साल से जेल में बंद है। हाईकोर्ट से भी उनकी जमानत निरस्त हो गई थी। उधर, हत्यारे मासूम आशु को पतंग उड़ाने के बहाने अपने साथ ले गए थे। शिवपुरी में बालक शाम को घर के बाहर खेल रहा था। तभी वहां पहुंचे इब्राहिम और आमिर उसे पतंग उड़ाने के बहाने अपने साथ रेलवे स्टेशन के पास गोदाम पर ले गए थे।
दूसरी ओर, रेलवे स्टेशन के पास इब्राहिम और आमिर ने मासूम आशु को लेकर जाकर उसके साथ सामूहिक कुकर्म किया। वह घर जाकर किसी को बता न दे इसलिए दोनों ने उसकी ईंटों से सिर कुचल कर हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद दोनों ने शव को उसी स्थान पर झाडियों में छिपा दिया था। इसके बाद दोनों घर चले गए थे।
इब्राहिम के पिता ने लाश देखी थी
मुजफ्फरनगर। बालक की हत्या करके दोनों हत्यारे घर पहुंचे। सद्दीकनगर निवासी इब्राहिम ने घर जाकर पिता इरफान को बालक आशु की हत्या करने की बात बता दी थी। इस पर इरफान देर रात को घटनास्थल पर पहुंचा और बालक के शव को देखा। उसने पुलिस को बताने के बजाय शव पर और झाड़ियां रख कर उसे ढक दिया, ताकि वह किसी को दिखाई न दे। बेटे के जुर्म में सहयोग करने पर कोर्ट ने उसे भी सात साल की सजा सुनाई है।
उधर, बालक आशु के अचानक लापता होने पर परिजनों और मोहल्ले वालों ने उसकी तलाश की, मगर सुराग नहीं मिला। तब हताश होकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने भी जांच पड़ताल की, तो पता चला कि बालक को देर शाम कुछ लोगों ने उक्त दोनों युवकों के साथ देखा था।
पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर बालक का शव बरामद किया। अगवा बालक का शव मिलने पर बवाल हो गया था। कई थानों की फोर्स को बुला कर पुलिस ने जिम्मेदार लोगों की मदद से लोगों को शांत कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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खतौली के मोहल्ला शिवपुुरी निवासी ओमप्रकाश ने पांच फरवरी 2016 को खतौली कोतवाली में मुकदमा कराया था। बताया था कि उसका दस साल का बेटा आशु शाम को अचानक लापता हो गया। अगले दिन छह फरवरी को बालक की लाश रेलवे स्टेशन के पास चीनी मिल के गोदाम के पास से अभियुक्त इब्राहिम पुत्र इरफान निवासी सद्दीकनगर खतौली और आमिर उर्फ अमिर पुत्र सगीर निवासी इस्लामनगर खतौली की निशानदेही पर बरामद की गई थी।
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इस मुकदमे में इब्राहिम, आमिर उर्फ अमिर के अलावा इब्राहिम के पिता इरफान को आरोपी बनाया गया था। इस मुकदमे की सुनवाई जनपद की पॉक्सो अदालत में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार पांडे ने की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता पॉक्सो पुष्पेंद्र मलिक और वादी के अधिवक्ता अग्रीस राणा ने कोर्ट में आठ गवाह और सबूत पेश किए।
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न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त इब्राहिम और आमिर उर्फ अमिर को मासूम आशु का अपहरण कर उसके साथ कुकर्म कर हत्या करने का दोषी करार देते हुए धारा 363 के तहत पांच वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना , धारा 377 के तहत आजीवन कारावास के साथ दस हजार रुपया का जुर्माना , धारा 302 के तहत आजीवन कारावास के साथ 20 हजार रुपया का जुर्माना , 5/6 पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है।
साथ ही अभियुक्त इब्राहिम के पिता इरफान को भी सहयोग करने का दोषी करार देते हुए धारा 201 के तहत सात वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपया का जुर्माना की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि जुर्माना की आधी धनराशि मृतक आशू के पिता का दी जाएगी।
तीनों दो साल से हैं जेल में बंद
मुजफ्फरनगर। बालक आशु के हत्यारे बीते दो साल से जेल में बंद है। हाईकोर्ट से भी उनकी जमानत निरस्त हो गई थी। उधर, हत्यारे मासूम आशु को पतंग उड़ाने के बहाने अपने साथ ले गए थे। शिवपुरी में बालक शाम को घर के बाहर खेल रहा था। तभी वहां पहुंचे इब्राहिम और आमिर उसे पतंग उड़ाने के बहाने अपने साथ रेलवे स्टेशन के पास गोदाम पर ले गए थे।
दूसरी ओर, रेलवे स्टेशन के पास इब्राहिम और आमिर ने मासूम आशु को लेकर जाकर उसके साथ सामूहिक कुकर्म किया। वह घर जाकर किसी को बता न दे इसलिए दोनों ने उसकी ईंटों से सिर कुचल कर हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद दोनों ने शव को उसी स्थान पर झाडियों में छिपा दिया था। इसके बाद दोनों घर चले गए थे।
इब्राहिम के पिता ने लाश देखी थी
मुजफ्फरनगर। बालक की हत्या करके दोनों हत्यारे घर पहुंचे। सद्दीकनगर निवासी इब्राहिम ने घर जाकर पिता इरफान को बालक आशु की हत्या करने की बात बता दी थी। इस पर इरफान देर रात को घटनास्थल पर पहुंचा और बालक के शव को देखा। उसने पुलिस को बताने के बजाय शव पर और झाड़ियां रख कर उसे ढक दिया, ताकि वह किसी को दिखाई न दे। बेटे के जुर्म में सहयोग करने पर कोर्ट ने उसे भी सात साल की सजा सुनाई है।
उधर, बालक आशु के अचानक लापता होने पर परिजनों और मोहल्ले वालों ने उसकी तलाश की, मगर सुराग नहीं मिला। तब हताश होकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने भी जांच पड़ताल की, तो पता चला कि बालक को देर शाम कुछ लोगों ने उक्त दोनों युवकों के साथ देखा था।
पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर बालक का शव बरामद किया। अगवा बालक का शव मिलने पर बवाल हो गया था। कई थानों की फोर्स को बुला कर पुलिस ने जिम्मेदार लोगों की मदद से लोगों को शांत कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।