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एमबीबीएस चिकित्सकों को कराया प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास
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चिकित्सकों को कराया प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास
मुजफ्फरनगर। प्रसिद्ध नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ तथा योग प्रशिक्षक डा. महेंद्र तनेजा ने योग प्राणायाम, ध्यान और योग निद्रा के तरीके, सावधानी और लाभ बताए। उन्होंने बताया कि बहरापन, टिनिरस, याददाश्त की कमी को ठीक किया जा सकता है।
डा. महेंद्र तनेजा ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में 138 एमबीबीएस चिकित्सकों को क्रियात्मक रूप से योग, प्राणायाम ध्यान तथा योग निद्रा का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि योग में हृदय की गति नहीं बढ़नी चाहिए तथा प्रत्येक आसन की किसी चक्र विशेष पर ध्यान केंद्रित करके श्वास की गति को बाहर या अंदर रोककर प्रसन्न भाव से करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आनंद की अनुभूति न होने पर मस्तिष्क में उठने वाली तरंगे ब्रेन वेव शांत नहीं हो पाती हैं। इस कारण योग के अधूरा करने में लाभ कम होता है। उन्होंने बताया कि 55 वर्ष की आयु के बाद प्राणायाम और मुद्रा सहित ध्यान करना चाहिए। चित्तवृत्ति को शांत करते हुए शून्य मुद्रा सर्वश्रेष्ठ है। इससे बहरापन, टिनिरस, याद्दाश्त की कमी को ठीक किया जा सकता है।
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मुजफ्फरनगर। प्रसिद्ध नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ तथा योग प्रशिक्षक डा. महेंद्र तनेजा ने योग प्राणायाम, ध्यान और योग निद्रा के तरीके, सावधानी और लाभ बताए। उन्होंने बताया कि बहरापन, टिनिरस, याददाश्त की कमी को ठीक किया जा सकता है।
डा. महेंद्र तनेजा ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में 138 एमबीबीएस चिकित्सकों को क्रियात्मक रूप से योग, प्राणायाम ध्यान तथा योग निद्रा का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि योग में हृदय की गति नहीं बढ़नी चाहिए तथा प्रत्येक आसन की किसी चक्र विशेष पर ध्यान केंद्रित करके श्वास की गति को बाहर या अंदर रोककर प्रसन्न भाव से करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आनंद की अनुभूति न होने पर मस्तिष्क में उठने वाली तरंगे ब्रेन वेव शांत नहीं हो पाती हैं। इस कारण योग के अधूरा करने में लाभ कम होता है। उन्होंने बताया कि 55 वर्ष की आयु के बाद प्राणायाम और मुद्रा सहित ध्यान करना चाहिए। चित्तवृत्ति को शांत करते हुए शून्य मुद्रा सर्वश्रेष्ठ है। इससे बहरापन, टिनिरस, याद्दाश्त की कमी को ठीक किया जा सकता है।
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