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सीओ सर्किल के थानों में %बेमानी’ हुए एसएसआई
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:40 AM IST
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सीओ सर्किल के थानों में बेमानी हुए एसएसआई
मुजफ्फरनगर। डीजीपी के सीओ सर्किल के थानों में तीन-तीन अतिरिक्त सहायक इंस्पेक्टरों की तैनाती संबंधी आदेशों के बीच जनपद में भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके साथ ही इन थानों में अब तक तैनात रहने वाले एसएसआई की पोस्ट भी बेमानी हो गई है, यानि इन सभी थानों में कोतवाल के बाद रुतबे दार रहने वाले छोटे कोतवाल’ का वजूद भी खतरे में आ गया है।
डीजीपी ने हाल ही में सूबे के थानों में मुख्य कोतवाल के साथ ही तीन-तीन सहायक इंस्पेक्टरों की तैनाती के निर्देश दिए थे। उक्त तीनों सहायक इंस्पेक्टरों के कामकाज के लिए थानों में बाकायदा बीट व्यवस्था भी लागू कर दी गई थी, जिसे अपराध, प्रशासनिक व कानून व्यवस्था के तहत बांट दिया गया था। डीजीपी के उक्त आदेशों को अन्य जनपदों के साथ करीब एक पखवाड़े पूर्व जनपद में भी लागू कर दिया गया था। इसके तहत फिलहाल सीओ सर्किल के थानों में मुख्य इंस्पेक्टर के सहायक के रूप में तीन-तीन सहायक इंस्पेक्टर तैनात किए गए थे। इनमें शहर कोतवाली, नई मंडी कोतवाली, खतौली कोतवाली, बुढ़ाना कोतवाली, जानसठ कोतवाली, थाना भोपा व पुरकाजी शामिल हैं। उक्त सभी सातों सीओ सर्किल के थानों में सहायक इंस्पेक्टरों की नियुक्ति होने के साथ ही अब तक यहां तैनात रहने वाले एसएसआई की पोस्ट बेमानी हो गई है। इसके साथ ही अब तक इन थानों में मुख्य कोतवाल के बाद छोटे कोतवाल या थानेदार के रुतबे का वजूद भी खतरे में आ गया है। दरअसल, तीन-तीन सहायक इंस्पेक्टर तैनात होने के बाद अब मुख्य इंस्पेक्टर के बाद सारी व्यवस्था बीट के हिसाब से इन्हीं इंस्पेक्टरों के हाथों में रहेगी। इसके चलते एकमात्र छोटे कोतवाल का रुतबा भी अब इन्हीं तीनों इंस्पेक्टरों को मिलने वाला है। यही कारण रहा कि अफसरों द्वारा उक्त सभी सीओ सर्किल के थानों में बतौर एसएसआई तैनात रहे दरोगाओं के भी ट्रांसफर अन्य चौकी क्षेत्रों में कर दिए गए हैं।
थानों में हो सकता है गुटबाजी का आगाज
मुजफ्फरनगर। सीओ सर्किल के थानों में तीन-तीन सहायक इंस्पेक्टर तैनात होने के साथ ही अब इन थानों में गुटबाजी के दौर का आगाज होने की भी आशंकाएं बलवती हो गई हैं। दरअसल, पद में एक समान होने के चलते मुख्य व सहायक इंस्पेक्टरों के बीच मतभेद होने की भी संभावनाएं बननी शुरू हो गईं हैं। इसके साथ ही थानों में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच भी अपने सर’ को लेकर मनभेद हो सकते हैं। ऐसी अनचाही स्थिति से बचने के लिए कप्तान को भविष्य में वरिष्ठता के आधार पर ही थानों में मुख्य कोतवालों का चयन करना होगा।
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मुजफ्फरनगर। डीजीपी के सीओ सर्किल के थानों में तीन-तीन अतिरिक्त सहायक इंस्पेक्टरों की तैनाती संबंधी आदेशों के बीच जनपद में भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके साथ ही इन थानों में अब तक तैनात रहने वाले एसएसआई की पोस्ट भी बेमानी हो गई है, यानि इन सभी थानों में कोतवाल के बाद रुतबे दार रहने वाले छोटे कोतवाल’ का वजूद भी खतरे में आ गया है।
डीजीपी ने हाल ही में सूबे के थानों में मुख्य कोतवाल के साथ ही तीन-तीन सहायक इंस्पेक्टरों की तैनाती के निर्देश दिए थे। उक्त तीनों सहायक इंस्पेक्टरों के कामकाज के लिए थानों में बाकायदा बीट व्यवस्था भी लागू कर दी गई थी, जिसे अपराध, प्रशासनिक व कानून व्यवस्था के तहत बांट दिया गया था। डीजीपी के उक्त आदेशों को अन्य जनपदों के साथ करीब एक पखवाड़े पूर्व जनपद में भी लागू कर दिया गया था। इसके तहत फिलहाल सीओ सर्किल के थानों में मुख्य इंस्पेक्टर के सहायक के रूप में तीन-तीन सहायक इंस्पेक्टर तैनात किए गए थे। इनमें शहर कोतवाली, नई मंडी कोतवाली, खतौली कोतवाली, बुढ़ाना कोतवाली, जानसठ कोतवाली, थाना भोपा व पुरकाजी शामिल हैं। उक्त सभी सातों सीओ सर्किल के थानों में सहायक इंस्पेक्टरों की नियुक्ति होने के साथ ही अब तक यहां तैनात रहने वाले एसएसआई की पोस्ट बेमानी हो गई है। इसके साथ ही अब तक इन थानों में मुख्य कोतवाल के बाद छोटे कोतवाल या थानेदार के रुतबे का वजूद भी खतरे में आ गया है। दरअसल, तीन-तीन सहायक इंस्पेक्टर तैनात होने के बाद अब मुख्य इंस्पेक्टर के बाद सारी व्यवस्था बीट के हिसाब से इन्हीं इंस्पेक्टरों के हाथों में रहेगी। इसके चलते एकमात्र छोटे कोतवाल का रुतबा भी अब इन्हीं तीनों इंस्पेक्टरों को मिलने वाला है। यही कारण रहा कि अफसरों द्वारा उक्त सभी सीओ सर्किल के थानों में बतौर एसएसआई तैनात रहे दरोगाओं के भी ट्रांसफर अन्य चौकी क्षेत्रों में कर दिए गए हैं।
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थानों में हो सकता है गुटबाजी का आगाज
मुजफ्फरनगर। सीओ सर्किल के थानों में तीन-तीन सहायक इंस्पेक्टर तैनात होने के साथ ही अब इन थानों में गुटबाजी के दौर का आगाज होने की भी आशंकाएं बलवती हो गई हैं। दरअसल, पद में एक समान होने के चलते मुख्य व सहायक इंस्पेक्टरों के बीच मतभेद होने की भी संभावनाएं बननी शुरू हो गईं हैं। इसके साथ ही थानों में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच भी अपने सर’ को लेकर मनभेद हो सकते हैं। ऐसी अनचाही स्थिति से बचने के लिए कप्तान को भविष्य में वरिष्ठता के आधार पर ही थानों में मुख्य कोतवालों का चयन करना होगा।
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