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जेल में बंदी से मिला एंड्रॉयड मोबाइल
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:29 AM IST
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छापे में जेल में बंदी के पास से मिला मोबाइल
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार की बैरक नंबर 14-ए की तलाशी के दौरान बंदी के पास से एंड्रॉयड मोबाइल मिलने से हड़कंप मच गया। आरोपी बंदी के खिलाफ नई मंडी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जेल अधीक्षक एके सक्सेना व जेलर कमलेश सिंह ने टीम के साथ शुक्रवार रात जिला कारागार में अचानक निरीक्षण कर बंदियों की तलाशी ली थी। जेलर के मुताबिक इसी दौरान जेल की बैरक नंबर 14-ए में बंद किदवईनगर के दरोगा की कोठी निवासी वसीम पुत्र रशीद के पास से एक कंपनी का एंड्रॉयड मोबाइल बरामद किया गया। आरोपी से मोबाइल की बाबत पूछताछ की गई, लेकिन उसने कोई जानकारी नहीं दी। इस पर आरोपी के खिलाफ नई मंडी कोतवाली में तहरीर दे दी गई, जिस पर पुलिस ने बंदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। उधर, जिला कारागार में बंद बंदियों द्वारा मोबाइल का इस्तेमाल किए जाने का पुराना इतिहास रहा है। बंदियों ने जेल में रहते हुए ही अपने गुर्गों से मोबाइल पर लगातार संपर्क कायम रखते हुए साजिश रचकर कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिलाया है।
बंदियों के लिए जैमर भी बेकार
शासन द्वारा जेल में करोड़ों रुपये खर्च कर जैमर लगवा दिए थे, लेकिन बंदियों ने जेल की इस व्यवस्था को ही धता बता दिया है। बल्कि अब तो बंदी एक कदम और आगे बढ़ते हुए सीधे एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसकी एक बानगी पिछले दिनों जब देखी गई थी, जब जेल में बंद बंदियों के ग्रुप ने बैरक के अंदर से ही सेल्फी खींचकर बाकायदा सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी। इसके बाद जेल प्रशासन हरकत में आया, लेकिन कुछ समय बाद फिर से जेल में मोबाइल का इस्तेमाल फिर से शुरू कर दिया गया है।
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मुजफ्फरनगर। जिला कारागार की बैरक नंबर 14-ए की तलाशी के दौरान बंदी के पास से एंड्रॉयड मोबाइल मिलने से हड़कंप मच गया। आरोपी बंदी के खिलाफ नई मंडी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जेल अधीक्षक एके सक्सेना व जेलर कमलेश सिंह ने टीम के साथ शुक्रवार रात जिला कारागार में अचानक निरीक्षण कर बंदियों की तलाशी ली थी। जेलर के मुताबिक इसी दौरान जेल की बैरक नंबर 14-ए में बंद किदवईनगर के दरोगा की कोठी निवासी वसीम पुत्र रशीद के पास से एक कंपनी का एंड्रॉयड मोबाइल बरामद किया गया। आरोपी से मोबाइल की बाबत पूछताछ की गई, लेकिन उसने कोई जानकारी नहीं दी। इस पर आरोपी के खिलाफ नई मंडी कोतवाली में तहरीर दे दी गई, जिस पर पुलिस ने बंदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। उधर, जिला कारागार में बंद बंदियों द्वारा मोबाइल का इस्तेमाल किए जाने का पुराना इतिहास रहा है। बंदियों ने जेल में रहते हुए ही अपने गुर्गों से मोबाइल पर लगातार संपर्क कायम रखते हुए साजिश रचकर कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिलाया है।
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बंदियों के लिए जैमर भी बेकार
शासन द्वारा जेल में करोड़ों रुपये खर्च कर जैमर लगवा दिए थे, लेकिन बंदियों ने जेल की इस व्यवस्था को ही धता बता दिया है। बल्कि अब तो बंदी एक कदम और आगे बढ़ते हुए सीधे एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसकी एक बानगी पिछले दिनों जब देखी गई थी, जब जेल में बंद बंदियों के ग्रुप ने बैरक के अंदर से ही सेल्फी खींचकर बाकायदा सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी। इसके बाद जेल प्रशासन हरकत में आया, लेकिन कुछ समय बाद फिर से जेल में मोबाइल का इस्तेमाल फिर से शुरू कर दिया गया है।
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