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छह माह में निस्तारित होगा कवाल कांड
Updated Sun, 17 Sep 2017 12:52 AM IST
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छह माह में निस्तारित होगा कवाल कांड
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने छह माह में मुकदमे का ट्रायल पूरा करने के आदेश निचली अदालत को दिए हैं। साथ ही दो आरोपियों की जमानत भी खारिज कर दी है। कवाल कांड में शाहनवाज और मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या हुई थी। इस घटना के बाद ही जिले में दंगा भड़का था। कवाल की घटना का मुकदमा स्थानीय कोर्ट में विचाराधीन है। बीते चार साल में वादी रविंद्र सिंह समेत दो गवाहों की गवाही हो चुकी है। सचिन-गौरव की हत्या के पांच आरोपी घटना के बाद से ही जेल में हैं।
जानसठ थाने के कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को कवाल निवासी शाहनवाज के बाद मलिकपुरा निवासी ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। दोहरे हत्याकांड में गौरव के पिता रविंद्र सिंह की ओर से जानसठ कोतवाली में कवाल निवासी मुजस्सिम, मुजम्मिल, फुरकान, जहांगीर, नदीम, अफजाल और मृतक शाहनवाज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। घटना को लेकर पंचायतें हुईं। बाद में सात सितंबर को पंचायत से लौटते समय दंगा भड़क गया, जिसमें 67 लोगों की मौत हो गई थी। दंगे के बाद गठित एसआईसी ने कवाल कांड की जांच की, जिसमें नामजद एक आरोपी अफजाल की ओर से पुलिस को ट्रेन के टिकट दिखाते हुए बताया कि घटना के समय वह चेन्नई में कपड़ा बेचने जा रहा था। जांच में अफजाल की लोकेशन आंध्र प्रदेश में पाई जाने पर उसे क्लीनचिट देते हुए पांच आरोपियों मुजस्सिम, मुजम्मिल, फुरकान, जहांगीर, नदीम के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी, तब से ही पांचों आरोपी जेल में बंद है। सेशन कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने पर मुजम्मिल और फुरकान की जमानत अर्जी हाईकोर्ट इलाहाबाद में लगाई गई, जिस पर हाईकोर्ट ने छह माह के भीतर ट्रायल पूरा करने का आदेश निचली अदालत को दिया है। साथ ही कहा है कि मुकदमे को ज्यादा लंबा न खींचा जाए।
उधर, हत्याकांड की सुनवाई एडीजे-6 की कोर्ट में चल रही है। चार साल में मुकदमे के वादी रविंद्र सिंह समेत दो गवाहों की गवाही पूरी हो सकी है। गवाहों के बयान के आधार पर कोर्ट ने कवाल निवासी अफजाल और इकबाल को तलब किया था, जिन्हें जेल भेजा गया था। कुछ समय बाद दोनों हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आ गए। अब बाकी गवाहों की भी गवाही होनीे है, जिसमें 15 सितंबर को सुनवाई हुई। अब अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख लगी है।
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शाहनवाज की हत्या में लगी थी एफआर
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड में मारे गए शाहनवाज की हत्या में उसके पिता सलीम की ओर से मृतक सचिन, गौरव के अलावा प्रहलाद, बिशन, देवेंद्र, योगेंद्र, जितेंद के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन एसआईसी ने जांच के दौरान इस मुकदमे में एफआर लगा दी। एसआईसी का कहना था कि हत्या सचिन और गौरव ने की, लेकिन बाद में दोनों की हत्या हो गई। मुकदमा खारिज होने पर वादी पक्ष ने कोर्ट में एतराज दाखिल किया। कोर्ट ने जिसे स्वीकार करते हुए एफआर को खारिज कर इसे परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है, मगर अभी तक इसमें कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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मुजफ्फरनगर। कवाल कांड पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने छह माह में मुकदमे का ट्रायल पूरा करने के आदेश निचली अदालत को दिए हैं। साथ ही दो आरोपियों की जमानत भी खारिज कर दी है। कवाल कांड में शाहनवाज और मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या हुई थी। इस घटना के बाद ही जिले में दंगा भड़का था। कवाल की घटना का मुकदमा स्थानीय कोर्ट में विचाराधीन है। बीते चार साल में वादी रविंद्र सिंह समेत दो गवाहों की गवाही हो चुकी है। सचिन-गौरव की हत्या के पांच आरोपी घटना के बाद से ही जेल में हैं।
जानसठ थाने के कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को कवाल निवासी शाहनवाज के बाद मलिकपुरा निवासी ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। दोहरे हत्याकांड में गौरव के पिता रविंद्र सिंह की ओर से जानसठ कोतवाली में कवाल निवासी मुजस्सिम, मुजम्मिल, फुरकान, जहांगीर, नदीम, अफजाल और मृतक शाहनवाज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। घटना को लेकर पंचायतें हुईं। बाद में सात सितंबर को पंचायत से लौटते समय दंगा भड़क गया, जिसमें 67 लोगों की मौत हो गई थी। दंगे के बाद गठित एसआईसी ने कवाल कांड की जांच की, जिसमें नामजद एक आरोपी अफजाल की ओर से पुलिस को ट्रेन के टिकट दिखाते हुए बताया कि घटना के समय वह चेन्नई में कपड़ा बेचने जा रहा था। जांच में अफजाल की लोकेशन आंध्र प्रदेश में पाई जाने पर उसे क्लीनचिट देते हुए पांच आरोपियों मुजस्सिम, मुजम्मिल, फुरकान, जहांगीर, नदीम के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी, तब से ही पांचों आरोपी जेल में बंद है। सेशन कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने पर मुजम्मिल और फुरकान की जमानत अर्जी हाईकोर्ट इलाहाबाद में लगाई गई, जिस पर हाईकोर्ट ने छह माह के भीतर ट्रायल पूरा करने का आदेश निचली अदालत को दिया है। साथ ही कहा है कि मुकदमे को ज्यादा लंबा न खींचा जाए।
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उधर, हत्याकांड की सुनवाई एडीजे-6 की कोर्ट में चल रही है। चार साल में मुकदमे के वादी रविंद्र सिंह समेत दो गवाहों की गवाही पूरी हो सकी है। गवाहों के बयान के आधार पर कोर्ट ने कवाल निवासी अफजाल और इकबाल को तलब किया था, जिन्हें जेल भेजा गया था। कुछ समय बाद दोनों हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आ गए। अब बाकी गवाहों की भी गवाही होनीे है, जिसमें 15 सितंबर को सुनवाई हुई। अब अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख लगी है।
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शाहनवाज की हत्या में लगी थी एफआर
मुजफ्फरनगर। कवाल कांड में मारे गए शाहनवाज की हत्या में उसके पिता सलीम की ओर से मृतक सचिन, गौरव के अलावा प्रहलाद, बिशन, देवेंद्र, योगेंद्र, जितेंद के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन एसआईसी ने जांच के दौरान इस मुकदमे में एफआर लगा दी। एसआईसी का कहना था कि हत्या सचिन और गौरव ने की, लेकिन बाद में दोनों की हत्या हो गई। मुकदमा खारिज होने पर वादी पक्ष ने कोर्ट में एतराज दाखिल किया। कोर्ट ने जिसे स्वीकार करते हुए एफआर को खारिज कर इसे परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है, मगर अभी तक इसमें कोई सुनवाई नहीं हुई है।