फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   स्टॉक खत्म करने को खूब बिकी थी शराब

स्टॉक खत्म करने को खूब बिकी थी शराब

Thu, 05 Apr 2018 12:44 AM IST
Updated Thu, 05 Apr 2018 12:44 AM IST
विज्ञापन
स्टॉक खत्म करने को खूब बिकी थी शराब
उपद्रव के दौरान खूब बिकी शराब
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर।
जिले के ग्रामीण इलाकों में शराब बांटने और बिक्री को लेकर खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया है। दलित बहुल गांवों में शराब की खरीदारी का आंकलन किया जा रहा है। दिलचस्प यह है कि 31 मार्च को शराब के ठेकों, दुकानों पर खूब शराब बिकी है। इसके पीछे वजह कंपनियों को स्टॉक खत्म करना रहा है। एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष प्रारंभ होता है। इसके चलते पुराने माल की कोई वेल्यू नहीं रहती है। ऐसे में साफ है कि उपद्रव से पहले खूब शराब पीने के साथ पिलाई गई है। इसकी तफ्तीश प्रारंभ हो गई है।
हिंसक आंदोलन से अनजान बने रहे अफसरों की जांच में अब कई मोड़ सामने आ रहे हैं। उपद्रवियों को उकसाने, भड़काने के लिए गांवों में कैपिंग की गई तथा शराब बांटी गई है। गांवों में कई रोज से एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ जहर भरा जा रहा था, जो सोमवार को आंदोलन के रूप में सामने आया। यही आंदोलन हिंसा में बदला और उपद्रवियों ने करीब पांच घंटे तक शहर में उत्पात मचाया। शराब बांटे जाने की अफवाह को यकीन में बदलने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। जिले में देशी शराब के साथ छोटे-बड़े ठेकों की करीब 250 से अधिक दुकानें संचालित है, जिन पर औसत दिनों में कई करोड़ की खराब विक्रय होती है। शासन प्रशासन ने 31 मार्च और एक अप्रैल को बिक्री का रिकार्ड खंगाला है। जांच में आया है कि 31 मार्च को शराब विक्रेताओं कंपनियों के लिए क्लोजिंग का आखिरी दिन होता है। ऐसे में पुराने माल को हर हाल में खत्म करने के लिए कंपनियों को रात्रि 12 बजे तक का समय होता है, जिसके चलते जिले में 31 मार्च की रात्रि सबसे अधिक खराब खरीदी गई है। यह बिक्री अन्य दिनों के मुकाबले अधिक मानी जा रही है। क्योंकि एक अप्रैल को नया वित्तीय वर्ष चालू हो गया। ऐसे में बिक्री सामान्य रही है। आबकारी निरीक्षक त्रिभुवन सिंह ने बताया कि मार्च माह क्लोजिंग का रहता है। 31 की सुबह से शाम तक खूब शराब बिकती है। उपद्रवियों को शराब बांटे जाने की जांच की रही है। फिलहाल स्टॉक की जांच होगी, 31 और एक अप्रैल को किन-किन दुकानों के लिए सबसे ज्यादा स्टॉक गया है।
विज्ञापन

दलित बहुल गांव की दुकानों पर नजर
मुजफ्फरनगर। पुलिस-प्रशासन के साथ खुफिया तंत्र भी दलित क्षेत्रों और आबादी के निकट खुली शराब की दुकानों, ठेकों पर तिरछी नजर कर चुका है। यहां पर आम रूप से शराब खरीदने के अलावा पीने वालों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही बीयर शॉप, वाइन शॉप और बड़ा स्टॉक रखने वाली शराब की दुकानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में भी 31 से लेकर एक अप्रैल तक की वीडियो फुटेज खंगाली गई है। यहां कोई राजनीतिक या संदिग्धों ने शराब की खरीदारी तो नहीं की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

खादर क्षेत्र रडार पर आए
मुजफ्फरनगर। पुरकाजी, रामराज के आदि साथ आबकारी विभाग, खुफिया तंत्र ने खादर क्षेत्रों में भी निगाह जमाई है। खादर क्षेत्रों में कच्ची शराब बनाने और बेचने का कार्य होता है। यहां पर शराब माफिया के साथ अन्य लोगों की भी कुंडली खंगाली जा रही है, ताकि स्थिति साफ हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed