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गैंगरेप के मामले में मीरापुर पुलिस ने किया खेल
Updated Thu, 06 Sep 2018 01:10 AM IST
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गैंगरेप के मामले में मीरापुर पुलिस ने किया खेल
मुजफ्फरनगर। मीरापुर थाना पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में खेल करते हुए मामले को महज मारपीट में दर्ज किया है। आरोप है कि थाना पुलिस ने पीड़ित की तहरीर को दरकिनार करते हुए एक कथित नेता की तहरीर पर उक्त एफआईआर दर्ज कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पीड़ित पक्ष ने अब एसएसपी से कार्रवाई की गुहार लगाई है।
मीरापुर थाना क्षेत्र के गांव निवासी महिला ने पुलिस ऑफिस में शिकायती पत्र देकर बताया कि तीन अगस्त को उसकी बीए में पढ़ने वाली बेटी को पड़ोस की महिला घर से बुलाकर ले गई थी। आरोप है कि जब दोपहर तक भी बेटी घर नहीं लौटी तो पीड़िता पति के साथ पड़ोसी महिला के घर पहुंची, जहां एक कमरे से छात्रा के चीखने की आवाजें आ रहीं थीं। पूछताछ में युवती ने पड़ोसी के दो बेटों पर तमंचे के बल पर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। इसका विरोध करने पर आरोपियों ने पति-पत्नी के साथ ही पीड़ित छात्रा पर भी हमला कर उन्हें घायल कर दिया। आरोप है कि घटना की तहरीर पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस ने उन पर दबाव डालते हुए उनकी शिकायत को दरकिनार कर दिया और क्षेत्र के एक कथित समाजसेवी को बुलाकर उसके जरिये पीड़ित पक्ष पर फैसले का दबाव बनाया। आरोप है कि इससे इंकार करने पर पुलिस द्वारा कथित समाजसेवी द्वारा एक फर्जी तहरीर लिखवाई गई, जिसके आधार पर मामले को गैंगरेप के बजाये केवल मामूली मारपीट की धाराओं में दर्ज कर खानापूर्ति कर ली गई। पीड़िता ने अब एसएसपी से मामले की शिकायत करते हुए निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की गुहार लगाई है। उधर, मामले में एसओ मनोज चौधरी का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच रास्ते का विवाद है। पूर्व में महिला ने मारपीट की ही तहरीर दी थी, जिसकी एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। बाद में महिला ने गैंगरेप का आरोप लगाया है, जिसकी जांच की जा रही है।
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मुजफ्फरनगर। मीरापुर थाना पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में खेल करते हुए मामले को महज मारपीट में दर्ज किया है। आरोप है कि थाना पुलिस ने पीड़ित की तहरीर को दरकिनार करते हुए एक कथित नेता की तहरीर पर उक्त एफआईआर दर्ज कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पीड़ित पक्ष ने अब एसएसपी से कार्रवाई की गुहार लगाई है।
मीरापुर थाना क्षेत्र के गांव निवासी महिला ने पुलिस ऑफिस में शिकायती पत्र देकर बताया कि तीन अगस्त को उसकी बीए में पढ़ने वाली बेटी को पड़ोस की महिला घर से बुलाकर ले गई थी। आरोप है कि जब दोपहर तक भी बेटी घर नहीं लौटी तो पीड़िता पति के साथ पड़ोसी महिला के घर पहुंची, जहां एक कमरे से छात्रा के चीखने की आवाजें आ रहीं थीं। पूछताछ में युवती ने पड़ोसी के दो बेटों पर तमंचे के बल पर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। इसका विरोध करने पर आरोपियों ने पति-पत्नी के साथ ही पीड़ित छात्रा पर भी हमला कर उन्हें घायल कर दिया। आरोप है कि घटना की तहरीर पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस ने उन पर दबाव डालते हुए उनकी शिकायत को दरकिनार कर दिया और क्षेत्र के एक कथित समाजसेवी को बुलाकर उसके जरिये पीड़ित पक्ष पर फैसले का दबाव बनाया। आरोप है कि इससे इंकार करने पर पुलिस द्वारा कथित समाजसेवी द्वारा एक फर्जी तहरीर लिखवाई गई, जिसके आधार पर मामले को गैंगरेप के बजाये केवल मामूली मारपीट की धाराओं में दर्ज कर खानापूर्ति कर ली गई। पीड़िता ने अब एसएसपी से मामले की शिकायत करते हुए निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की गुहार लगाई है। उधर, मामले में एसओ मनोज चौधरी का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच रास्ते का विवाद है। पूर्व में महिला ने मारपीट की ही तहरीर दी थी, जिसकी एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। बाद में महिला ने गैंगरेप का आरोप लगाया है, जिसकी जांच की जा रही है।
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