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जिल्लत और तोहमतों ने बदल दी जिंदगी
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:28 AM IST
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मुजफ्फरनगर। बसधाड़ा गैंगरेप कांड के गुनहगारों को सोमवार को सजा सुनाई जाएगी। इस घटना के बाद पीड़ित युवती की पूरी जिंदगी बदल गई। इन चार साल के दरम्यान उसे कितनी जिल्लत और तोहमत का सामना करना पड़ा, यह वही जानती है। इस बीच युवती की शादी भी हुई, मगर ससुराल के लोग आरोपियों के लालच में आकर फैसले के लिए दबाव बनाने लगे। युवती को ऑप्शन दिया गया कि बयान बदले या फिर उनसे रिश्ता खत्म। युवती ने दोषियों को सजा दिलाने के लिए ससुराल को छोड़ दिया।
शाहपुर थाने के एक गांव की युवती का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन मुफलिसी आड़े आ गई। इंटर तक पढ़ाई करने के बाद वह कसबे के एक डॉक्टर के यहां बतौर नर्स काम करने लगी। पिता गांव में मजदूरी करते थे। उसकी तनख्वाह से घर में भी सहारा मिलने लगा। इस दौरान उसकी दोस्ती मोबाइल की दुकान करने वाले युवक से हो गई। 17 अगस्त 2013 की बात है। दोस्त ने युवती से मंसूरपुर में एक रेस्टोरेंट पर लंच के लिए चलने के लिए कहा। दोनों बाइक से मंसूरपुर पहुंचे। लौटते समय वह बसधाड़ा गांव के जंगल में पानी पीने के लिए ट्यूबवेल पर रुके। इसी दौरान वहां मौजूद बसधाड़ा के राशिद, वासिफ, सोमान, राहुल, अब्दुल, सलाऊ और मोनू ने युवक को पीटकर भगा दिया और युवती को पीटते हुए ईंख के खेत में ले गए, जहां सभी ने युवती से सामूहिक बलात्कार करने के साथ ही मोबाइल से वीडियो क्लिप बनाई। युवती चीखती रही, लेकिन किसी को दया नहीं आई। आरोपियों ने किसी को इसकी जानकारी देने पर घरवालों को जान से मारने और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती को खामोश कर दिया। करीब दस माह बाद आरोपियों ने युवती की क्लिपिंग सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। सांप्रदायिक दंगे के बाद सामने आए मामले को लेकर इलाके के हालात भी तनावपूर्ण हो गए। 24 जून 2014 को युवती शाहपुर थाने पहुंची और सातों आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आनन-फानन में आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी। बाद में अब्दुल को छोड़कर बाकी छह आरोपियों को जमानत मिल गई थी। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश भारद्वाज की अदालत संख्या 15 में हुई।
इसी बीच युवती की खतौली क्षेत्र के एक गांव में शादी हो गई। युवती का कहना है कि आरोपियों ने उसकी ससुराल तक पहुंचना शुरू कर दिया। ससुराल वालों को 25 लाख रुपये लेकर बयान बदलने का लालच दिया गया। पति उस पर दबाव बनाने लगा। युवती के इंकार करने पर उस पर तमाम तोहमत मढ़ी जाने लगी। एक दिन पति ने साफ कह दिया कि बयान बदल दे वरना वह उसे छोड़ देगा। इतने पर भी युवती का साहस नहीं डिगा। उसने कहा कि वह गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए सारे जतन करेगी। युवती ने ससुराल को अलविदा कह दिया। बाद में पंचायत में वह अलग-अलग हो गए। फिलहाल युवती गुड़गांव में एक कॉल सेंटर में काम कर रही है। शनिवार को अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सोमवार का दिन सजा के लिए मुकर्रर किया गया है।
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रात-रात भर रोती थी पीड़िता
मुजफ्फरनगर। इस घटना के बाद से युवती का पूरा जीवन ही बदल गया। वीडियो वायरल होने के बाद उसका घर से निकलना दूभर हो गया। फोन पर बातचीत में युवती ने भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि मुल्जिमों को सजा दिलाना ही उसकी जिंदगी का मकसद बन गया था। छह माह पहले उसे गवाही के लिए फोन गया। पुलिस सुरक्षा में वह कोर्ट पहुंची और गवाही दी। युवती का कहना है कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी जिंदगी में ऐसा झोका आएगा कि सबकुछ उड़ाकर ले जाएगा। घटना जब याद आती थी, रात-रातभर रोती रहती थी। युवती कहती है कि उसके परिजनों ने उसका पूरा सहयोग किया।
गुनहगारों को कड़ी सजा मिले
मुजफ्फरनगर। बेटी के गुनहगारों को दोषी ठहराए जाने के बाद माता-पिता खुश हैं। उनका कहना है कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वह बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए ऊपरी अदालत में भी जाने के लिए तैयार हैं। दो गाय पालकर परिवार की गुजर-बसर करने वाले यह दंपति कहते हैं कि आरोपियों ने उन्हें भी लालच देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि वह बेटी की अस्मत से कोई समझौता नहीं करेंगेे। यह परिवार केस में मदद के लिए गांव के पूर्व प्रधान का भी शुक्रिया अदा करते हैं।
चेहरे साफ थे, बचना नामुमकिन था: जौली
सेवानिवृत्त एसपी राकेश कुमार जौली घटना के समय जिले के एसपी थे। जौली कहते हैं कि घटना के दौरान बनाई गई वीडियो केस के लिए इतना अहम सबूत थी कि आरोपियों का बचना नामुमकिन था। वीडियो में कई आरोपियों के चेहरे साफ नजर आ रहे थे। पुलिस ने सभी तथ्यों को मजबूती से कोर्ट से समक्ष रखा।
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शाहपुर थाने के एक गांव की युवती का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन मुफलिसी आड़े आ गई। इंटर तक पढ़ाई करने के बाद वह कसबे के एक डॉक्टर के यहां बतौर नर्स काम करने लगी। पिता गांव में मजदूरी करते थे। उसकी तनख्वाह से घर में भी सहारा मिलने लगा। इस दौरान उसकी दोस्ती मोबाइल की दुकान करने वाले युवक से हो गई। 17 अगस्त 2013 की बात है। दोस्त ने युवती से मंसूरपुर में एक रेस्टोरेंट पर लंच के लिए चलने के लिए कहा। दोनों बाइक से मंसूरपुर पहुंचे। लौटते समय वह बसधाड़ा गांव के जंगल में पानी पीने के लिए ट्यूबवेल पर रुके। इसी दौरान वहां मौजूद बसधाड़ा के राशिद, वासिफ, सोमान, राहुल, अब्दुल, सलाऊ और मोनू ने युवक को पीटकर भगा दिया और युवती को पीटते हुए ईंख के खेत में ले गए, जहां सभी ने युवती से सामूहिक बलात्कार करने के साथ ही मोबाइल से वीडियो क्लिप बनाई। युवती चीखती रही, लेकिन किसी को दया नहीं आई। आरोपियों ने किसी को इसकी जानकारी देने पर घरवालों को जान से मारने और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती को खामोश कर दिया। करीब दस माह बाद आरोपियों ने युवती की क्लिपिंग सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। सांप्रदायिक दंगे के बाद सामने आए मामले को लेकर इलाके के हालात भी तनावपूर्ण हो गए। 24 जून 2014 को युवती शाहपुर थाने पहुंची और सातों आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आनन-फानन में आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी। बाद में अब्दुल को छोड़कर बाकी छह आरोपियों को जमानत मिल गई थी। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश भारद्वाज की अदालत संख्या 15 में हुई।
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इसी बीच युवती की खतौली क्षेत्र के एक गांव में शादी हो गई। युवती का कहना है कि आरोपियों ने उसकी ससुराल तक पहुंचना शुरू कर दिया। ससुराल वालों को 25 लाख रुपये लेकर बयान बदलने का लालच दिया गया। पति उस पर दबाव बनाने लगा। युवती के इंकार करने पर उस पर तमाम तोहमत मढ़ी जाने लगी। एक दिन पति ने साफ कह दिया कि बयान बदल दे वरना वह उसे छोड़ देगा। इतने पर भी युवती का साहस नहीं डिगा। उसने कहा कि वह गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए सारे जतन करेगी। युवती ने ससुराल को अलविदा कह दिया। बाद में पंचायत में वह अलग-अलग हो गए। फिलहाल युवती गुड़गांव में एक कॉल सेंटर में काम कर रही है। शनिवार को अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सोमवार का दिन सजा के लिए मुकर्रर किया गया है।
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रात-रात भर रोती थी पीड़िता
मुजफ्फरनगर। इस घटना के बाद से युवती का पूरा जीवन ही बदल गया। वीडियो वायरल होने के बाद उसका घर से निकलना दूभर हो गया। फोन पर बातचीत में युवती ने भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि मुल्जिमों को सजा दिलाना ही उसकी जिंदगी का मकसद बन गया था। छह माह पहले उसे गवाही के लिए फोन गया। पुलिस सुरक्षा में वह कोर्ट पहुंची और गवाही दी। युवती का कहना है कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी जिंदगी में ऐसा झोका आएगा कि सबकुछ उड़ाकर ले जाएगा। घटना जब याद आती थी, रात-रातभर रोती रहती थी। युवती कहती है कि उसके परिजनों ने उसका पूरा सहयोग किया।
गुनहगारों को कड़ी सजा मिले
मुजफ्फरनगर। बेटी के गुनहगारों को दोषी ठहराए जाने के बाद माता-पिता खुश हैं। उनका कहना है कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वह बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए ऊपरी अदालत में भी जाने के लिए तैयार हैं। दो गाय पालकर परिवार की गुजर-बसर करने वाले यह दंपति कहते हैं कि आरोपियों ने उन्हें भी लालच देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि वह बेटी की अस्मत से कोई समझौता नहीं करेंगेे। यह परिवार केस में मदद के लिए गांव के पूर्व प्रधान का भी शुक्रिया अदा करते हैं।
चेहरे साफ थे, बचना नामुमकिन था: जौली
सेवानिवृत्त एसपी राकेश कुमार जौली घटना के समय जिले के एसपी थे। जौली कहते हैं कि घटना के दौरान बनाई गई वीडियो केस के लिए इतना अहम सबूत थी कि आरोपियों का बचना नामुमकिन था। वीडियो में कई आरोपियों के चेहरे साफ नजर आ रहे थे। पुलिस ने सभी तथ्यों को मजबूती से कोर्ट से समक्ष रखा।