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Varanasi News: छोटे बेटे की काबिलियत पर था नाज, मुठभेड़ से पहले तक अंजान थे पुनीत के पिता
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। जगतपुर पीजी कॉलेज में एमएससी की छात्रा श्रेया उपाध्याय उर्फ मोनू (22) की हत्या के मामले में आरोपी पुनीत मिश्रा को लेकर उसके पैतृक गांव मिश्रौली बकुची में सोमवार तक किसी को भनक तक नहीं थी। जघन्य वारदात में शामिल पुनीत की पहचान गांव में एक सामान्य लड़के के तौर पर थी।
पुनीत के पिता सुरेंद्र मिश्रा कस्बे के चोरपा बाजार में पूजा-पाठ और धार्मिक सामग्री की दुकान संचालित करते हैं। तीसरे नंबर के बेटे पुनीत की काबिलियत को लेकर नाज था। आर्थिक रूप से कमजोर होने पर उनका बड़ा बेटा श्रीराम मिश्रा दुबई में काम करता था। इजरायल ईरान के बीच युद्ध के बाद से वो घर पर ही है। दूसरे नंबर का बेटा कृष्णा उर्फ माखन भी अपना काम करता है। पुनीत के पिता सुरेंद्र और दोनों बड़े भाइयों ने अपने मोबाइल बंद कर लोगों से दूरी बना ली है। घटना के बाद से पुनीत अपने पिता और घर के लोगों के संपर्क में नहीं था। उसका मोबाइल बंद था। 20 अगस्त को दूसरे नंबर से फोन कर हाल चाल बताया था।
पहले पिता, फिर दोनों बड़े भाई ने कराया था बीफार्मा
वाराणसी। पुनीत बीफार्मा करने के बाद एनजीओ में काम कर रहा था। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद पहले पिता ने उसे पढ़ाया फिर उसके बड़े भाई ने विदेश में नौकरी कर उसकी पढ़ाई को जारी रखा था। तीनों भाइयों में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे होने के चलते पूरे परिवार को पुनीत से बहुत उम्मीदें थीं। संवाद
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वाराणसी। जगतपुर पीजी कॉलेज में एमएससी की छात्रा श्रेया उपाध्याय उर्फ मोनू (22) की हत्या के मामले में आरोपी पुनीत मिश्रा को लेकर उसके पैतृक गांव मिश्रौली बकुची में सोमवार तक किसी को भनक तक नहीं थी। जघन्य वारदात में शामिल पुनीत की पहचान गांव में एक सामान्य लड़के के तौर पर थी।
पुनीत के पिता सुरेंद्र मिश्रा कस्बे के चोरपा बाजार में पूजा-पाठ और धार्मिक सामग्री की दुकान संचालित करते हैं। तीसरे नंबर के बेटे पुनीत की काबिलियत को लेकर नाज था। आर्थिक रूप से कमजोर होने पर उनका बड़ा बेटा श्रीराम मिश्रा दुबई में काम करता था। इजरायल ईरान के बीच युद्ध के बाद से वो घर पर ही है। दूसरे नंबर का बेटा कृष्णा उर्फ माखन भी अपना काम करता है। पुनीत के पिता सुरेंद्र और दोनों बड़े भाइयों ने अपने मोबाइल बंद कर लोगों से दूरी बना ली है। घटना के बाद से पुनीत अपने पिता और घर के लोगों के संपर्क में नहीं था। उसका मोबाइल बंद था। 20 अगस्त को दूसरे नंबर से फोन कर हाल चाल बताया था।
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पहले पिता, फिर दोनों बड़े भाई ने कराया था बीफार्मा
वाराणसी। पुनीत बीफार्मा करने के बाद एनजीओ में काम कर रहा था। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद पहले पिता ने उसे पढ़ाया फिर उसके बड़े भाई ने विदेश में नौकरी कर उसकी पढ़ाई को जारी रखा था। तीनों भाइयों में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे होने के चलते पूरे परिवार को पुनीत से बहुत उम्मीदें थीं। संवाद
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