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खानाबदोश बच्चों का बचपन संवारेगी जीआरपी
Updated Sun, 22 Apr 2018 01:16 AM IST
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खानाबदोश बच्चों का बचपन संवारेगी जीआरपी
मुजफ्फरनगर।
जीआरपी की एक पहल ने खानाबदोश बचपन को संवारने का काम प्रारंभ किया है। अहमदाबाद से हरिद्वार योगा एक्सप्रेस से शनिवार को भीख मांगते 12 बच्चों को जीआरपी ने मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर उतार लिया। नाम पता पूछने के बाद उनकी काउंसलिंग की गई। मेरठ से परिजनों को बुला कर बच्चों को उनकी सुपुर्दगी में दिया गया।
ट्रेनों में खानाबदोश बच्चों की भीख मांगने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए जीआरपी ने नई पहल की है। एडीजी रेलवे बीके मौर्य ने बीते सप्ताह यहां निरीक्षण के दौरान जीआरपी को यह सीख दी थी। गलत राह पर जा रहे बच्चों को काउंसलिंग के बाद समाज से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाने को कहा गया। शनिवार को योगा एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर दो पहुंची तो जीआरपी के जवानों ने ट्रेन से 12 बच्चों गोपाल, गोपी, मनीषा, सुल्ताना, अरमाना, रिजवाना, आरती, मनीषा, निशा, किशन, रेशमा और चांदनी को उतार लिया। ये सभी बच्चे ट्रेन में भीख मांग रहे थे। इनकी उम्र छह से 16 साल तक पाई गई। बातचीत के आधार पर जीआरपी ने उनके परिजनों की जानकारी ली। बच्चों से उनकी दिनचर्या पूछी गई। स्कूल पढ़ने जाते है या नहीं, किसने कहने पर ट्रेनों में भीख मांगते है। काउंसलिंग के बाद जीआरपी ने मेरठ से सभी बच्चों को अभिभावकों को बुलाया। बच्चों की मौजूदगी में उन्हें शिक्षा से जोड़ने को प्रेरित किया। एसओ जीआरपी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि प्रदेश में जीआरपी ने ट्रेनों में खानाबदोश बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए पहल प्रारंभ की है। बीएसए मेरठ को पत्र लिख कर इन बच्चों को स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत शिक्षा से जोड़ने को कहा गया है।
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मुजफ्फरनगर।
जीआरपी की एक पहल ने खानाबदोश बचपन को संवारने का काम प्रारंभ किया है। अहमदाबाद से हरिद्वार योगा एक्सप्रेस से शनिवार को भीख मांगते 12 बच्चों को जीआरपी ने मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर उतार लिया। नाम पता पूछने के बाद उनकी काउंसलिंग की गई। मेरठ से परिजनों को बुला कर बच्चों को उनकी सुपुर्दगी में दिया गया।
ट्रेनों में खानाबदोश बच्चों की भीख मांगने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए जीआरपी ने नई पहल की है। एडीजी रेलवे बीके मौर्य ने बीते सप्ताह यहां निरीक्षण के दौरान जीआरपी को यह सीख दी थी। गलत राह पर जा रहे बच्चों को काउंसलिंग के बाद समाज से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाने को कहा गया। शनिवार को योगा एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर दो पहुंची तो जीआरपी के जवानों ने ट्रेन से 12 बच्चों गोपाल, गोपी, मनीषा, सुल्ताना, अरमाना, रिजवाना, आरती, मनीषा, निशा, किशन, रेशमा और चांदनी को उतार लिया। ये सभी बच्चे ट्रेन में भीख मांग रहे थे। इनकी उम्र छह से 16 साल तक पाई गई। बातचीत के आधार पर जीआरपी ने उनके परिजनों की जानकारी ली। बच्चों से उनकी दिनचर्या पूछी गई। स्कूल पढ़ने जाते है या नहीं, किसने कहने पर ट्रेनों में भीख मांगते है। काउंसलिंग के बाद जीआरपी ने मेरठ से सभी बच्चों को अभिभावकों को बुलाया। बच्चों की मौजूदगी में उन्हें शिक्षा से जोड़ने को प्रेरित किया। एसओ जीआरपी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि प्रदेश में जीआरपी ने ट्रेनों में खानाबदोश बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए पहल प्रारंभ की है। बीएसए मेरठ को पत्र लिख कर इन बच्चों को स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत शिक्षा से जोड़ने को कहा गया है।
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