{"_id":"5f64faa78ebc3e2cb47bfaf8","slug":"corporate-world-will-benefit-farmers-will-suffer-muzaffarnagar-news-mrt501992361","type":"story","status":"publish","title_hn":"कॉरपोरेट जगत को फायदा, किसानों को होगा नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कॉरपोरेट जगत को फायदा, किसानों को होगा नुकसान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। कृषि सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन विधेयकों को लेकर किसान संगठनों और मंडी के व्यापारियों में आक्रोश है। मंडी व्यवस्था के खात्मे से किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल पाएगा। किसान कॉरपोरेट जगत के अधीन होगा और मंडियों के व्यापारियों का धंधा चौपट होने में देर नहीं लगेगी। किसान विधेयकों को लागू करने से पहले किसानों को इसके बारे में विस्तार से बताएं। ताकि उनकी भ्रांतियां दूर हो सके।
किसान विरोधी है विधेयक
केंद्र सरकार कृषि जगत सुधार को लाए जाने वाले विधेयक किसान विरोधी है। सरकार सत्ता के नशे में है। मंडियां खत्म होने से किसानों को समर्थन मूल्य मिल पाना संभव नहीं होगा। सिर्फ कॉरपोरेट जगत को फायदा होगा। यह विधेयक किसानों को पूंजीपतियों के गुलाम बनाने वाले है। मांग है अगर सरकार इन्हें लागू करती है, तो किसान की फसल को देश में समर्थन मूल्य से कम खरीदने वालों पर कार्रवाई तय करे और यह बात कानून में शामिल की जाए। - राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भारतीय किसान यूनियन
लाठी से नहीं दबेगी किसान की आवाज
- हरियाणा और पंजाब में किसानों का आंदोलन सरकार की नासमझी का कारण हो रहा है। लाठी से किसान की आवाज ना कभी दबी है और ना कभी दबेगी। यदि सरकार तीनों विधेयक को किसान के हित मानती है, तो एक्ट लागू करने से पहले किसानों को समझाए। जनप्रतिनिधि आम किसान के बीच जाए और इसके नफे के बारे में बताएं। यदि इन विधेयक को लागू करने में नुकसान नजर आया, तो किसान आंदोलन करेगा। - ठाकुर पूरण सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान संगठन
विज्ञापन
किसान का एटीएम कार्ड है व्यापारी
- मंडी का व्यापारी किसान का एटीएम कार्ड है। यह विधेयक किसान और व्यापारी दोनों के विरोधी है। किसान बाहरी प्रांतों में फसल बेचने के लिए पहले से आजाद था। मंडी के बाहर शुल्क खत्म करना और मंडी के अंदर लगाना सरकार का गलत कदम है। किसानों द्वारा गुड़ एवं अनाज बेचने में अवैध कारोबारियों को फायदा होगा। कानून से बनी मंडिया खत्म में धंधा बंद होगा और व्यापारियों को पलायन करना पड़ेगा। वह सरकार को ढाई प्रतिशत टैक्स क्यों देंगे। - संजय मित्तल, अध्यक्ष दी गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन
महंगे भाड़े पर दूसरे प्रांतों में कैसे बेचे फसल
- किसान तबाह हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट के मंत्री द्वारा त्याग पत्र देना साबित कर रहा है, सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश किसान विरोधी है। देश के किसान हित में मोदी सरकार को यह तत्काल वापस लेना चाहिए। पीएम कहते वन नेशन वन मार्केट, लेकिन हमारी मांग है वन नेशन वन रेट, ताकि किसानों को फसल का वाजिब दाम मिल सकें। केंद्र ने पेट्रो पदार्थों पर 69 प्रतिशत टैक्स लगाया है। महंगे भाड़े पर किसान अपनी फसल को बाहर कैसे ले जाकर बेचेगा। - प्रदीप देशवाल, जिलाध्यक्ष (आईटी) राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन
विज्ञापन
किसान विरोधी है विधेयक
केंद्र सरकार कृषि जगत सुधार को लाए जाने वाले विधेयक किसान विरोधी है। सरकार सत्ता के नशे में है। मंडियां खत्म होने से किसानों को समर्थन मूल्य मिल पाना संभव नहीं होगा। सिर्फ कॉरपोरेट जगत को फायदा होगा। यह विधेयक किसानों को पूंजीपतियों के गुलाम बनाने वाले है। मांग है अगर सरकार इन्हें लागू करती है, तो किसान की फसल को देश में समर्थन मूल्य से कम खरीदने वालों पर कार्रवाई तय करे और यह बात कानून में शामिल की जाए। - राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भारतीय किसान यूनियन
विज्ञापन
लाठी से नहीं दबेगी किसान की आवाज
- हरियाणा और पंजाब में किसानों का आंदोलन सरकार की नासमझी का कारण हो रहा है। लाठी से किसान की आवाज ना कभी दबी है और ना कभी दबेगी। यदि सरकार तीनों विधेयक को किसान के हित मानती है, तो एक्ट लागू करने से पहले किसानों को समझाए। जनप्रतिनिधि आम किसान के बीच जाए और इसके नफे के बारे में बताएं। यदि इन विधेयक को लागू करने में नुकसान नजर आया, तो किसान आंदोलन करेगा। - ठाकुर पूरण सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान संगठन
विज्ञापन
किसान का एटीएम कार्ड है व्यापारी
- मंडी का व्यापारी किसान का एटीएम कार्ड है। यह विधेयक किसान और व्यापारी दोनों के विरोधी है। किसान बाहरी प्रांतों में फसल बेचने के लिए पहले से आजाद था। मंडी के बाहर शुल्क खत्म करना और मंडी के अंदर लगाना सरकार का गलत कदम है। किसानों द्वारा गुड़ एवं अनाज बेचने में अवैध कारोबारियों को फायदा होगा। कानून से बनी मंडिया खत्म में धंधा बंद होगा और व्यापारियों को पलायन करना पड़ेगा। वह सरकार को ढाई प्रतिशत टैक्स क्यों देंगे। - संजय मित्तल, अध्यक्ष दी गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन
महंगे भाड़े पर दूसरे प्रांतों में कैसे बेचे फसल
- किसान तबाह हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट के मंत्री द्वारा त्याग पत्र देना साबित कर रहा है, सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश किसान विरोधी है। देश के किसान हित में मोदी सरकार को यह तत्काल वापस लेना चाहिए। पीएम कहते वन नेशन वन मार्केट, लेकिन हमारी मांग है वन नेशन वन रेट, ताकि किसानों को फसल का वाजिब दाम मिल सकें। केंद्र ने पेट्रो पदार्थों पर 69 प्रतिशत टैक्स लगाया है। महंगे भाड़े पर किसान अपनी फसल को बाहर कैसे ले जाकर बेचेगा। - प्रदीप देशवाल, जिलाध्यक्ष (आईटी) राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन