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‘संविधान बदलने की हो रही है साजिश’
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देवबंद (सहारनपुर)। नागरिकता संशोधन कानून, एनपीआर और प्रस्तावित एनआरसी को लेकर महिलाओं का धरना प्रदर्शन 12वें दिन भी जारी रहा। महिलाओं ने कहा कि हमारा यह आंदोलन संविधान को बचाने के लिए है। क्योंकि कुछ ताकतें संविधान को बदलने का षड्यंत्र रच रहीं हैं। जिन्हें किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
मुत्तहिदा ख्वातीन के बैनर तले देवबंद सत्याग्रह के नाम से ईदगाह मैदान में चल रहे धरना प्रदर्शन में शुक्रवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की छात्रा फहम फातिमा ने कहा कि षड्यंत्र के तहत कुछ ताकतें संविधान को बदलना चाहती हैं, महिलाओं का आंदोलन किसी राजनीति का हिस्सा नहीं बल्कि संविधान को बचाने की लड़ाई है, जिसे आखिरी दम तक जारी रखा जाएगा। एएमयू की छात्रा ताजीम जुनैद, खालिदा सिद्दीकी ने कहा कि संविधान को बदलने वाले लोगों का यह ख्वाब कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा। जब तक सरकार इस काले कानून को वापस नहीं लेती महिलाओं का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। जेबा आफरीन ने कहा कि हमारी यह कोशिश बेकार नहीं जाएगा। जिस मुल्क का बादशाह इंसाफ नहीं करता वहां की जनता को सड़कों पर आना ही पड़ता है। दिल्ली जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा हबीबा सदफ ने केंद्र सरकार ने सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास का जो नारा दिया है वो सिर्फ और सिर्फ नारा ही है। इसकी हकीकत कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में लोग सड़कों पर आकर हक के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज को जान बूझकर सुनना ही नहीं चाहती। अगर सरकार जिद पर अड़ी है तो हम भी कानून वापस होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं, महिलाओं के विरोध प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिश जारी है, लेकिन ईदगाह मैदान में भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दोपहर 2 बजे के बाद महिला और पुरुषों की भीड़ जमा होने लगती है। जो देर रात्रि तक वहीं पर जमी रहती है।
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मुत्तहिदा ख्वातीन के बैनर तले देवबंद सत्याग्रह के नाम से ईदगाह मैदान में चल रहे धरना प्रदर्शन में शुक्रवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की छात्रा फहम फातिमा ने कहा कि षड्यंत्र के तहत कुछ ताकतें संविधान को बदलना चाहती हैं, महिलाओं का आंदोलन किसी राजनीति का हिस्सा नहीं बल्कि संविधान को बचाने की लड़ाई है, जिसे आखिरी दम तक जारी रखा जाएगा। एएमयू की छात्रा ताजीम जुनैद, खालिदा सिद्दीकी ने कहा कि संविधान को बदलने वाले लोगों का यह ख्वाब कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा। जब तक सरकार इस काले कानून को वापस नहीं लेती महिलाओं का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। जेबा आफरीन ने कहा कि हमारी यह कोशिश बेकार नहीं जाएगा। जिस मुल्क का बादशाह इंसाफ नहीं करता वहां की जनता को सड़कों पर आना ही पड़ता है। दिल्ली जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा हबीबा सदफ ने केंद्र सरकार ने सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास का जो नारा दिया है वो सिर्फ और सिर्फ नारा ही है। इसकी हकीकत कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में लोग सड़कों पर आकर हक के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज को जान बूझकर सुनना ही नहीं चाहती। अगर सरकार जिद पर अड़ी है तो हम भी कानून वापस होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं, महिलाओं के विरोध प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिश जारी है, लेकिन ईदगाह मैदान में भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दोपहर 2 बजे के बाद महिला और पुरुषों की भीड़ जमा होने लगती है। जो देर रात्रि तक वहीं पर जमी रहती है।

ईदगाह मैदान में धरना प्रदर्शन में विचार रखती महिलाएं- फोटो : DEVBAND
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