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युवाओं को धर्म से जोड़ने के लिए विज्ञान से जोड़ें : दिग्विजय राम
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शुकदेव आश्रम में कथा समापन पर आरती पूजा करते श्रद्धालु।
शुकदेव आश्रम में साप्ताहिक भागवत कथा का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। कथा व्यास दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि युवा वर्ग में जागृति होने के कारण मंदिर की ओर अग्रसर है। यह भारतीय संस्कृति के लिए शुभ संकेत है। युवाओं को धर्म से जोड़ने के लिए विज्ञान से जोड़ें।
शुकतीर्थ के शुकदेव आश्रम में साप्ताहिक भागवत कथा के समापन पर राजस्थान से पधारे कथा व्यास ने कहा कि जब 11 इंद्रियां एकत्र होकर व्रत करती हैं, उसे एकादशी कहते हैं। भागवत नाम के लिए अन्न त्याग होना चाहिए। भरपेट भोजन करने वाले एकादशी नहीं हो सकते। सच्चा मित्र वही जो मित्रता को बदनाम ना होने दें। माया भजन नहीं करने देती। पद से नहीं कर्म से बड़ा होने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि आत्मा को भगवत चरणों में लगाए। जो मानव माया के जाल को समझ लेता है, वह भव तर जाता है। आप कल्याण के लिए भागवत भजन करें। अपनी देह आसक्त को छोड़कर आत्मा से भगवान का स्मरण करें। शुकतीर्थ की पावन धरा पर असत्य प्रवृत्ति को छोड़कर कर जाएं। भागवत के पुष्प अपनी झोली में भर कर ले जाएं। यह जीवन भर आपके काम आएंगे। इस मौके पर स्वामी अपना राम, स्वामी मनसुखराम, स्वामी कीमतराम, स्वामी सेवा राम महाराज को माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। कथा व्यास दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि युवा वर्ग में जागृति होने के कारण मंदिर की ओर अग्रसर है। यह भारतीय संस्कृति के लिए शुभ संकेत है। युवाओं को धर्म से जोड़ने के लिए विज्ञान से जोड़ें।
शुकतीर्थ के शुकदेव आश्रम में साप्ताहिक भागवत कथा के समापन पर राजस्थान से पधारे कथा व्यास ने कहा कि जब 11 इंद्रियां एकत्र होकर व्रत करती हैं, उसे एकादशी कहते हैं। भागवत नाम के लिए अन्न त्याग होना चाहिए। भरपेट भोजन करने वाले एकादशी नहीं हो सकते। सच्चा मित्र वही जो मित्रता को बदनाम ना होने दें। माया भजन नहीं करने देती। पद से नहीं कर्म से बड़ा होने का प्रयास करें।
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उन्होंने कहा कि आत्मा को भगवत चरणों में लगाए। जो मानव माया के जाल को समझ लेता है, वह भव तर जाता है। आप कल्याण के लिए भागवत भजन करें। अपनी देह आसक्त को छोड़कर आत्मा से भगवान का स्मरण करें। शुकतीर्थ की पावन धरा पर असत्य प्रवृत्ति को छोड़कर कर जाएं। भागवत के पुष्प अपनी झोली में भर कर ले जाएं। यह जीवन भर आपके काम आएंगे। इस मौके पर स्वामी अपना राम, स्वामी मनसुखराम, स्वामी कीमतराम, स्वामी सेवा राम महाराज को माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया।

शुकदेव आश्रम में कथा समापन पर आरती पूजा करते श्रद्धालु।
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