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बचपन की टीबी पर होगा वार

Wed, 05 Feb 2020 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2020 12:00 AM IST
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Childhood TB will be affected
हैदराबाद में प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्राप्त करते डॉ लोकेश चंद गुप्ता। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
बचपन की टीबी पर होगा वार
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मुजफ्फरनगर। बचपन को जकड़ रही टीबी पर अब सीधा वार होगा। बच्चों में इस बीमारी की पहचान मुश्किल होती है। अब बाल रोग विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही उपचार भी सरकार के मानकों के आधार पर होगा। हैदराबाद में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञों एवं जिला क्षय रोग अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण दिया गया है। ये अपने जनपदों के चिकित्सकों को ट्रेनिंग देंगे।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) से दो फरवरी को प्रशिक्षण लेकर लौटे जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर लोकेशचंद गुप्ता ने बताया कि बच्चों में टीबी की पहचान आसान नहीं होती। उन्हें बलगम नहीं आता। उनमें टीबी की पहचान एक्सरे से ही संभव है। एक्सरे से टीबी की शंका होने पर मरीज के पारिवारिक इतिहास से बीमारी का पता लगाया जाना चाहिए। इसके साथ ही बच्चे के पेट से बलगम के नमूने लिए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि बच्चों और बड़ों में टीबी के उपचार का तरीका एक जैसा है, लेकिन दवा की डोज का अंतर होता है। निजी चिकित्सकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह सरकारी मानक के अनुरूप टीबी का उपचार करें। सभी को जांच एवं पोषण भत्ते आदि की सरकारी सुविधा भी दिलवाएं।
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जिले में करीब 250 बच्चे टीबी के शिकार
जिले में 18 वर्ष से कम आयु के करीब 250 टीबी रोगी हैं, जबकि कुल रोगियों की संख्या 4500 से ज्यादा है। इनका उपचार चल रहा है। दस फरवरी से नए टीबी रोगियों को खोजने के लिए अभियान भी चलाया जाना है। तीन लाख की आबादी को आधार मानकर टीबी रोगियों की खोज की जाएगी।
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अन्य बीमारियों में छिप जाते हैं टीबी के लक्षण
बच्चों में टीबी के लक्षण अन्य बीमारियों में छिप जाते हैं, लेकिन कुछ विशेष लक्षण टीबी के हो सकते हैं। यदि बच्चों में ये लक्षण नजर आएं तो टीबी की जांच जरूरी है...
- बच्चा यदि लगातार कमजोर हो रहा है।
- तीन माह में उसका वजन पांच से दस प्रतिशत तक गिर गया है।
- खसरा की बीमारी के बाद टीबी होने की आशंका अधिक होती है।
- लगातार बुखार एवं निमोनिया भी टीबी का लक्षण हो सकता है
- लंबे समय तक खांसी हो तो टीबी की जांच कराएं।
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