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घोटालेबाजों को बचाने के लिए छह बार बदली जांच रिपोर्ट
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घोटालेबाजों को बचाने के लिए छह बार बदली जांच रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर। दिल्ली-देहरादून राजमार्ग पर फलौदा में अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा दिए जाने के 11 साल बाद भी एनएचएआई ने कब्जा नहीं लिया है। तीन बीघा जमीन का लगभग 40 लाख मुआवजा दे दिया गया और मौके पर जमीन किसान के ही पास है। तहसील की टीम ने जांच की तो घपला उजागर हो गया। जिला प्रशासन ने एनएचएआई को प्रकरण में कार्रवाई के लिए लिख दिया। अफसरों को बचाने के लिए दो लेखपाल मुख्यमंत्री पोर्टल पर छह अलग-अलग रिपोर्ट दे चुके हैं।
दिल्ली-देहरादून राजमार्ग पर 2010 में सड़क के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण हुआ था। राजमार्ग पर ऐसे कई मामले सामने आए कि अफसरों ने मिलीभगत कर कुछ किसानों को मुआवजा दिला दिया और उनकी जमीन का अधिग्रहण हुआ ही नहीं। ऐसा ही एक मामला फलौदा का सामने आया था। गांव के विशेष त्यागी ने 21 अक्तूबर को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की कि फलौदा के रमेशचंद, महेशचंद, सुरेशचंद के पास 23 बीघा जमीन थी। इसमें से एसएलओ ने राजमार्ग के लिए 18 बीघा अधिग्रहीत कर ली और जमीन का मुआवजा दे दिया गया। 18 बीघा जमीन का मुआवजा देने के बाद अधिग्रहीत केवल 15 बीघा की गई। तहसील की टीम ने मौके पर जांच की तो शिकायत सही पाई गई।
एसडीएम दीपक कुमार की रिपोर्ट के बाद एडीएम वित्त आलोक कुमार ने एनएचआई को इस प्रकरण में कार्रवाई के लिए दस फरवरी को 2021 पत्र भी लिख दिया था। इस बीच मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत जारी रही और विशेष त्यागी ने कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही। गांव में शुरूआत में लेखपाल सुनील कुमार थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर तीन बार मामले का निस्तारण दिखाया। पहली रिपोर्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता को रास्ते की जरूरत है इसलिए शिकायत कर रहा है। शिकायतकर्ता ने अपनी जमीन का सिजरा पोर्टल पर डालते हुए कहा कि उसके पास पहले से ही रास्ता है। लेखपाल ने दूसरी रिपोर्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता बिना वजह शिकायत कर रहा है, इस तरह का कोई मामला नहीं है।
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शिकायकर्ता ने जब पोर्टल पर प्रशासन की ही रिपोर्ट डाल दी तो मामला फिर फंस गया। तीसरी रिपोर्ट में इसे आपसी विवाद बता दिया। सुनील कुमार की जगह लेखपाल हरेंद्र आ गया। हरेंद्र भी अब तक तीन अलग-अलग रिपोर्ट मुख्यमंत्री पोर्टल पर डाल चुके हैं। आखिर में उसने इस मामले को दो पक्षों का आपसी विवाद दिखाते हुए दोनों पक्षों में समझौता दिखाया है। शिकायतकर्ता ने समझौते में शामिल दोनों लोगों के शपथपत्र मुख्यमंत्री पोर्टल पर डालते हुए कहा कि समझौते का कोई औचित्य नहीं है। सरकार या तो जमीन अधिग्रहीत करे या मुआवजे में दिए गए पैसे की वसूली हो। मुख्यमंत्री का पोर्टल मजाक बनकर रह गया है। (संवाद)
पूरे मामले की जांच होगी
डीएम सेल्वा कुमारी जे ने कहा कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर झूठा निस्तारण दिखाया जाना गलत है। एक ही जमीन की छह बार अलग-अलग रिपोर्ट गंभीर मामला है। इसकी वह जांच करा रही हैं। प्रकरण में सही कार्रवाई होगी।
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मुजफ्फरनगर। दिल्ली-देहरादून राजमार्ग पर फलौदा में अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा दिए जाने के 11 साल बाद भी एनएचएआई ने कब्जा नहीं लिया है। तीन बीघा जमीन का लगभग 40 लाख मुआवजा दे दिया गया और मौके पर जमीन किसान के ही पास है। तहसील की टीम ने जांच की तो घपला उजागर हो गया। जिला प्रशासन ने एनएचएआई को प्रकरण में कार्रवाई के लिए लिख दिया। अफसरों को बचाने के लिए दो लेखपाल मुख्यमंत्री पोर्टल पर छह अलग-अलग रिपोर्ट दे चुके हैं।
दिल्ली-देहरादून राजमार्ग पर 2010 में सड़क के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण हुआ था। राजमार्ग पर ऐसे कई मामले सामने आए कि अफसरों ने मिलीभगत कर कुछ किसानों को मुआवजा दिला दिया और उनकी जमीन का अधिग्रहण हुआ ही नहीं। ऐसा ही एक मामला फलौदा का सामने आया था। गांव के विशेष त्यागी ने 21 अक्तूबर को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की कि फलौदा के रमेशचंद, महेशचंद, सुरेशचंद के पास 23 बीघा जमीन थी। इसमें से एसएलओ ने राजमार्ग के लिए 18 बीघा अधिग्रहीत कर ली और जमीन का मुआवजा दे दिया गया। 18 बीघा जमीन का मुआवजा देने के बाद अधिग्रहीत केवल 15 बीघा की गई। तहसील की टीम ने मौके पर जांच की तो शिकायत सही पाई गई।
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एसडीएम दीपक कुमार की रिपोर्ट के बाद एडीएम वित्त आलोक कुमार ने एनएचआई को इस प्रकरण में कार्रवाई के लिए दस फरवरी को 2021 पत्र भी लिख दिया था। इस बीच मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत जारी रही और विशेष त्यागी ने कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही। गांव में शुरूआत में लेखपाल सुनील कुमार थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर तीन बार मामले का निस्तारण दिखाया। पहली रिपोर्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता को रास्ते की जरूरत है इसलिए शिकायत कर रहा है। शिकायतकर्ता ने अपनी जमीन का सिजरा पोर्टल पर डालते हुए कहा कि उसके पास पहले से ही रास्ता है। लेखपाल ने दूसरी रिपोर्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता बिना वजह शिकायत कर रहा है, इस तरह का कोई मामला नहीं है।
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शिकायकर्ता ने जब पोर्टल पर प्रशासन की ही रिपोर्ट डाल दी तो मामला फिर फंस गया। तीसरी रिपोर्ट में इसे आपसी विवाद बता दिया। सुनील कुमार की जगह लेखपाल हरेंद्र आ गया। हरेंद्र भी अब तक तीन अलग-अलग रिपोर्ट मुख्यमंत्री पोर्टल पर डाल चुके हैं। आखिर में उसने इस मामले को दो पक्षों का आपसी विवाद दिखाते हुए दोनों पक्षों में समझौता दिखाया है। शिकायतकर्ता ने समझौते में शामिल दोनों लोगों के शपथपत्र मुख्यमंत्री पोर्टल पर डालते हुए कहा कि समझौते का कोई औचित्य नहीं है। सरकार या तो जमीन अधिग्रहीत करे या मुआवजे में दिए गए पैसे की वसूली हो। मुख्यमंत्री का पोर्टल मजाक बनकर रह गया है। (संवाद)
पूरे मामले की जांच होगी
डीएम सेल्वा कुमारी जे ने कहा कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर झूठा निस्तारण दिखाया जाना गलत है। एक ही जमीन की छह बार अलग-अलग रिपोर्ट गंभीर मामला है। इसकी वह जांच करा रही हैं। प्रकरण में सही कार्रवाई होगी।