शासन-प्रशासन के बीच फंसी चेयरमैन की कुर्सी
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चेयरमैन पंकज अग्रवाल को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद भी उनका मामला शासन और प्रशासन के बीच में फंसा हुआ है। शासन जिले के बीजेपी नेताओं के दबाव में काम कर रहा है। बीजेपी के नेता किसी भी कीमत पर पंकज अग्रवाल को ताकत में नहीं देखना चाहते हैं। यही कारण रहा कि हाईकोर्ट के इससे पहले के आदेश के 14 दिन बाद शासन ने पंकज को प्रशासनिक अधिकार देने के आदेश दिए और उसी दिन एक घंटे बाद प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए।
बहरहाल, पंकज को दोबारा हाईकोर्ट की शरण जाना पड़ा। हाईकोर्ट ने दोबारा फिर पंकज के पक्ष में निर्णय दिया और उन्हें प्रशासनिक अधिकार देने के आदेश 24 मई को दिए गए। दोबारा फिर वही स्थिति सामने आ रही है।
हाईकोर्ट में पंकज अग्रवाल के अधिवक्ता निपुण सैनी का कहना है कि हाईकोर्ट ने शासन के आदेश को निरस्त कर दिया है। जिला प्रशासन को हाईकोर्ट के आदेश की प्रतिलिपि देकर पंकज को अपनी कुर्सी पर बैठ जाना चाहिए। इसमें अलग से शासन से किसी आदेश की कोई आवश्यकता नहीं है। पंकज अग्रवाल ने बताया कि वह पालिका प्रशासक एडीएम वित्त सुनील सिंह और ईओ को पत्र के साथ हाईकोर्ट के आदेश की प्रति देंगे और कार्यभार ग्रहण कर लेंगे। उन्हें शुक्रवार देर शाम आदेश की प्रति मिली है। उधर, ईओ अजीत सिंह का कहना है कि शासन या उच्चाधिकारियों के आदेश का ही वह अनुपालन करेंगे।