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Muzaffarnagar News: मूल दस्तावेज पर जवाब देने के लिए सीबीआई ने मांगा समय
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रामपुर तिराहा कांड
- सीबीआई को नहीं मिल रहे रामपुर तिराहा कांड के मूल दस्तावेज
- अदालत ने सुनवाई के लिए आठ जून की तिथि तय की
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में सामूहिक दुष्कर्म, छेड़छाड़ और लूट समेत अन्य गंभीर धाराओं के मुकदमे के गायब दस्तावेज के मामले में सीबीआई ने अदालत से समय मांगा है। अदालत ने सुनवाई के लिए आठ जून की तिथि तय की। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने मामले की सुनवाई की है।
अदालत में 31 मई को सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक धारा सिंह मीणा ने मुकदमे के मूल दस्तावेज गायब होने की बात कही थी। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए एसपी सीबीआई को आदेश दिए हैं लिखित में यह बताया जाएं कि दस्तावेज कहां गुम हुए हैं। शुक्रवार को सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय की मोहलत मांगी।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह और जोगेंद्र गोयल ने बताया कि सीबीआई को जवाब देने के लिए आठ जून तक का समय दिया गया है।
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बचाव पक्ष का प्रार्थना किया खारिज
सरकार बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली में बचाव पक्ष की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया था कि आरोपियों की पहचान अदालत में नहीं होनी चाहिए। अभियोजन ने आपत्ति जताई। अदालत ने बचाव पक्ष का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है। अदालत का कहना है कि अभियुक्त की पहचान अपने साक्ष्य से किए जाने पर कोई विधिक अवरोध नहीं है।
ये था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। गंभीर धाराओं के सेशन ट्रायल मुकदमों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने जिले के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को अधिकृत किया है।
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- सीबीआई को नहीं मिल रहे रामपुर तिराहा कांड के मूल दस्तावेज
- अदालत ने सुनवाई के लिए आठ जून की तिथि तय की
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में सामूहिक दुष्कर्म, छेड़छाड़ और लूट समेत अन्य गंभीर धाराओं के मुकदमे के गायब दस्तावेज के मामले में सीबीआई ने अदालत से समय मांगा है। अदालत ने सुनवाई के लिए आठ जून की तिथि तय की। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने मामले की सुनवाई की है।
अदालत में 31 मई को सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक धारा सिंह मीणा ने मुकदमे के मूल दस्तावेज गायब होने की बात कही थी। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए एसपी सीबीआई को आदेश दिए हैं लिखित में यह बताया जाएं कि दस्तावेज कहां गुम हुए हैं। शुक्रवार को सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय की मोहलत मांगी।
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शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह और जोगेंद्र गोयल ने बताया कि सीबीआई को जवाब देने के लिए आठ जून तक का समय दिया गया है।
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बचाव पक्ष का प्रार्थना किया खारिज
सरकार बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली में बचाव पक्ष की ओर से अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया था कि आरोपियों की पहचान अदालत में नहीं होनी चाहिए। अभियोजन ने आपत्ति जताई। अदालत ने बचाव पक्ष का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है। अदालत का कहना है कि अभियुक्त की पहचान अपने साक्ष्य से किए जाने पर कोई विधिक अवरोध नहीं है।
ये था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। गंभीर धाराओं के सेशन ट्रायल मुकदमों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने जिले के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को अधिकृत किया है।