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Muzaffarnagar News: सीबीआई ने अदालत में पेश किया गवाह, तीन आरोपियों ने लगाई हाजिरी माफी

Tue, 19 Sep 2023 01:22 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर Updated Tue, 19 Sep 2023 01:22 AM IST
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CBI presented witnesses in court, three accused waived their appearance
--------- देहरादून के लिए भी
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- रामपुर तिराहा कांड में तीन पत्रावलियों पर अदालत में हुई सुनवाई

फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की पत्रावली में अदालत में सीबीआई के गवाह के बयान दर्ज कराए गए। जिरह के लिए तीन अक्तूबर नियत की गई है।
सोमवार में सिविल जज सीनियर डिविजन (एफटीसी प्रथम) के न्यायालय में रामपुर तिराहा कांड की तीन पत्रावलियों पर सुनवाई हुई। सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा पत्रावली में शिमला से पहुंचे गवाह राजेश चहल के बयान हुए। उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता रजनीश चौहान और अनुराग वर्मा ने बताया गवाह से जिरह तीन अक्तूबर को होगी। गौरतलब है कि साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के आरोप में सीबीआई ने तत्कालीन खतौली प्रभारी निरीक्षक एसपी मिश्रा आदि पुलिस कर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
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बचाव पक्ष की और से मुल्जिम एसपी मिश्रा, गजराज सिंह और ब्रज किशोर की तरफ से हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र दिया। वहीं, सीबीआई बनाम राजेंद्र आदि एवं सीबीआई बनाम राजवीर में अगली सुनवाई के लिए 10 अक्तूबर नियत की गई है।
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आज अदालत में हाजिर हो सकती हैं पूर्व गृह सचिव डॉ. दीप्ति विलास
रामपुर तिराहा कांड में तत्कालीन गृह सचिव डॉ. दीप्ति विलास को साक्ष्य के लिए समन भेजे गए थे। मंगलवार को वह अदालत में हाजिर हो सकती हैं। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह केस की सुनवाई कर रहे हैं। शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और रजनीश चौहान ने बताया कि सरकार बनाम मिलाप सिंह और राधा मोहन की पत्रावलियों की सुनवाई चल रही है। अदालत ने तत्कालीन गृह सचिव डॉ. दीप्ति विलास के साक्ष्य के लिए 19 सितंबर की तिथि तय की है।

यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
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